टाटा ग्रुप में टाटा संस के चेयरमैन पद को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है. गुरुवार को टाटा संस के बोर्ड ने एन चंद्रशेखरन को पांच साल के एक और कार्यकाल के लिए एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बनाए रखने का फैसला किया है. यह फैसला इसलिए चौंकाने वाला है क्योंकि अगस्त में चंद्रशेखरन ने खुद कहा था कि वे फरवरी 2027 में मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद दोबारा चेयरमैन बनने की पेशकश नहीं करेंगे लेकिन अब कहानी पूरी तरह बदल गई है.
बोर्ड की नामांकन और पारिश्रमिक समिति ने सितंबर में चंद्रशेखरन से अपने फैसले पर दोबारा विचार करने को कहा था. गुरुवार की बोर्ड बैठक में उन्होंने इस अनुरोध को स्वीकार किया और बोर्ड ने बहुमत से उनके पांच साल के नए कार्यकाल को मंजूरी दे दी.
नोएल टाटा ने किया विरोध, फैसले को बताया ‘गैरकानूनी’
मिली जानकारी के मुताबिक चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति पर टाटा ट्रस्ट्स और नोएल टाटा की आपत्ति सामने आई है. टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस में करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है. नोएल टाटा जो टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन और बोर्ड में ट्रस्ट्स के नामित निदेशक हैं ने चंद्रशेखरन की नियुक्ति के खिलाफ वोट दिया.
टाटा ट्रस्ट्स ने कहा है कि यह प्रस्ताव ‘गैरकानूनी’ और ‘कानूनी रूप से अमान्य’ है. ट्रस्ट्स का तर्क है कि चंद्रशेखरन पहले ही दोबारा नियुक्ति नहीं लेने का फैसला कर चुके थे और ट्रस्ट्स ने उनके फैसले को स्वीकार करते हुए उत्तराधिकारी की तलाश शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई थी. यानी अब विवाद सिर्फ चेयरमैन की नियुक्ति तक सीमित नहीं है. सवाल यह भी है कि बोर्ड का यह फैसला आगे शेयरहोल्डर्स और कानूनी स्तर पर किस तरह चुनौती दिया जाता है.
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एक तरफ चंद्रशेखरन – दूसरी तरफ टाटा ट्रस्ट्स
टाटा संस के बोर्ड में गुरुवार को चंद्रशेखरन की नियुक्ति पर बहुमत से फैसला हुआ. रिपोर्टों के मुताबिक बोर्ड वोट 4-1 रहा और नोएल टाटा ने इसका विरोध किया. टाटा ट्रस्ट्स और चंद्रशेखरन के बीच मतभेद का एक बड़ा मुद्दा टाटा संस की संभावित शेयर बाजार लिस्टिंग भी है. टाटा ट्रस्ट्स लंबे समय से टाटा संस को निजी और अनलिस्टेड कंपनी बनाए रखने के पक्ष में रहा है लेकिन अब रिजर्व बैंक के फैसले के बाद स्थिति बदल गई है.
RBI के फैसले से टाटा संस पर लिस्टिंग का दबाव ?
रिजर्व बैंक ने हाल ही में टाटा संस की उस मांग को खारिज कर दिया जिसमें कंपनी ने अपने NBFC रजिस्ट्रेशन से बाहर निकलने की कोशिश की थी. इसके बाद टाटा संस पर RBI के नियमों के मुताबिक आगे कदम उठाने का दबाव बढ़ गया है. टाटा संस को 2022 में Upper Layer NBFC की श्रेणी में रखा गया था. इस श्रेणी के लिए शेयर बाजार में लिस्टिंग से जुड़े सख्त नियम लागू होते हैं.
टाटा संस ने पहले अपने बाहरी कर्ज को चुकाकर और कोर इनवेंस्टमेंट कंपनी के तौर पर अपनी स्थिति बदलने की कोशिश करके लिस्टिंग की जरूरत से बाहर निकलने का रास्ता तलाशा था लेकिन RBI के हालिया फैसले ने उस रास्ते को बंद कर दिया.
अब टाटा संस की लिस्टिंग की तैयारी
गुरुवार की बोर्ड बैठक में एक और बड़ा फैसला हुआ. टाटा संस ने RBI के लागू नियमों के मुताबिक लिस्टिंग की दिशा में कदम बढ़ाने का फैसला किया है. कंपनी ने कहा है कि वह RBI, टाटा ट्रस्ट्स और दूसरे हितधारकों से जरूरी मार्गदर्शन लेगी. यानी जिस लिस्टिंग को लेकर टाटा ग्रुप के भीतर लंबे समय से मतभेद चल रहे थे अब वही मुद्दा टाटा संस के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन गया है.
टाटा ग्रुप के सामने एक साथ कई बड़ी चुनौतियां
चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब टाटा ग्रुप के कई बड़े कारोबार दबाव में हैं. एयर इंडिया के कारोबार में लगातार नुकसान, जगुआर लैंड रोवर में मुश्किलें और साइबर हमले से जुड़ी समस्याएं ग्रुप के सामने बड़ी चुनौतियां हैं. इसके साथ ही RBI का दबाव, टाटा संस की संभावित लिस्टिंग और टाटा ट्रस्ट्स के साथ मतभेद ने ग्रुप के शीर्ष स्तर पर स्थिति को और जटिल बना दिया है.
एयर इंडिया से लेकर सेमीकंडक्टर तक – बहुत बड़ा है टाटा का कारोबार
टाटा संस सिर्फ एक कंपनी नहीं है. यह पूरे टाटा ग्रुप की सबसे बड़ी होल्डिंग कंपनी है. इसके जरिए ग्रुप की कई बड़ी कंपनियों में हिस्सेदारी और नियंत्रण जुड़ा हुआ है.
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एविएशन में बड़ा दांव
टाटा ग्रुप ने 2022 में एयर इंडिया को अपने हाथ में लिया था. इसके बाद एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस को एक बड़े एविएशन ग्रुप के रूप में खड़ा करने की कोशिश की गई. दोनों कंपनियों के पास मिलाकर करीब 300 विमानों का बेड़ा है लेकिन एयरलाइन कारोबार में सप्लाई चेन की दिक्कत, बढ़ता खर्च, घाटा और आईटी सिस्टम को अपग्रेड करने जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं.
टाटा मोटर्स और जगुआर लैंड रोवर
ऑटो सेक्टर में टाटा मोटर्स का कारोबार कमर्शियल व्हीकल से लेकर पैसेंजर कार और इलेक्ट्रिक व्हीकल तक फैला हुआ है. 2008 में टाटा मोटर्स ने जगुआर लैंड रोवर को खरीदा था. हाल के समय में JLR को साइबर हमले के कारण उत्पादन में रुकावट का सामना करना पड़ा. इसके अलावा चीन में कमजोर मांग और अमेरिका में ज्यादा टैरिफ जैसी चुनौतियां भी सामने हैं.
टाटा मोटर्स ने 2025 में Iveco Group को खरीदने का समझौता भी किया जिससे उसके ग्लोबल कमर्शियल व्हीकल कारोबार का विस्तार हुआ.
TCS है कमाई का बड़ा आधार
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी TCS टाटा ग्रुप की सबसे बड़ी और सबसे महत्वपूर्ण कंपनियों में से एक है. 1968 में शुरू हुई TCS आज बैंकिंग, मैन्युफैक्चरिंग, कंज्यूमर गुड्स और मीडिया समेत कई क्षेत्रों में दुनिया भर के ग्राहकों को टेक्नोलॉजी सेवाएं देती है लेकिन आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच कंपनियों के टेक्नोलॉजी खर्च में दबाव का असर TCS पर भी पड़ा है.
टाटा स्टील का 100 साल से ज्यादा पुराना कारोबार
टाटा स्टील की शुरुआत 1907 में हुई थी. कंपनी का कारोबार माइनिंग से लेकर स्टील उत्पादन और तैयार उत्पादों तक फैला है. 2007 में कोरस की खरीद के बाद टाटा स्टील ने वैश्विक बाजार में अपनी मौजूदगी और मजबूत की. आज भारत के साथ यूरोप भी उसके कारोबार का अहम हिस्सा है.
टाटा पावर से लेकर ग्रीन एनर्जी तक
टाटा पावर बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन, डिस्ट्रीब्यूशन, सोलर, रिन्यूएबल एनर्जी और इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग जैसे क्षेत्रों में काम करती है. टाटा ग्रुप अब पारंपरिक पावर कारोबार के साथ-साथ ग्रीन एनर्जी और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर भी बड़ा दांव लगा रहा है.
रिटेल में भी टाटा की मजबूत पकड़
टाटा ग्रुप का कारोबार सिर्फ ऑटो, स्टील और आईटी तक सीमित नहीं है. Titan, Trent, Tata Consumer Products, Voltas और Tata Digital के जरिए ग्रुप की कंज्यूमर मार्केट में बड़ी मौजूदगी है. तनिष्क, वेस्टसाइड, जुडियो और क्रोमा जैसे ब्रांड टाटा के रिटेल कारोबार का हिस्सा हैं. बिगबास्केट के जरिए ग्रुप ऑनलाइन ग्रॉसरी में भी मौजूद है. भारत में Tata Starbucks के भी 500 से ज्यादा आउटलेट हैं.
अब सेमीकंडक्टर में भी टाटा का बड़ा दांव
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के जरिए ग्रुप भारत के सेमीकंडक्टर सेक्टर में बड़ा निवेश कर रहा है. गुजरात में सेमीकंडक्टर फैब और असम में चिप असेंबली और टेस्टिंग से जुड़ी सुविधाओं पर काम चल रहा है. टाटा की यह रणनीति ऑटोमोबाइल, AI और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे तेजी से बढ़ते सेक्टर में भारत की चिप सप्लाई चेन तैयार करने से जुड़ी है.
फाइनेंस और डिजिटल कारोबार भी बड़ा
टाटा कैपिटल के जरिए ग्रुप लेंडिंग, वेल्थ मैनेजमेंट और दूसरी वित्तीय सेवाओं में मौजूद है. Tata AIA और Tata AIG के जरिए इंश्योरेंस कारोबार भी चलता है. वहीं Tata Communications के जरिए ग्रुप दुनिया भर के कारोबारों को कनेक्टिविटी, क्लाउड, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर सेवाएं देता है.
अब आगे क्या होगा?
टाटा संस के अंदर चेयरमैन पद को लेकर विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है. बोर्ड ने चंद्रशेखरन को पांच साल का नया कार्यकाल दे दिया है लेकिन टाटा ट्रस्ट्स ने इस फैसले की वैधता पर सवाल उठाया है.
दूसरी तरफ RBI के दबाव के बीच टाटा संस की लिस्टिंग की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का फैसला भी हो चुका है. ऐसे में आने वाले समय में तीन मुद्दे बेहद महत्वपूर्ण रहेंगे चंद्रशेखरन का नया कार्यकाल, टाटा ट्रस्ट्स की आपत्ति और टाटा संस की संभावित लिस्टिंग यानी 158 साल पुराने टाटा ग्रुप के सामने इस वक्त सिर्फ कारोबार की चुनौती नहीं है.