Which Sibling Has Highest IQ According To Science: एक ही घर में पले-बढ़े भाई-बहनों के बीच अक्सर यह देखा जाता है कि उनकी बुद्धि, सोचने का तरीका और व्यवहार एक-दूसरे से काफी अलग होता है. समान परवरिश, एक जैसे संसाधन और एक ही माहौल के बावजूद यह अंतर क्यों आता है, यह सवाल लंबे समय से सॉइकोलॉजिस्ट और रिसर्चर को आकर्षित करता रहा है. अब रिसर्च इस रहस्य को कुछ हद तक समझाने लगे हैं, जहां जन्म क्रम भी एक अहम भूमिका निभाता नजर आता है.
कौन सा बच्चा ज्यादा बुद्धिमान?
अक्सर यह माना जाता है कि पहला बच्चा सबसे ज्यादा बुद्धिमान होता है. इस धारणा के पीछे कुछ साइंटफिक आधार भी मिलते हैं. एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के एक स्टडी के अनुसार, पहले जन्मे बच्चों में सोचने-समझने की क्षमता अपने छोटे भाई-बहनों की तुलना में अधिक विकसित पाई गई. इसी तरह एडिनबर्ग विश्वविद्यालय, एनालिसिस ग्रुप और सिडनी विश्वविद्यालय के इकोनॉमिस्ट ने अमेरिकी ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स के आंकड़ों का एनालिसिस किया. इस रिसर्च में पाया गया कि पहले जन्मे बच्चे एक साल की उम्र से ही इंटेलिजेंस टेस्ट में अपने भाई-बहनों से आगे रहने लगते हैं.
क्या होते हैं इस अंतर के कारण?
इस अंतर के पीछे कई कारण बताए गए हैं. पहला कारण है माता-पिता का पूरा ध्यान. परिवार में जब पहला बच्चा होता है, तो उसे माता-पिता का पूरा समय और मार्गदर्शन मिलता है. एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के रिसर्च में यह भी सामने आया कि भले ही माता-पिता सभी बच्चों को इमोशनल रूप से समान समर्थन देते हों, लेकिन पहले बच्चे को मानसिक विकास से जुड़े कार्यों में अधिक मदद मिलती है.
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सिखाने का भी प्रभाव
दूसरा महत्वपूर्ण कारण है सिखाने का प्रभाव. बड़ा बच्चा अक्सर अपने छोटे भाई-बहनों को चीजें सिखाता है. यह प्रक्रिया उसके अपने ज्ञान और समझ को और मजबूत करती है. यानी सिखाने से उसकी सीखने की क्षमता और बेहतर हो जाती है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि मंझला या सबसे छोटा बच्चा कम बुद्धिमान होता है. कई बार छोटे बच्चे अलग तरह की क्षमताओं में आगे निकल जाते हैं, जैसे क्रीएइवटिविटी, सामाजिक समझ या नए विचारों के प्रति खुलापन.
पालन-पोषण में बदलाव का असर
एक और महत्वपूर्ण पहलू है पालन-पोषण में बदलाव. हर बच्चे के साथ माता-पिता का व्यवहार थोड़ा बदल जाता है. अनुभव बढ़ने के साथ उनका तरीका भी बदलता है, जो अनजाने में बच्चों के आत्मविश्वास, सोच और व्यक्तित्व को प्रभावित करता है. माता-पिता के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे बच्चों को किसी एक पहचान में बांधकर न रखें. यह सबसे होशियार है या यह शरारती है जैसे लेबल बच्चों के मन पर गहरा असर डालते हैं और वे खुद को उसी नजर से देखने लगते हैं. इसके बजाय बच्चों के प्रयास, मेहनत और प्रगति पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.