Graduate Unemployment Rate: भारत में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार कई तरह के प्रयास कर रही है. इसी के परिणाम स्वरूप भारत में उच्च शिक्षा तक पहुंच पहले के मुकाबले काफी बढ़ी है, लेकिन डिग्री मिलने के बाद नौकरी पाना आज भी बड़ी समस्या बना हुआ है. हाल ही में जारी स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया 2026 रिपोर्ट और पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि देश में ग्रेजुएट युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है. लेकिन उसी अनुपात में रोजगार के अवसर नहीं बन पाए. यही वजह है कि आज बड़ी संख्या में डिग्रीधारी युवा नौकरी का इंतजार कर रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार 1983 में 20 से 29 वर्ष आयु वर्ग में करीब 50 लाख ग्रेजुएट थे, जो अब बढ़कर 6.3 करोड़ हो चुके हैं. यानी 4 दशकों में ग्रेजुएट युवाओं की संख्या लगभग 13 गुना बढ़ी है. इसी दौरान बेरोजगार ग्रेजुएट की संख्या 7 लाख से बढ़कर 1.1 करोड़ पहुंच गई. दूसरे शब्दों में जितनी तेजी से उच्च शिक्षा का विस्तार हुआ, उतनी तेजी से रोजगार के अवसर नहीं बढ़ सके.
दो में से एक नहीं, अब हर तीन में दो बेरोजगार युवा ग्रेजुएट
1983 में बेरोजगार युवाओं में हर आठवां व्यक्ति ग्रेजुएट था. अब स्थिति यह है कि हर तीन में दो बेरोजगार युवा डिग्री धारी है. यह बदलाव बताता है कि देश में शिक्षा का दायरा तो बढ़ा है, लेकिन पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार मिलने की प्रक्रिया उतनी मजबूत नहीं हो सकी. रिपोर्ट के अनुसार 25 वर्ष से कम उम्र के ग्रेजुएट्स में बेरोजगारी दर 1983 में 35 फीसदी थी, जो 2023 में बढ़कर 39.3 की शादी हो गई. यानी 4 दशक बाद भी इस वर्ग में बेरोजगारी लगभग, वही बनी हुई है. वहीं 25 से 29 वर्ष आयु वर्ग के ग्रेजुएट्स की स्थिति पहले से ज्यादा खराब हो गई. इस वर्ग में बेरोजगारी दर 12.2 फीसदी से बढ़कर 20 फीसदी तक पहुंच गई. इसका मतलब है कि अब युवाओं को नौकरी मिलने में पहले की तुलना में ज्यादा समय लग रहा है.
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हर साल लाखों ग्रेजुएट, लेकिन सीमित सैलरी वाली नौकरियां
रिपोर्ट बताती है कि 2004 से 2023 के बीच देश में हर साल औसतन 50 लाख नए ग्रेजुएट तैयार हुए. इनमें लगभग 28 लाख को किसी न किसी तरह का रोजगार मिला, लेकिन केवल 17 लाख युवाओं को नियमित वेतन वाली नौकरी मिल सकी. यानी बड़ी संख्या में युवाओं को या तो अस्थायी रोजगार मिला या वे बेरोजगार ही रह गए. पैनल डेटा के अनुसार बेरोजगार होने के एक साल बाद भी लगभग आधे युवा किसी न किसी तरह का काम ढूंढ लेते हैं. लेकिन स्थायी वेतन वाली नौकरी बहुत कम लोगों को मिलती है. वहीं व्हाइट कॉलर जॉब पाने वाले वालों की संख्या और भी कम है.
राज्यों के बीच भी बड़ा अंतर
ग्रेजुएट बेरोजगारी सभी राज्यों में एक जैसी नहीं है. रिपोर्ट के अनुसार 30 वर्ष से कम आयु के पुरुष से ग्रेजुएट्स में बेरोजगारी दर दिल्ली में 8.8 फीसदी है, जबकि ओडिशा में यह 40.3 फीसदी तक पहुंच जाती है. महिला ग्रेजुएट्स की स्थिति कई राज्यों में और ज्यादा चुनौतीपूर्ण है. जम्मू कश्मीर में 73.5 फीसदी, तेलंगाना में 52.3 फीसदी और आंध्र प्रदेश में 51.6 फीसदी महिला ग्रेजुएट बेरोजगार है. राष्ट्रीय स्तर पर यह दर पुरुषों के लिए 25.1 फीसदी और महिलाओं के लिए 36.6 फीसदी दर्ज की गई है.
डिग्री का फायदा अब भी है, लेकिन इंतजार बढ़ गया
रिपोर्ट यह भी बताती है कि ग्रेजुएट्स की शुरुआती कमाई अभी नॉन ग्रेजुएट्स की तुलना में ज्यादा होती है. नौकरी मिलने के बाद उनकी आय बेहतर रहती है, लेकिन अब नौकरी मिलने में पहले से ज्यादा समय लग रहा है. साथ ही शुरुआती सैलरी में बढ़ोतरी की रफ्तार भी पिछले कुछ वर्षों में धीमी हुई है.
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