Explained: 6 साल बाद कैसे खुला भारत-चीन का बॉर्डर? डिटेल में समझें A टू  Z बात

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  • छह साल बाद भारत-चीन के संबंध पटरी पर लौटे।

India-China Border Trade: 1 अगस्त यानी शुक्रवार को भारत और चीन के बीच बॉर्डर-ट्रेड यानी व्यापार शुरू हो गया. भारत और चीन के बीच 3488 किलोमीटर लंबी एलएसी( Line of Actual control) जिसे हम वास्तविक नियंत्रण रेखा के नाम से जानते हैं, वहां तीन अलग-अलग बॉर्डर पोस्ट पर व्यापार शुरू होने की खबर आई. एएसी पर जो तीन व्यापार चौकियां हैं, उसमें एक है सिक्किम के नाथुला बॉर्डर पर, दूसरी है उत्तराखंड और नेपाल के ट्राई-जंक्शन लिपूलेख पर और तीसरी है हिमाचल प्रदेश की शिपकी ला पोस्ट.

नाथूला और लिपूलेख से कैलाश मानसरोवर का यात्रा भी तिब्बत के लिए जाता है. इन तीनों चौकियों पर एक साथ द्विपक्षीय व्यापार शुरू हो गया. भारत-चीन सीमा की रखवाली करने वाली इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस, ITBP ने व्यापार शुरू होने की जानकारी दी और बॉर्डर खुलने की तस्वीरें भी साझा की. तस्वीरों में देखा जा सकता है कि आईटीबीपी और स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों के अलावा चीन की बॉर्डर पुलिस और दोनों देशों के व्यापारी भी वहां मौजूद हैं.

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भारत और चीन के व्यापार के बारे में जानें

सिक्किम के नाथुला सटे शेराथांग में भारत और चीन के व्यापारियों के बीच एक छोटी मार्केट भी है, जहां दोनों देशों के व्यापारी अपना-अपना सामान लाकर बेचते हैं. बॉर्डर खुलने पर यहां खुद सिक्किम के कॉमर्स और टूरिज्म मंत्री टीटी भूटिया भी छह साल बाद बॉर्डर पोस्ट खुलने और ट्रेड शुरु होने के उपलक्ष्य में यहां पहुंचे.  आखिर ये ट्रेड पोस्ट क्यों खोली गई हैं, उससे पहले थोड़ा भारत और चीन के व्यापार के बारे में जानने लेते हैं.

भारत और चीन के बीच हर साल करीब 155 बिलियन डॉलर यानी मान सकते हैं कि 12 लाख करोड़ का व्यापार होता है. भारत अधिकतर इलेक्ट्रॉनिक्स, टेलीकॉम, मोबाइल उपकरण, दवाइयों के लिए सामग्री और इंडस्ट्रियल मशीनरी, ऑटो सेक्टर से जुड़े सामान आयात करता है तो भारत जिन  वस्तुओं का निर्यात करता है, उसमें शामिल हैं आयरन ओर, खनिज, कृषि और समुद्री उत्पाद. लेकिन दोनों देशों के बीच व्यापार में बड़ा अंतर है.

दोनों देशों के बीच व्यापार क्यों बंद हुए?

इस वर्ष यानी 2026 के पहले छह महीने में चीन ने भारत से करीब 7 लाख करोड़ का व्यापार किया, जबकि भारत ने महज एक लाख करोड़ का. कोरोना काल के बाद और गलवान घाटी की झड़प के बाद भी दोनों देशों के बीच व्यापार पूरी तरह बंद नहीं हुआ था.

भारत ने चीन के सोशल मीडिया ऐप्स पर जरूर बैन लगाया था. लेकिन बॉर्डर ट्रेड पूरी तरह बंद कर दिया गया था. क्योंकि दोनों देशों की सेनाएं आमने सामने थी. अगर बॉर्डर ट्रेड को दोनों देशों के बीच होने वाले कुल व्यापार को देखेंगे तो ये बेहद कम है. लेकिन Symbolically यानी प्रतीकात्मक रूप से ये बेहद महत्वपूर्ण है.

अगर इन तीनों चौकियों से बात करें तो भारत की तरफ से ड्राई-फ्रूट, मसाले, हैंडीक्राफ्ट और जड़ी-बूटियां निर्यात की जाती है. जैसा तस्वीरों में देख सकते हैं, इसके लिए पोनी यानी म्यूल्स और छोटी वैन का इस्तेमाल करते हैं. क्योंकि ये तीन बॉर्डर पोस्ट हाई ऑल्टिट्यूड एरिया में हैं यानी 10-12 हजार फीट की ऊंचाई पर. यही वजह है कि ट्रेड पोस्ट खुलना दोनों देशों के बीच संबंधों के सामान्य होने की दिशा में बेहद अहम माना जा रहा है.

गलवान घाटी की झड़प के चार साल बाद यानी 2024 में भारत और चीन ने डिस-इंगेजमेंट समझौता किया था. इसके तहत दोनों देशों की सेनाएं, एलएसी और खासतौर से पूर्वी लद्दाख के सभी विवादित इलाकों से पीछे हट गई थी. लेकिन उसके बाद भी भारतीय सेना ने साफ कर दिया था कि समझौता जरूर हुआ है, लेकिन अभी भी चीन पर इतनी जल्दी विश्वास नहीं किया जा सकता है. क्योंकि चीन की PLA सेना की फितरत रही है सलामी-स्लाइसिंग की यानी धीरे-धीरे कर बॉर्डर पर आगे बढ़ने और घुसपैठ करने की. 

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भारत और चीन के संबंध पटरी पर लौट रहे

पिछले छह सालों में यानी गलवान घाटी की झड़प के बाद, पूरी 3488 किलोमीटर लंबी एलएसी पर पूर्वी लद्दाख के काराकोरम पास से लेकर हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश तक किसी भी सेक्टर में चीनी सेना की घुसपैठ की कोई खबर सामने नहीं आई है. ऐसे में चीन ने बॉर्डर पर धीरे-धीरे विश्वास जीतने की कोशिश की है, जिसके चलते ये तीनों बॉर्डर पोस्ट खोली गई हैं व्यापार के लिए. ये तीनों व्यापार चौकियां ऐसे समय में खोली गई हैं, जब अगले महीने यानी 12-13 सितंबर को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का भारत दौरा है.

ऐसे में यें माना जा सकता है कि छह साल बाद भारत और चीन के संबंध पटरी पर लौट रहे हैं. हालांकि, पिछले साल 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एसओसी समिट के लिए चीन का दौरा किया था. 2024 में रूस के कजान में हुई ब्रिक्स समिट में पीएम मोदी और शी जिनपिंग ने मुलाकात की थी. उस वक्त से दोनों देशों के संबंध सामान्य होने शुरू हो गए थे. कजान शिखर सम्मेलन से ठीक पहले चीन ने भारत के साथ डिसएंगेजमेंट करार किया था.

दोनों देशों की सेनाओं के बीच खूनी झड़प हुई थी

छह साल पहले यानी जून 2020 में पूर्वी लद्दाख से सटी गलवान घाटी में भारत और चीन की सेनाओं के बीच खूनी झड़प हुई थी, जिसमें भारत के एक कर्नल रैंक के अधिकारी संतोष बाबू समेत 20 सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए थे. चीन को भी इस झड़प में भारी नुकसान हुआ था. हालांकि, चीन ने कभी भी अपने मारे गए सैनिकों का आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया था. हां, जिन सैनिकों को भारत के खिलाफ लड़ने के लिए वीरता मेडल मिले थे, वे नाम जरूर सार्वजनिक किए थे.

ऐसे में जब तक डिसएंगेजमेंट करार नहीं हुआ था, यानी 2024 तक भारत और चीन के संबंधों में जबरदस्त दरार रही थी. लेकिन इस बीच 2024 से भारत और अमेरिका के संबंधों में भी खटास आनी शुरु हो गई थी. अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में आने से इन संबंधों में अधिक तल्खी देने को मिलने लगी. भले, ट्रंप ने समय-समय पर पीएम मोदी से गहरे संबंध और दोस्ती का दम भरा है, लेकिन फिर भी पिछले दो सालों में भारत और अमेरिका के संबंध एक फिर सामान्य नहीं रह गए हैं.

भारत और अमेरिका के संबंधों पर गेम चेंजर में किसी और दिन बात करेंगे, लेकिन यहां ये जरूर बता सकते हैं कि कि ट्रंप ने क्वाड सम्मेलन के लिए भारत का दौरा तक नहीं किया है. अमेरिका कंपनी GE की तरफ से भारत के स्वदेशी फाइटर जेट प्रोजेक्ट एलसीए-तेजस में रुकावट आ गई है. जीई कंपनी से एविएशन इंजन की सप्लाई बामुश्किल हो रही है.

ये वही क्वाड है जिसके बारे में कभी कहा जाता था कि अमेरिका ने भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर चीन के खिलाफ एक मजबूत सहयोग संगठन तैयार किया है. हालांकि, भारत ने कभी इसे मिलिट्री अलायंस नहीं करार दिया था, फिर भी इंडो-पैसिफिक में चीन के दबदबे को रोकने के लिए अमेरिका ने ये संगठन तैयार किया था. लेकिन अब अमेरिका को भी समझ आ रहा है कि भारत और चीन के संबंध पटरी पर आ रहे हैं. ऐसे में अमेरिका ने इंडो-पैसिफिक में चीन के खिलाफ जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ फिलीपींस को अपना नया मित्र बनाया है.



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