पिता का साया बचपन में उठा, मां ने बीड़ी बनाकर पढ़ाया, तब बेटा बना IAS


साई किरण के पिता कांता राव का 2016 में कैंसर की वजह से निधन हो गया था. इसके बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनकी मां पर आ गई.  जिसके बाद उन्होंने बीड़ी बनाकर परिवार का घर चलाया और अपने बच्चों की पढ़ाई जारी रखी. मां की मेहनत का असर बच्चों पर भी दिखाई दिया. साई किरण की बहन श्रावंती ने बसारा आईआईटी कैंपस से पढ़ाई की और फिलहाल मिशन भागीरथा में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के पद पर काम कर रही है.

साई किरण के पिता कांता राव का 2016 में कैंसर की वजह से निधन हो गया था. इसके बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनकी मां पर आ गई.  जिसके बाद उन्होंने बीड़ी बनाकर परिवार का घर चलाया और अपने बच्चों की पढ़ाई जारी रखी. मां की मेहनत का असर बच्चों पर भी दिखाई दिया. साई किरण की बहन श्रावंती ने बसारा आईआईटी कैंपस से पढ़ाई की और फिलहाल मिशन भागीरथा में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के पद पर काम कर रही है.

वहीं साई किरण ने अपनी शुरुआती पढ़ाई वेलिचाला के सरस्वती स्कूल से की इसके बाद उन्होंने करीमनगर से हाई स्कूल और ट्रिनिटी कॉलेज से पढ़ाई पूरी की. आगे उन्होंने इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी वारंगल से बीटेक किया.

वहीं साई किरण ने अपनी शुरुआती पढ़ाई वेलिचाला के सरस्वती स्कूल से की इसके बाद उन्होंने करीमनगर से हाई स्कूल और ट्रिनिटी कॉलेज से पढ़ाई पूरी की. आगे उन्होंने इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी वारंगल से बीटेक किया.

कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद साई किरण ने सॉफ्टवेयर सेक्टर में नौकरी शुरू की. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने हैदराबाद के क्वालकॉम के साथ हार्डवेयर इंजीनियर के तौर पर भी काम किया. इसी दौरान उनका रुझान सिविल सेवा परीक्षा की तरफ बढ़ा और उन्होंने 2021 में यूपीएससी की तैयारी शुरू की.

कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद साई किरण ने सॉफ्टवेयर सेक्टर में नौकरी शुरू की. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने हैदराबाद के क्वालकॉम के साथ हार्डवेयर इंजीनियर के तौर पर भी काम किया. इसी दौरान उनका रुझान सिविल सेवा परीक्षा की तरफ बढ़ा और उन्होंने 2021 में यूपीएससी की तैयारी शुरू की.

साई किरण ने नौकरी करते हुए यूपीएससी की तैयारी शुरू की. वह वीकेंड और छुट्टियों का इस्तेमाल पढ़ाई के लिए करते थे. तैयारी के दौरान उन्होंने यूट्यूब वीडियो, ऑनलाइन रिसोर्स और किताबों की मदद ली. वहीं पहले प्रयास में उन्होंने सफलता नहीं मिली, इसके बाद उन्होंने अपनी तैयारी पर दोबारा ध्यान दिया.

साई किरण ने नौकरी करते हुए यूपीएससी की तैयारी शुरू की. वह वीकेंड और छुट्टियों का इस्तेमाल पढ़ाई के लिए करते थे. तैयारी के दौरान उन्होंने यूट्यूब वीडियो, ऑनलाइन रिसोर्स और किताबों की मदद ली. वहीं पहले प्रयास में उन्होंने सफलता नहीं मिली, इसके बाद उन्होंने अपनी तैयारी पर दोबारा ध्यान दिया.

नौकरी छोड़कर पूरी पढ़ाई पर फोकस करने का फैसला भी किया. हालांकि रिश्तेदारों ने उन्हें नौकरी नहीं छोड़ने की सलाह दी. इसके बाद उन्होंने कोचिंग की मदद लेने का फैसला किया और तैयारी जारी रखी. दूसरे प्रयास में उनकी मेहनत रंग लाई और यूपीएससी सीएसई 2023 में उन्होंने 27वीं ऑल इंडिया रैंक हासिल की.

नौकरी छोड़कर पूरी पढ़ाई पर फोकस करने का फैसला भी किया. हालांकि रिश्तेदारों ने उन्हें नौकरी नहीं छोड़ने की सलाह दी. इसके बाद उन्होंने कोचिंग की मदद लेने का फैसला किया और तैयारी जारी रखी. दूसरे प्रयास में उनकी मेहनत रंग लाई और यूपीएससी सीएसई 2023 में उन्होंने 27वीं ऑल इंडिया रैंक हासिल की.

साई किरण अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां की मेहनत को देते हैं. उन्होंने कहा कि आज वह जिस मुकाम पर है, उनके पीछे उनकी मां की मेहनत और संघर्ष है. वह इसे कभी नहीं भूलेंगे. उनकी सफलता के बाद परिवार, रिश्तेदारों और गांव के लोगों में खुशी का माहौल था. जिस मां ने बीड़ी बनाकर अपने बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाया, उसी के बेटे ने यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा में देशभर में 27वीं रैंक हासिल कर परिवार का नाम रोशन किया.

साई किरण अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां की मेहनत को देते हैं. उन्होंने कहा कि आज वह जिस मुकाम पर है, उनके पीछे उनकी मां की मेहनत और संघर्ष है. वह इसे कभी नहीं भूलेंगे. उनकी सफलता के बाद परिवार, रिश्तेदारों और गांव के लोगों में खुशी का माहौल था. जिस मां ने बीड़ी बनाकर अपने बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाया, उसी के बेटे ने यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा में देशभर में 27वीं रैंक हासिल कर परिवार का नाम रोशन किया.

Published at : 17 Sep 2026 10:10 AM (IST)

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