1 जनवरी से ऑनलाइन शॉपिंग के सख्त नियम लागू, फर्जी छूट और छुपे चार्ज पर लगेगी रोक

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अगर आप ऑनलाइन कपड़े, मोबाइल या घर का सामान खरीदते हैं तो यह खबर आपके काम की है. 1 जनवरी 2027 से ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए नए नियम लागू होंगे. इसके बाद कंपनियों के लिए नकली डिस्काउंट दिखाना, छिपी फीस जोड़ना और ग्राहकों को गुमराह करना मुश्किल होगा. आइए आसान भाषा में समझिए आपकी ऑनलाइन शॉपिंग में क्या बदलेगा.

नकली डिस्काउंट

सेल में दिखने वाले बड़े डिस्काउंट को लेकर अब ज्यादा पारदर्शिता होगी. कंपनी को नई कीमत के साथ पुरानी कीमत भी बतानी होगी. यह पुरानी कीमत पिछले 30 दिनों में उस सामान की सबसे कम कीमत के आधार पर तय होगी यानी किसी सामान की कीमत पहले बढ़ाकर बाद में उस पर बड़ा डिस्काउंट दिखाना आसान नहीं होगा.

पैसे देकर ऊपर दिखाया प्रोडक्ट पहचान सकेंगे

सर्च करते समय अगर कोई सामान पैसे देकर ऊपर दिखाया गया है तो उसे विज्ञापन या Sponsored Listing के तौर पर साफ बताना होगा. इससे आपको पता रहेगा कि कौन सा प्रोडक्ट सामान्य सर्च रिजल्ट में आया है और कौन सा पैसे देकर ऊपर दिखाया गया है.

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खरीदने से पहले मिलेगी पूरी जानकारी

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को प्रोडक्ट की जरूरी जानकारी साफ तौर पर देनी होगी –

  • Expiry या Best Before Date
  • Return और Refund Policy
  • Warranty
  • Delivery की जानकारी
  • Payment से जुड़ी जानकारी

विदेशी सामान के मामले में किस देश में बना है और किसने इसे आयात किया है यह जानकारी भी देनी होगी.

छिपी या बेवजह की फीस पर रोक

कंपनियां ऐसी सेवाओं के नाम पर अलग से फीस नहीं वसूल सकेंगी जिनका उनकी मुख्य सेवा से सीधा संबंध नहीं है. हालांकि Loyalty और Membership Program की फीस को इससे छूट दी गई है.

आपकी मर्जी के बिना डेटा का इस्तेमाल नहीं

कंपनियां ग्राहक की जानकारी का इस्तेमाल तय उद्देश्यों के लिए उसकी स्पष्ट मंजूरी के बिना नहीं कर सकेंगी.

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उलझाने वाली ऑनलाइन चालों पर सख्ती

ऐसे तरीके जिनसे ग्राहक को भ्रमित करके या दबाव डालकर कोई सामान या सेवा खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है उन्हें Dark Patterns कहा जाता है. नए नियमों के तहत कंपनियों को Dark Patterns से जुड़ी 2023 की गाइडलाइंस का पालन करना होगा. साथ ही हर साल खुद जांच करनी होगी और नियमों के पालन का सर्टिफिकेट प्लेटफॉर्म पर दिखाना होगा.

शिकायत की कॉपी भी मिलेगी

किसी ई-कॉमर्स कंपनी से शिकायत करने पर ग्राहक को शिकायत की कॉपी देनी होगी. इससे आपके पास शिकायत का रिकॉर्ड रहेगा. इसके अलावा ई-कॉमर्स कंपनियों को नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन से जुड़ना भी जरूरी होगा.

क्यों बदले गए नियम?

ई-कॉमर्स से जुड़ी शिकायतों में बढ़ोतरी को देखते हुए सरकार ने ये बदलाव किए हैं. उपभोक्ता मामलों के विभाग के मुताबिक 2025 में नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन पर 17 लाख 71 हजार 622 शिकायतें आईं. इनमें 5 लाख 11 हजार 196 शिकायतें ऑनलाइन शॉपिंग से जुड़ी थीं.

ई-कॉमर्स के मौजूदा नियम 2020 में बनाए गए थे. सरकार का कहना है कि पिछले कुछ सालों में ऑनलाइन कारोबार और तकनीक में काफी बदलाव आया है इसलिए नियमों को भी अपडेट किया गया है.



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