बोतल-कैन से हटेगा ‘एनर्जी ड्रिंक’ का लेबल, सरकार ने कंपनियों को दी डेडलाइन

9e4862912ee35c8b9ceb2d165ca3e5d91785319923871940 original


Energy Drink Label Ban: भारत के खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने ज्यादा कैफीन वाले पदार्थ बेचने वाली कंपनियों को “एनर्जी ड्रिंक” शब्द का इस्तमाल नहीं करने का निर्देश दिया है. रेगुलेटर का कहना है कि भारत में इस तरह के उत्पादों के लिए “एनर्जी ड्रिंक” की कोई  मानक तय  नहीं हैं.

एफएसएसएआई का कहना है कि “शरीर और दिमाग को ऊर्जा देता है” या “कमजोरी दूर करता है” जैसे दावें लोंगो को गुमराह करते हैं. इसलिए कंपनियों को ऐसे दावें नहीं करने चाहिए.

इस फैसले का पेप्सी के साथ- साथ कई कंपनियां विरोध कर रही है. उनका कहना है कि इससे उनके ब्रांड और बिक्री पर असर पड़ेगा. हालांकि, एफएसएसएआई के सीईओ रजित पुनहानी ने साफ कर दिया कि अगर कंपनियां असहमत हैं तो वे अदालत जा सकती हैं.

यह भी पढ़ें: Paytm बैंक बंद, हाई कोर्ट ने सुनाया फैसला, आप पर क्या होगा असर?

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, कंपनियों ने आखिरकार नियम मानने पर सहमति जताई है और एफएसएसएआई ने लेबल बदलने के लिए 90 दिन का समय दिया है.

दुनियाभर में हाई-कैफीन वाले पेय पदार्थों को लेकर स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं बढ़ रही हैं, क्योंकि इनमें कैफीन, चीनी और टॉरिन की मात्रा ज्यादा होती है. इसी कारण इंग्लैंड में अगले साल अप्रैल से 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को ऐसे पेय बेचने पर रोक लग जाएगी। वहीं, पाकिस्तान के कुछ क्षेत्रों में इन्हें “स्टिमुलेंट ड्रिंक” (उत्तेजक पेय) के नाम से बेचा जाता है.

एनर्जी ड्रिंक कंपनियों की चिंता, विज्ञापनों पर भी असर

एनर्जी ड्रिंक कंपनियां अपने उत्पादों का प्रचार इस दावे के साथ करती हैं कि इन्हें पीने से तुरंत ऊर्जा मिलती है. यही वजह है कि इनके विज्ञापनों में जोश और फुर्ती बढ़ाने वाले संदेश दिखाए जाते हैं.

रेड बुल का प्रसिद्ध स्लोगन “Gives You Wiiings” है, जबकि पेप्सी अपने स्टिंग ड्रिंक के विज्ञापनों में दावा करती है कि इसे पीने से शरीर में बिजली जैसी ऊर्जा का एहसास होता है. इंडियन बेवरेज एसोसिएशन ने कहा कि वह सरकार के नियमों का पालन करेगी और विज्ञान पर आधारित नीतियों का समर्थन करती है.

कारोबार हो सकता है प्रभावित 

हालांकि, एसोसिएशन ने 6 जुलाई को FSSAI को भेजे एक गोपनीय पत्र में कहा कि शुरुआती नोटिसों को सार्वजनिक करने से कंपनियों की साख को नुकसान पहुंच सकता है, कारोबार प्रभावित हो सकता है और उपभोक्ताओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है.

एसोसिएशन का यह भी कहना है कि कोई भी बड़ा नियम लागू करने से पहले कंपनियों से चर्चा की जानी चाहिए, ताकि नियमों को आसानी से लागू किया जा सके, विवाद कम हों और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे.

यह भी पढ़ें: पति ने दुबई से भेजे 80 लाख, पत्नी को मिला इनकम टैक्स का नोटिस, कोर्ट ने सुनाया ये फैसला



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *