चेक कर लें आज गैस सिलेंडर की कीमत, कहीं आपके शहर में बढ़े तो नहीं दाम?

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  • घरेलू रसोई गैस की कीमतें जून 2026 से अपरिवर्तित हैं.
  • कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में इस महीने मामूली बढ़ोतरी हुई थी.
  • CEEW: उज्ज्वला लाभार्थी अभी भी पारंपरिक ईंधन पर निर्भर हैं.
  • उज्ज्वला के बावजूद, अधिकांश ग्रामीण परिवार पारंपरिक ईंधन उपयोग करते.

आज, 10 सितंबर 2026 को भारत में घरेलू रसोई गैस (14.2 किलोग्राम) सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. हालांकि, महीने की शुरुआत में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर के रेट में 9.50 से 11.50 रुपये प्रति सिलेंडर का मामूली इजाफा किया था. घरेलू एलपीजी (14.2 किलोग्राम) सिलेंडर के दाम आखिरी बार 7 जून 2026 को बढ़ाए गए थे. उसके बाद से कीमतें पूरी तरह से स्थिर हैं. 

शहरवार चेक करें कीमत

शहर  घरेलू सिलेंडर (14.2 kg) कमर्शियल सिलेंडर (19 kg)
दिल्ली 942.00 2,747.50
मुंबई 941.50 2,701.00
कोलकाता 968.00 2,884.00
चेन्नई 957.50 2,916.50
बेंगलुरु 955.50 2,831.00
हैदराबाद 994.00 2,996.00
पटना 1,031.50 3,029.00
नोएडा 939.50 2,747.50
गुरुग्राम 950.50 2,764.50

CEEW की रिपोर्ट का बड़ा खुलासा

भारत में LPG की पहुंच ज्यादा से ज्यादा घरों तक पहुंचाने की कोशिश तेज है, लेकिन ‘काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर’ (CEEW) की एक नई स्टडी से पता चलता है कि उज्ज्वला योजना के 10 करोड़ से ज्यादा लाभार्थी आज भी चूल्हा फूंक रहे हैं.

CEEW के सर्वे के मुताबिक, प्रधानमंत्री उज्जवला योजना (PMUY) के तहत 10.5 करोड़ से अधिक मुफ्त एलपीजी कनेक्शन तो दिए जा चुके हैं, लेकिन केवल 23% ग्रामीण परिवार ही रसोई गैस का विशेष रूप से इस्तेमाल कर रहे हैं.  बाकी परिवार गैस के साथ-साथ पारंपरिक ईंधन का भी उपयोग करते हैं.

ये नतीजे असम, झारखंड, महाराष्ट्र, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के 2,222 ग्रामीण घरों में नवंबर 2024 और जनवरी 2025 के बीच किए गए सर्वे से मिले हैं. स्टडी में पाया गया कि 48% घर खाना पकाने के लिए मुख्य ईंधन के तौर पर LPG का इस्तेमाल करते हैं, जबकि 50% मुख्य रूप से लकड़ी पर निर्भर हैं.

पूरी तरह से गैस पर निर्भर रहने के लिए सालभर में कम से कम 7 से 8 सिलेंडर की जरूरत होती है, जबकि उज्ज्वला लाभार्थी औसतन साल में सिर्फ 4.8 सिलेंडर ही रिफिल करवा पा रहे हैं. CEEW की इस रिपोर्ट से साफ है कि भले ही कागजों पर एलपीजी की पहुंच लगभग 100% ग्रामीण परिवारों तक दिखाई जा रही हैं, लेकिन इसका वास्तविक इस्तेमाल अब भी बेहद कम है. 

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