बेंगलुरु टावर डिमोलिशन: झुकी इमारत गिरेगी, कितना मिलेगा मुआवजा?

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Bengaluru Apartment: अगर आपने भी हाल ही में किसी अंडर-कंस्ट्रक्शन या नए अपार्टमेंट में निवेश किया है, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. बेंगलुरु में एक रियल एस्टेट प्रोजेक्ट का 18 मंजिला रिहायशी टावर अचानक इन दिनों काफी सुर्खियों में हैं. इसकी सबसे खास बात यह है कि इमारत को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) मिल चुका था और सभी 49 फ्लैट बिक चुके थे. फ्लैट खरीदारों को कब्जा देने की तैयारी के बीच अचानक तकनीकी जांच में इमारत में संरचनात्मक गड़बड़ी सामने आई. इसके बाद बिल्डर ने खुद एहतियात के तौर पर पूरे टावर को गिरकर नए सिरे से बनाने का फैसला लिया है. 

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा मामला बेंगलुरु के कुडलू इलाके में बने SNN Raj Eternia प्रोजेक्ट के ई-3 टावर का है. इस 18 मंजिला टावर में कुल 49 फ्लैट हैं और सभी फ्लैट बिक चुके थे, वहीं जल्द ही फ्लैट के खरीदारों को कब्जा मिलने वाला था. लेकिन ऐन मौके पर जांच के दौरान इंजीनियरों को इमारत में हल्का झुकाव मिला, जिसके बाद कंपनी ने इसे गिराकर फिर से दूसरा टावर बनाने का फैसला किया. कंपनी का कहना है कि बाकी सभी टावर पूरी तरह महफूज हैं और यह दिक्कत सिर्फ इसी ब्लॉक में मिली है.

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खरीदारों को क्या मिलेगा?

कंपनी ने बताया कि टावर बनने तक सभी 49 फ्लैट खरीदारों को आर्थिक सहायता दी जाएगी. हालांकि यह रकम फ्लैट के आकार के हिसाब से तय की जाएगी, ताकि खरीदारों की ईएमआई और किराए का खर्च कुछ हद तक पूरा हो सके. इसके अलावा, नए टावर के निर्माण का पूरा खर्च भी कंपनी खुद उठाएगी.

कब तक बनेगा नया टावर?

कंपनी के मुताबिक, पुराने टावर को गिराने में करीब 5 से 6 महीने लग सकते हैं. ऐसे में नया टावर बनाने में करीब 18 महीने का समय लग सकता है. वहीं इस पूरे काम करीब 20 करोड़ खर्च होने का अनुमान है.

आखिर क्यों गिराया जा रहा है टावर?

दरअसल, जांच में यह पता चला कि टावर के निर्माण के दौरान मिट्टी की जो रिपोर्ट इस्तेमाल की गई थी, उसमें गड़बड़ी थी. इसी वजह से 60 मीटर ऊंची इमारत में करीब 200 मिमी का झुकाव आ गया. हालांकि यह झुकाव सामान्य तौर पर दिखाई नहीं देती है, बल्कि इसे खास मशीनों के मदद से पहचान की गई है. वहइन एक्सपर्टों ने मरम्मत का सुझाव दिया था, लेकिन भविष्य में किसी बड़े खतरे की आशंका को देखते हुए कंपनी ने पूरे टावर को दोबारा बनाने का फैसला किया.

दूसरे मामलों से कैसे अलग है यह मामला?

आमतौर पर हम देखते हैं कि ऐसी इमारतें कोर्ट के आदेश पर गिराई जाती हैं, लेकिन इस मामले में बिल्डर ने खुद आगे याकर टावर को ध्वस्त करने का फैसला किया है. कंपनी का कहना है कि ग्राहकों की सुरक्षा उसके लिए सबसे जरूरी है. यही वजह है कि फ्लैट सौंपने से पहले ही यह कदम उठाया गया है. 

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