135 साल पुराना कानून खत्म, अब कोर्ट में मान्य होंगे स्क्रीनशॉट्स-डिजिटल सबूत, आप पर होगा सीधा असर

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अगर आपने कभी बैंक से स्टेटमेंट निकलवाने के लिए कई चक्कर लगाए हैं या ऑनलाइन फ्रॉड के मामले में बैंक रिकॉर्ड जुटाने में परेशानी हुई है तो आपके लिए खुशखबरी है. संसद ने 135 साल पुराने बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट, 1891 की जगह बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026 को मंजूरी दे दी है. इस नए कानून का मकसद बैंकिंग व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल दौर के हिसाब से तैयार करना है. अब सिर्फ कागजी रिकॉर्ड ही नहीं, बल्कि बैंक के डिजिटल रिकॉर्ड भी अदालत में सबूत के तौर पर स्वीकार किए जा सकेंगे.

‘बैंकर बुक्स एविडेंस बिल’ क्या है?
बैंकर बुक्स एविडेंस एक नया कानून है, जो 1891 में बने पुराने कानून की जगह लाया गया है. जब ये कानून बना था तब बैंकों में सभी रिकॉर्ड मोटी रजिस्टरों और कागजों में रखे जाते थे. लेकिन अब लगभग पूरा बैंकिंग सिस्टम डिजिटल हो चुका है. ऐसे में सरकार ने कानून को भी समय के हिसाब से अपडेट किया है. नए बिल में इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, डिजिटल एंट्री और कंप्यूटर सिस्टम में मौजूद बैंक रिकॉर्ड को कानूनी मान्यता दी गई है. यानी अदालत में अब सिर्फ कागज ही नहीं, बल्कि बैंक के डिजिटल रिकॉर्ड भी सबूत के तौर पर इस्तेमाल किए जा सकेंगे.

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बिल में क्या हुआ बदलाव?
सबसे बड़ा बदलाव ये है कि अब बैंकों को हर मामले में कागजी रिकॉर्ड तैयार करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. जरूरत पड़ने पर डिजिटल रिकॉर्ड ही कोर्ट में पेश किए जा सकेंगे. इसके अलावा रिकॉर्ड की डिजिटल कॉपी भी इस्तेमाल की जा सकेगी. इससे डॉक्यूमेंट्स जुटाने में लगने वाला समय कम होगा और रिकॉर्ड के रखरखाव का प्रोसेस भी आसान हो जाएगा. 

बैंकिंग सिस्टम में क्या सुधार होगा?
नया कानून लागू होने के बाद बैंकों का काफी समय और खर्च बचेगा. लाखों पुराने कागजी रिकॉर्ड संभालने की जरूरत कम होगी और जरूरत पड़ने पर डिजिटल डेटा आसानी से मिलेगा. इससे बैंक के काम में भी तेजी आएगी, रिकॉर्ड खोजने में कम समय लगेगा और डॉक्यूमेंट्स की सुरक्षा भी बेहतर होगी. डिजिटल रिकॉर्ड होने से डेटा को ट्रैक करना आसान हो जाएगा. 135 साल पुराना कानून खत्म, अब कोर्ट में मान्य होंगे स्क्रीनशॉट्स-डिजिटल सबूत, आप पर होगा सीधा असर

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आम आदमी को क्या राहत मिलेगी?
इस कानून का सबसे बड़ा फायदा आम बैंक ग्राहकों को मिलने वाला है. अगर किसी का बैंक से जुड़ा कोई मामला कोर्ट में चल रहा है या किसी जांच एजेंसी को बैंक रिकॉर्ड चाहिए, तो डॉक्यूमेंट जुटाने में पहले जितना समय नहीं लगेगा. कई मामलों में लोगों को बैंक की शाखा के बार-बार चक्कर लगाने पड़ते थे. अब रिकॉर्ड डिजिटल रूप में मिलेगा तो लोगों का समय भी बचेगा.

ऑनलाइन फ्रॉड में कैसे मिलेगी मदद?
आजकल ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड तेजी से बढ़ रहे हैं. ऐसे मामलों में लेनदेन का रिकॉर्ड, लॉग, ट्रांजैक्शन डिटेल और दूसरे डिजिटल सबूत सबसे अहम होते हैं. नए कानून के बाद बैंक इन रिकॉर्ड को आसानी से अदालत या जांच एजेंसियों के सामने पेश कर सकेंगे. इससे जांच में तेजी आने और मामलों के जल्द निपटने की उम्मीद है. हालांकि, किसी मामले का फैसला अदालत सबूतों और कानून के आधार पर ही करेगी.

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चैट या स्क्रीनशॉट कैसे मदद करेगा?
आज ज्यादातर लोग बैंकिंग का काम मोबाइल ऐप के जरिए करते हैं. पैसे भेजने के बाद लोग स्क्रीनशॉट भी सेव रखते हैं और कई बार व्हाट्सएप पर शेयर भी करते हैं. नए कानून से बैंक के ऑफिशियल डिजिटल रिकॉर्ड को कानूनी मान्यता देता है. ऐसे में अगर किसी लेनदेन को लेकर विवाद होता है, तो बैंक के सर्वर पर मौजूद डिजिटल रिकॉर्ड सबसे जरूरी सबूत होंगे.

वहीं, बैंक ऐप का स्क्रीनशॉट या व्हाट्सएप पर शेयर किया गया ट्रांजैक्शन स्क्रीनशॉट किसी मामले में शुरुआती जानकारी के रूप में काम आ सकता है, लेकिन अदालत में उसकी अहमियत मामले के तथ्य और दूसरे सबूतों पर निर्भर करेगी. फिर अंतिम फैसला कोर्ट ही करती है.

क्यों जरूरी था नया कानून?
जब पुराना कानून बना था तब न इंटरनेट था और न ही डिजिटल बैंकिंग. आज यूपीआई, नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट आम बात हो चुके हैं. ऐसे में 135 साल पुराने कानून से काम करना मुश्किल हो रहा था. इसी वजह से सरकार ने नया कानून लाकर बैंकिंग व्यवस्था को मौजूदा तकनीक के मुताबिक बनाने की कोशिश की है.

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