अब नहीं मिलेगा रोजाना इस्तेमाल होने वाला डाबर का ये सामान, यहां देखें पूरी लिस्ट

f61b5bbeca0eb929299d61d64bfdda3117858290030521379 original


Show Quick Read

Key points generated by AI, verified by newsroom

  • डाबर को 15 दिन में एक्शन रिपोर्ट देने का आदेश मिला.

FSSAI Notice to Dabur: अगर आप सामान खरीदते समय पैकेट पर लिखा ‘100% प्योर’, ‘100% नेचुरल’ या ‘100% ऑर्गेनिक’ देखकर उसे बेहतर मान लेते हैं  तो यह खबर आपके लिए है. भारत के फूड रेगुलेटर FSSAI ने डाबर इंडिया के कई फूड प्रोडक्ट्स पर कार्रवाई की है. रेगुलेटर ने कंपनी को इन दावों के साथ बिक रहे कुछ प्रोडक्ट्स की बिक्री रोकने का आदेश दिया है और 15 दिन के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट  देने को कहा है.

किन प्रोडक्ट्स पर कार्रवाई हुई?

  • डाबर हनी (Dabur Honey)
  • डाबर गाय का घी (Dabur Cow Ghee)
  • डाबर हिमालयन ऑर्गेनिक एप्पल साइडर विनेगर (Dabur Himalayan Organic Apple Cider Vinegar)
  • डाबर होममेड कोकोनट मिल्क (Dabur Homemade Coconut Milk)
  • डाबर वर्जिन कोकोनट ऑयल (Dabur Virgin Coconut Oil)
  • डाबर तिल का तेल (Dabur Sesame Oil)
  • डाबर कोकोनट वॉटर (Dabur Coconut Water)

असल में डाबर के प्रोडक्ट से क्या है दिक्कत ?

रेगुलेटर का कहना है कि कंपनी अपने कुछ प्रोडक्ट्स पर 100% प्योर, 100% नेचुरल, 100% प्योरिटी गारंटीड, 100% ऑर्गेनिक और 100% टेंडर कोकोनट वॉटर जैसे दावे कर रही थी. FSSAI के मुताबिक ऐसे दावे स्पष्ट नहीं हैं इनकी वैज्ञानिक जांच नहीं की जा सकती और ये ग्राहकों को गुमराह कर सकते हैं.

आखिर ‘100%’ लिखना गलत क्यों माना गया?

सबसे बड़ी वजह यह है कि भारत के फूड नियमों में ‘100%’ वाला दावा करने का कोई प्रावधान नहीं है. दूसरी बात अगर कोई कंपनी लिखती है 100% प्योर तो सवाल उठता है:- 

100% किस चीज का? 

  • शुद्धता का?
  • प्राकृतिक होने का?
  • या किसी एक सामग्री का?

असल में लैब यह बता सकती है कि किसी प्रोडक्ट में मिलावट है या नहीं, लेकिन यह साबित नहीं कर सकती कि कोई चीज 100% शुद्ध है  इसलिए ऐसा दावा न पूरी तरह साबित किया जा सकता है और न ही वैज्ञानिक तरीके से जांचा जा सकता है.

ग्राहक पर इसका क्या असर पड़ता है?

जब किसी पैकेट पर 100% प्योर लिखा होता है, तो ग्राहक को लगता है कि बाकी ब्रांड शायद उतने शुद्ध नहीं हैं जबकि सच यह है कि बाजार में बिकने वाले सभी पैक्ड फूड को एक जैसे कानूनी गुणवत्ता मानकों का पालन करना होता है. ऐसे में इस तरह का दावा दूसरे ब्रांड्स की तुलना में खुद को बेहतर दिखाने की कोशिश माना जा सकता है.

‘जैविक भारत’ लोगो वाला मामला अलग क्यों है?

इस कार्रवाई में सिर्फ 100% वाले दावे का ही मुद्दा नहीं है. FSSAI का कहना है कि डाबर हिमालयन ऑर्गेनिक एप्पल साइडर विनेगर और डाबर ऑर्गेनिक हनी पर ‘जैविक भारत’ का लोगो भी लगा मिला, जबकि इसके लिए वैध ऑर्गेनिक मान्यता नहीं थी यानी यहां मामला सिर्फ विज्ञापन का नहीं, बल्कि सरकारी ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन मार्क के इस्तेमाल का भी है.

FSSAI ने और क्या कहा?

रेगुलेटर के मुताबिक, कंपनी को पहले भी ऐसे दावे हटाने के लिए नोटिस भेजा गया था, लेकिन संतोषजनक सुधार नहीं हुआ. इसके बाद अब प्रोहिबिशन ऑर्डर जारी किया गया है.

अब नहीं मिलेगा रोजाना इस्तेमाल होने वाला डाबर का ये सामान, यहां देखें पूरी लिस्ट

क्या बाजार से ये प्रोडक्ट तुरंत गायब हो जाएंगे?

जरूरी नहीं. ऑर्डर जारी होने के बाद भी कुछ ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर 100% प्योर वाले प्रोडक्ट दिखाई दे रहे थे. पैकेजिंग, वेबसाइट और ऑनलाइन लिस्टिंग बदलने में समय लग सकता है. अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि कंपनी 15 दिन के भीतर क्या जवाब देती है और अपने प्रोडक्ट्स पर लगे दावों में क्या बदलाव करती है.

पहले भी हो चुकी है ऐसी कार्रवाई

यह पहली बार नहीं है. जून 2024 में FSSAI ने सभी फूड कंपनियों से कहा था कि कंसन्ट्रेट से बने जूस पर ‘100% फ्रूट जूस’ लिखना बंद करें. तब भी रेगुलेटर ने यही कहा था कि नियमों में 100% जैसे दावे की अनुमति नहीं है.

अब नहीं मिलेगा रोजाना इस्तेमाल होने वाला डाबर का ये सामान, यहां देखें पूरी लिस्ट

ग्राहकों के लिए क्या सीख?

अगर किसी पैकेट पर 100% प्योर, 100% नेचुरल या इसी तरह का बड़ा दावा लिखा हो, तो उसे बेहतर गुणवत्ता की गारंटी मानकर फैसला न करें. खरीदते समय ज्यादा भरोसा इनग्रेडिएंट लिस्ट, FSSAI लाइसेंस नंबर और अगर ऑर्गेनिक प्रोडक्ट हो, तो सर्टिफिकेशन की वैध जानकारी पर करें.

अब देखने वाली बात यह होगी कि डाबर इस आदेश के बाद क्या कदम उठाती है और क्या FSSAI इसी तरह दूसरी कंपनियों के ऐसे दावों पर भी कार्रवाई करता है.

ये भी पढ़ें:

समुद्र में तेल के 60 कुएं खोदेगा भारत, हर कुएं पर 650 करोड़ खर्च करेगी सरकार, जानिए क्या है पूरा प्लान 





Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *