महंगा होगा पेट्रोल-डीजल! इंटरनेशनल मार्केट में 50 महीने के हाई लेवल पर पहुंची कीमत

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  • खुदरा कीमतें बढ़ सकती हैं, मुद्रास्फीति भी बढ़ने का डर.

भारत के लिए पेट्रोल का इंटरनेशनल बेंचमार्क प्राइस इस महीने बढ़कर 133.05 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है, जो पिछले 50 महीनों में सबसे ज्यादा है. बता दें कि इंटरनेशनल बेंचमार्क प्राइस वह कीमत है, जिस पर भारत दूसरे देशों से पेट्रोल खरीदता है.

अब चूंकि भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है इसलिए अंतर्राष्ट्रीय बाजार में दाम बढ़ने का सीधा असर हमारे देश पर पड़ता है. वैसे भी इंटरनशनल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतें फिर से 100 डॉलर के पार चली गई है. इसके पीछे मिडिल ईस्ट में तनाव, सऊदी अरब की पाइपलाइन बंद होने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के जरिए सप्लाई में आ रही रुकावटें जिम्मेदार हैं.

आंकड़ों के मुताबिक, 1 से 18 सितंबर के बीच रोज के स्तर पर पेट्रोल की औसत कीमत अगस्त के औसत 110.87 डॉलर प्रति बैरल से 20% ज्यादा थी. यह मई में दर्ज 129.63 डॉलर के हाई लेवल से भी कहीं ज्यादा है, तब सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों ने एक महीने में चार बार पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाई थीं.

घाटे में चल रहीं कंपनियां

अंतर्राष्ट्रीय कीमतों में आई इस तेजी का असर सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के मुनाफे पर पड़ रहा है. रिटेल बिक्री में इन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस वक्त कंपनियों को पेट्रोल पर करीब 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर करीब 20 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है.

जानकारों के मुताबिक, डीजल की औसत रोजाना बेंचमार्क कीमत भी बढ़कर 167.08 डॉलर प्रति बैरल के चार महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है. हालांकि यह अप्रैल 2026 में बने 187.92 डॉलर के हाई लेवल से अभी भी नीचे है.

क्या पेट्रोल-डीजल के बढ़ेंगे दाम?

आज सोमवार, 21 सितंबर को भले ही देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तनाव जारी रहा, तो आने वाले दिनों में आम उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल-डीजल के रिटेल दामों में बढ़ोतरी की जा सकती है.

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के एक शोध के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में हर 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से देश की मुख्य मुद्रास्फीति (Headline Inflation) में लगभग 49 बेसिस पॉइंट्स  का इजाफा हो सकता है. इसके कारण ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट महंगी होगी, जिससे फल, सब्जियां और रोजमर्रा काम आने वाले सामान भी महंगे हो जाएंगे.

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