दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन में इन दिनों अमीर लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सरकार ने विदेशों में रखी संपत्तियों और निवेश पर पुराने टैक्स की वसूली का बड़ा अभियान शुरू किया है. खास बात यह है कि कुछ मामलों में सरकार 25 साल पुराने टैक्स का हिसाब मांग रही है. टैक्स जमा होने तक कई लोगों के बैंक खाते भी फ्रीज किए जा रहे हैं, जिससे चीन के अमीर कारोबारियों और निवेशकों में हलचल मच गई है.
क्या है मामला?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, चीन अब अपने नागरिकों की विदेशों में मौजूद कमाई और निवेश की भी जांच कर रहा है. अगर किसी व्यक्ति ने विदेश में हुई कमाई या निवेश पर चीन में टैक्स नहीं चुकाया है, तो उससे अब बकाया टैक्स वसूला जा रहा है. कई मामलों में जांच साल 2000 तक के रिकॉर्ड तक पहुंच गई है.
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किनपर है चीन सरकार की नजर?
सरकार का फोकस चीन के उन अमीर लोगों पर है, जिन्होंने विदेशों में रियल एस्टेट, शेयर बाजार, ऑफशोर ट्रस्ट, क्रिप्टोकरेंसी या दूसरे निवेश किए हैं. चीनी बैंक और वित्तीय संस्थानों से भी ऐसे ग्राहकों की जानकारी मांगी जा रही है. कई लोगों के खाते तब तक फ्रीज किए जा रहे हैं, जब तक टैक्स का भुगतान नहीं हो जाता.
चीन ने ऐसा कदम क्यों उठाया?
चीन की अर्थव्यवस्था इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रही है. रियल एस्टेट सेक्टर की सुस्ती, स्थानीय सरकारों की घटती आय और आर्थिक विकास की धीमी रफ्तार के बीच सरकार नए राजस्व स्रोत तलाश रही है. ऐसे में विदेशों में छिपाई गई या घोषित नहीं की गई आय पर टैक्स वसूली का अभियान तेज किया गया है.
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