कोविड के बाद से दुनियाभर में वर्क फ्रॉम होम का कल्चर शुरू हुआ था. जिसको कई कंपनियां अब तक भी कंटीन्यू कर रही हैं. कर्मचारियों की सहूलियत के लिए कंपनियां उन्हें वर्क फ्रॉम हो दे देती है. लेकिन हाल ही में एक मामला ऐसा सामने आया है जिसमें एक बॉस की वर्क फ्रॉम होम की पॉलिसी पर कर्मचारियों ने आपत्ति जताई और एक साथ नौकरी ही छोड़ दी.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल हम बात कर रहे हैं अमेरिका की, जहां के अरबपति वकील और फ्लोरिडा के राजनेता जॉन मॉर्गन के एक बयान ने नई बहस छेड़ दी है. जिसके चलते मॉर्गन की कंपनी में वर्क फ्रॉम होम करने वाले 23 कर्मचारियों ने सिर्फ एक हफ्ते में ही नौकरी छोड़ दी. इसके पीछे की वजह रही कंपनी की नई कैमरा मॉनिटरिंग पॉलिसी, जिससे परेशान होकर लोगों ने नौकरी ही छोड़ दी. इस बारे में खुद जॉन मॉर्गन ने एक पॉडकास्ट में बताया है.
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WFH में कैमरा रहेगा ऑन
जॉन मॉर्गन ने ‘द आइस्ड कॉफी हावर’ पॉडकास्ट में बताया कि, ‘जो कर्मचारी ऑफिस वापस नहीं आना चाहते थे, उन्हें घर से काम करने की अनुमति दी गई थी. लेकिन इसके लिए उनके ऑफिस के लैपटॉप से कैमरा चालू रखकर निगरानी की शर्त रखी गई. इस नीति के लागू होने के बाद पहले ही हफ्ते में 23 कर्मचारियों ने इस्तीफा दे दिया था.’
हालांकि मॉर्गन ने इन ये भी बताया कि उन्होंने इन इस्तीफों को इस तरह देखा कि कुछ कर्मचारी कंपनी की ओर से की जाने वाली निगरानी और जवाबदेही को स्वीकार नहीं करना चाहते थे. उन लोगों को घर से काम करने में परेशानी नहीं थी, बल्कि वो काम करना ही नहीं चाहते थे.
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
मॉर्गन के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों के बीच बहस शुरू हो गई. कई लोगों ने सवाल उठाया कि क्या घर से काम करने वाले कर्मचारियों पर पूरे समय कैमरे से नजर रखना सही तरीका है. तो वहीं कई लोगों ने ये भी कहा कि कर्मचारी शायद काम से नहीं, बल्कि हर समय निगरानी और प्राइवेसी में दखल से परेशान थे. उनके मुताबिक ये ऐसा है जैसे बॉस पूरे दिन कर्मचारी के कंधे के ऊपर खड़े होकर उसे देखता रहे.
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