हिंदी सिनेमा जगत की बेहतरीन अदाकारा ममता कुलकर्णी किसी ना किसी वजह से चर्चा में रहती हैं. 1990 के दशक में एक्ट्रेस ने कई बेहतरीन फिल्मों में काम किया और अपनी अदाओं के साथ ही एक्टिंग से भी लोगों का दिल जीत लिया था. लेकिन अब सालों बाद जब वो भारत लौटकर आईं तो वो लाइमलाइट से दूर भक्ति में लीन हो गईं. ऐसे में हाल ही में मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान एक्ट्रेस ने अपने ही गाने पर परफॉर्म करने से इनकार कर दिया.
दरअसल, मामला कुछ ऐसा था कि जन्माष्टमी के मौके पर मुंबई में दही हांडी का कार्यक्रम रखा गया था, जिसमें बॉलीवुड से गोविंदा जैसे कलाकार पहुंचे थे. इस दौरान ममता कुलकर्णी भी पहुंची थीं. स्टेज पर एक्ट्रेस ने मराठी में बताया कि उनसे उन्हीं की फिल्म ‘करण अर्जुन’ के गाने ‘राणा जी माफ करना’ पर परफॉर्म करने के लिए कहा गया था. मगर इससे उन्होंने इनकार दिया.
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वो ममता कुलकर्णी मर चुकी है- ममता
ममता ने कहा, ‘मुझसे मेरे गाने राणाजी माफ करना पर परफॉर्म करने के लिए कह रहे हैं. लेकिन वो ममता कुलकर्णी तो कब की मर चुकी है.’ उनके इस बयान के बाद उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और इससे एक बात तो साफ हो गई है कि वो अब शोबिज से एकदम किनारा कर चुकी हैं. लोग उनकी सोशल मीडिया पर तारीफ भी कर रहे हैं.
25 साल बाद भारत लौटी थीं ममता कुलकर्णी
ममता कुलकर्णी करीब 25 साल तक भारत देश से बाहर रही थीं. ममता कुलकर्णी के खिलाफ 2016 में ड्रग्स संबंधी केस दर्ज किया गया था, बाद में बंबई उच्च न्यायालय ने खत्म कर दिया था, जिसके बाद वो भारत 2024 में साध्वी बनकर आईं. उन्होंने इंडिया लौटने पर इमोशनल पोस्ट भी शेयर किया था कि वो साल 2000 से बाहर थीं. वो अपने इस सफर को लेकर काफी भावुक थीं.
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ममता कुलकर्णी कब बनीं तपस्वी?
गौरतलब है कि ममता कुलकर्णी ने खुद इस बारे में बताया था कि उन्होंने साल 2000 में साध्वी बनने का सफर शुरू किया था. एक्ट्रेस ने उसी समय तपस्या शुरू की थी और इसके बाद वो चकाचौंध भरी दुनिया से दूर होती चली गईं. फिर वो धीरे-धीरे शोबिज से दूर आध्यात्म की ओर बढ़ीं. एक्ट्रेस ने खुद बताया था कि उन्होंने करीब 23-25 साल तक तपस्या की है.
2025 में प्रयागराज में लिया था संन्यास
इतना ही नहीं, मुंबई लौटने के बाद ममता कुलकर्णी ने साल 2025 में प्रयागराज पहुंचकर संन्यास लिया था. संगम के किनारे उन्होंने पिंडदान और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों को पूरा कर सांसारिक जीवन त्याग दिया था और उन्होंने अपना नया नाम ‘माई ममता नंद गिरी’ को अपनाया था. किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्व भी बनी थीं.