दूध की दुनिया में गाय, भैंस, बकरी और सोया-बादाम जैसे विकल्पों के बाद अब एक और अजीबोगरीब नाम चर्चा में है, कॉकरोच का दूध. सुनने में यह जितना अजीब लगता है, साइंस की दुनिया में यह उतना ही दिलचस्प विषय बन चुका है. असल में यह दूध किसी आम तिलचट्टे से नहीं, बल्कि पैसिफिक बीटल कॉकरोच नाम की एक खास प्रजाति से मिलता है, जो अपने बच्चों को पोषण देने के लिए यह खास तरल पदार्थ बनाती है. वैज्ञानिकों का दावा है कि पोषण के मामले में यह गाय और भैंस के दूध से भी कहीं आगे है. आइए जानते हैं कि आखिर यह दूध कैसे निकाला जाता है और इसे इतना हेल्दी क्यों माना जा रहा है.
किस कॉकरोच से मिलता है यह दूध?
पैसिफिक बीटल कॉकरोच एक ऐसी प्रजाति है, जो अंडे देने के बजाय सीधे बच्चों को जन्म देती है, इसे साइंस की भाषा में विविपैरिटी कहा जाता है. मां कॉकरोच अपने विकसित हो रहे भ्रूण को एक खास तरल पदार्थ पिलाती है, जो शुरुआत में लिक्विड फॉर्म में होता है. जैसे-जैसे भ्रूण बड़ा होता है, यह तरल पदार्थ उसके पेट के अंदर जाकर क्रिस्टल यानी छोटे-छोटे कणों का रूप ले लेता है. यही चमकते हुए क्रिस्टल असल में कॉकरोच मिल्क कहलाते हैं.
कैसे निकाला जाता है यह दूध?
कॉकरोच मिल्क निकालने का तरीका गाय-भैंस का दूध निकालने से बिल्कुल अलग है. इसे बाहर से दुहा नहीं जा सकता, क्योंकि यह क्रिस्टल कॉकरोच के बच्चों के पेट के अंदर बनते हैं. इसे निकालने के लिए गर्भवती मादा कॉकरोच को सावधानी से चीरकर उसके अंदर मौजूद भ्रूण तक पहुंचा जाता है, और फिर उन भ्रूणों को खोलकर उनके पेट से यह क्रिस्टल अलग किए जाते हैं.
कुछ रिसर्चर्स इसके लिए एक अलग तरीका भी अपनाते हैं, जिसमें भ्रूण की जगह फिल्टर पेपर रखकर उसमें यह तरल पदार्थ सोखने दिया जाता है. यह पूरी प्रक्रिया बेहद बारीक और समय लेने वाली होती है, और एक बार में बहुत ही कम मात्रा में दूध हासिल हो पाता है.
क्यों माना जाता है यह इतना पौष्टिक?
रिसर्च के मुताबिक कॉकरोच मिल्क में प्रोटीन, जरूरी अमीनो एसिड, फैट और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा किसी भी आम दूध के मुकाबले कहीं ज्यादा पाई जाती है. इसमें प्रोटीन की मात्रा करीब 45 प्रतिशत तक होती है, और यह शरीर के लिए जरूरी सभी नौ अमीनो एसिड भी उपलब्ध कराता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि इसकी कैलोरी और एनर्जी कंटेंट गाय के दूध से करीब चार गुना और भैंस के दूध से करीब तीन गुना तक ज्यादा हो सकती है. यही वजह है कि इसे दुनिया के सबसे पौष्टिक तरल पदार्थों में गिना जा रहा है.
यह भी पढ़ें: किस काम आता है विजडम टूथ, इसे कब निकलवा देना चाहिए?
क्या इंसान पी सकते हैं यह दूध?
फिलहाल कॉकरोच मिल्क को लेकर इंसानों पर कोई क्लिनिकल टेस्ट नहीं हुआ है, इसलिए यह अभी साफ नहीं है कि यह इंसानी सेहत के लिए पूरी तरह सुरक्षित है या नहीं. इसे निकालने की प्रक्रिया इतनी मुश्किल और धीमी है कि बड़े स्तर पर इसे बाजार में लाना फिलहाल संभव नहीं दिखता, क्योंकि हर बार इसे निकालने के लिए कॉकरोच और उसके भ्रूण को खोना पड़ता है.
यही वजह है कि वैज्ञानिक अब इसकी जगह जेनेटिकली मॉडिफाइड यीस्ट की मदद से इस प्रोटीन को लैब में तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि भविष्य में इसे बिना कॉकरोच को नुकसान पहुंचाए भी हासिल किया जा सके. अगर यह तरीका कामयाब होता है, तो आने वाले समय में यह एक नए सुपरफूड के तौर पर बाजार में आ सकता है.
यह भी पढ़ें: बालों में ऊद ऑयल लगाने के क्या फायदे हैं? हजारों में है कीमत