Best Ways To Stop Roof Water Leakage: घर की वाटरप्रूफिंग पर ज्यादातर लोग तब तक ध्यान नहीं देते, जब तक छत से पानी टपकने या दीवार पर सीलन के बड़े निशान दिखाई नहीं देने लगते. लेकिन अगर साल में कम से कम एक बार घर की वाटरप्रूफिंग की जांच कर ली जाए, तो कई छोटी समस्याओं को समय रहते पकड़ा जा सकता है. शुरुआत में सामने आई छोटी दरार, कमजोर परत या पानी की निकासी की समस्या को ठीक करना आसान होता है. वहीं इसे लंबे समय तक नजरअंदाज करने पर यही परेशानी घर की छत, दीवार और पेंट को नुकसान पहुंचा सकती है.
वाटरप्रूफिंग समय के साथ क्यों कमजोर होती है
धूप, बारिश और मौसम में लगातार होने वाले बदलाव का असर घर की पानीरोधी परत पर पड़ता है. धीरे-धीरे इसकी मजबूती कम हो सकती है और नमी को रोकने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. कई बार यह नुकसान बाहर से दिखाई भी नहीं देता. इसलिए घर में पानी टपकने का इंतजार करने के बजाय पहले से इसकी जांच करना जरूरी है.

साल में कब करें जांच
घर की वाटरप्रूफिंग की जांच साल में कम से कम एक बार जरूर करनी चाहिए. बारिश वाले इलाकों में बरसात शुरू होने से पहले और बरसात खत्म होने के बाद जांच करना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है. बरसात से पहले छत, नालियों और दीवारों की कमजोर जगहों को ठीक किया जा सकता है. वहीं बरसात के बाद यह पता चल जाता है कि कहीं नई सीलन, रिसाव या दरार तो नहीं बनी.
छत और छत की सतह को ध्यान से देखें
सबसे पहले घर की छत की पूरी सतह की जांच करें. कहीं छोटी या बड़ी दरार तो नहीं है, यह देखें. बारिश के बाद अगर छत पर लंबे समय तक पानी जमा रहता है, तो इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज न करें. पानी की सही निकासी न होने पर लगातार जमा पानी घर की वाटरप्रूफिंग परत को नुकसान पहुंचा सकता है. छत पर लगी वाटरफ्रूफ परत कहीं से उखड़ी, फूली हुई या घिसी हुई दिखाई दे, तो उस हिस्से पर भी ध्यान दें. बारिश के पानी की निकासी वाली नालियों को भी साफ रखें. अगर पानी बाहर निकलने का रास्ता कचरे से बंद है, तो तेज बारिश के दौरान छत पर पानी जमा हो सकता है.

बाहरी दीवारों की जांच भी जरूरी
घर की बाहरी दीवारों पर बारिश और धूप का सीधा असर पड़ता है. इसलिए इन दीवारों पर बारीक दरारें, उखड़ा हुआ पेंट या सीलन के निशान देखें. दीवार पर सफेद पाउडर जैसा पदार्थ दिखाई दे तो यह भी नमी के अंदर जाने का संकेत हो सकता है. खिड़कियों और दरवाजों के किनारों को भी अच्छी तरह देखें. इन जगहों पर लगी सीलिंग समय के साथ खराब हो सकती है और पानी को अंदर आने का रास्ता मिल सकता है.
बालकनी और मुंडेर को न भूलें
बालकनी और छत की मुंडेर ऐसी जगहें हैं, जहां बारिश और धूप का लगातार असर पड़ता है. यहां छोटी दरारें, खराब परत या पानी जमा होने की समस्या हो सकती है. खासतौर पर जहां छत और मुंडेर आपस में मिलते हैं, उस हिस्से की अच्छी तरह जांच करें. दो सतहों के मिलने वाली जगह पर पानी के अंदर जाने का खतरा बढ़ सकता है.
तहखाने और नींव के आसपास देखें
अगर घर में तहखाना है, तो उसकी दीवारों पर नमी या सीलन के निशान देखें. अंदर से लगातार आने वाली बदबू भी नमी की ओर इशारा कर सकती है. जमीन के स्तर से दीवार पर ऊपर की तरफ बढ़ती नमी दिखाई दे, तो उसकी भी जांच करानी चाहिए.
बाथरूम और गीली जगहों की जांच करें
बाथरूम में फर्श और दीवार की टाइलों के बीच की जगह, जोड़ और पानी के नल या दूसरी फिटिंग के आसपास ध्यान दें. कहीं से पानी रिस तो नहीं रहा, यह देखना जरूरी है. इन जगहों से निकलने वाला पानी धीरे-धीरे दीवार या फर्श के अंदर पहुंच सकता है. रसोई और कपड़े धोने वाली जगह में भी सिंक के नीचे और पानी की पाइप के आसपास जांच करें. छोटे रिसाव कई बार तुरंत दिखाई नहीं देते, लेकिन लंबे समय तक रहने पर सीलन की समस्या पैदा कर सकते हैं.
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पानी की टंकी और पाइप भी जांचें
घर में जहां पानी जमा होता है या पाइप से होकर गुजरता है, उन सभी जगहों को भी सालाना जांच में शामिल करें. पानी की टंकी में दरार, रिसाव या जंग दिखाई दे तो उसे नजरअंदाज न करें. पाइप के आसपास भी पानी के निशान या लगातार नमी की जांच करें.
वाटरप्रूफिंग खराब होने के संकेत पहचानें
दीवार या छत पर सीलन के धब्बे, फफूंद या काई जैसी परत दिखाई देना पानी के अंदर जाने का संकेत हो सकता है. पेंट का फूलना या उखड़ना भी नमी की वजह से हो सकता है. घर के किसी हिस्से में लगातार सीलन जैसी बदबू आती है, तो उस जगह की जांच जरूर करें. अगर हर बरसात में घर की एक ही जगह पर सीलन दिखाई देती है, तो इसका मतलब हो सकता है कि वहां की असली समस्या अभी पूरी तरह ठीक नहीं हुई है.
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