भारत में तेल संकट गहराया! सऊदी अरामको ने रोकी भारत को क्रूड ऑयल की सप्लाई

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भारत ने कुछ महीनों पहले ही ईरान और यूएस के बीच हुए युद्ध की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के साथ ही संकट भी देखा है. अब लगता है कि एक बार फिर से देश की ऐसी ही स्थिति होने वाली है. क्योंकि सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको ने भारतीय रिफाइनरियों को कच्चे तेल की सप्लाई फिलहाल रोक दी है.

ये फैसला सऊदी अरब की जरूरी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर ड्रोन हमले के बाद लिया गया है. इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ये सप्लाई कब तक बंद रहेगी, इसके बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं है.

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भारतीय तेल कंपनियों की बढ़ी मुश्किल
सऊदी अरब भारत के प्रमुख कच्चे तेल सप्लायरों में से एक है. रिपोर्ट्स की मानें तो युद्ध शुरू होने के बाद से अरामको ने भारत के कुल कच्चे तेल आयात में करीब 9% की हिस्सेदारी निभाई है. अब इस फैसले से भारतीय तेल कंपनियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. क्योंकि उन्हें सऊदी अरब से मिलने वाले तेल की जगह दूसरे देशों से कच्चा तेल खरीदना पड़ेगा. ऐसे में तेल खरीदने की लागत और उसे भारत तक लाने का खर्च दोनों बढ़ सकते हैं.

भारतीय रिफाइनरियां आमतौर पर सऊदी अरब से सालाना कॉन्ट्रैक्ट के तहत तेल खरीदती हैं. इन कॉन्ट्रैक्ट में कीमत पहले से तय होती है. लेकिन अब कंपनियों को किसी अलग जगह से तेल खरीदना पड़ सकता है, ऐसे में तेल की कीमतों से भारत में पट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है.

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पेट्रोल- डीजल के बढ़ेंगे दाम?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है. इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था और तेल कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है. फिलहाल इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि भारतीय रिफाइनरियां कितनी जल्दी सऊदी तेल का ऑप्शन ढूंढ पाती हैं और उन्हें इसके लिए कितनी कीमत चुकानी पड़ती है.

अगर सऊदी तेल की सप्लाई लंबे समय तक बाधित रहती है, तो महंगा कच्चा तेल, बढ़ा हुआ टैंकर किराया और कम होते ग्लोबल तेल भंडार के कारण भारतीय रिफाइनरियों की लागत पर और दबाव पड़ सकता है. इससे पेट्रोल- डीजल की कीमतों पर भी असर पड़ेगा. क्योंकि जब तेल कंपनियों पर दबाव बनेगा तो वो इसका दबाव जनता पर डालने को मजबूर हो जाएंगी.



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