- आज 14.2 किग्रा घरेलू एलपीजी सिलेंडर कीमत अपरिवर्तित है.
- माह शुरुआत में 19 किग्रा वाणिज्यिक सिलेंडर ₹9.50 महंगा हुआ.
- पहले मार्च और जून में घरेलू सिलेंडर कुल ₹89 बढ़ा था.
- होरमुज जलडमरूमध्य सुरक्षा, भारत में तेल कीमतें स्थिर कर सकती है.
आज रविवार, 20 सितंबर 2026 को सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों ( IOCL, BPCL, HPCL) ने 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG रसोई गैस सिलेंडरों की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है. घरेलू सिलेंडर के दाम पूरी तरह स्थिर बने हुए हैं. हालांकि, इस महीने की शुरुआत (1 सितंबर) को 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में 9.50 रुपये प्रति सिलेंडर की मामूली बढ़ोतरी की गई थी.
घरेलू सिलेंडर के कब-कब बदले गए दाम?
साल 2026 में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फैले भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल व LNG की सप्लाई में आ रही दिक्कतों के चलते घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में दो बार बड़ी बढ़ोतरी की गई थी. सबसे पहले 7 मार्च को 60 रुपये बढ़ाए गए थे. उस दौरान पश्चिम एशिया में संकट के चलते वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल आया था. इसके बाद 7 जून, 2026 को 29 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी, तब से लेकर आज तक कीमतें स्थिर हैं.
शहरवार चेक करें कीमत
| शहर | घरेलू सिलेंडर के रेट | कमर्शियल सिलेंडर के रेट |
| दिल्ली | 942 रुपये | 2,747.50 रुपये |
| मुंबई | 941.50 रुपये | 2,701 रुपये |
| कोलकाता | 968 रुपये | 2,884 रुपये |
| बेंगलुरु | 944.50 रुपये | 2,831 रुपये |
| हैदराबाद | 994 रुपये | 2,996 रुपये |
| चेन्नई | 957.50 रुपये | 2,916.50 रुपये |
| जयपुर | 945.50 रुपये | 2,776 रुपये |
| बीकानेर | 953.50 रुपये | 2,798.50 रुपये |
| रांची | 1,010.50 रुपये | 2,925.50 रुपये |
अमेरिका और ईरान के बीच जंग की क्या है स्थिति?
मिडिल ईस्ट में संकट के माहौल के बीच कच्चे तेल में उतार-चढ़ाव का रुख बरकरार है. इस बीच, वॉशिंगटन में दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई. इस दौरान दक्षिण कोरिया ने अमेरिका को भरोसा दिलाया कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होकर गुजरने वाले जहाजों के लिए सुरक्षित रास्ता बहाल करने और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने में अपना सक्रिय योगदान देगा. दक्षिण कोरिया खुद अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस मार्ग पर अत्यधिक निर्भर है.
अगर अमेरिका, दक्षिण कोरिया और अन्य सहयोगी देश मिलकर इस समुद्री मार्ग में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को सुनिश्चित करते हैं, तो सप्लाई चेन के बाधित होने का डर कम होगा. इससे अंर्तराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आ रही अचानक तेजी पर लगाम लगने की संभावना है. भारत के लिए यह राहत की बात होगी क्योंकि भारत अपनी जरूरत का 85% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आता है. होर्मुज में सुरक्षा बढ़ेगी, तो भारतीय तेल कंपनियों को स्थिर कीमतों पर क्रूड ऑयल मिलता रहेगा, जिससे घरेलू स्तर पर पेट्रोल, डीजल और LPG की कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलेगी.
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