त्यौहारों का मौसम आते ही रसोई गैस यानी LPG की डिमांड काफी बढ़ जाती है. इसी को देखते हुए सरकारी तेल कंपनियों ने इस त्यौहारी सीजन में इसकी तैयारी कर ली है. दरअसल सरकारी तेल कंपनियों ने LPG का घरेलू उत्पादन बढ़ा दिया है. ये कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब पर्शियन गल्फ में चल रहे संघर्ष के कारण LPG की सप्लाई प्रभावित हो रही है.
सूत्रों की मानें तो, सरकारी रिफाइनरियां इस समय हर रोज करीब 44,000 टन LPG का उत्पादन कर रही हैं. ये अगस्त के औसत उत्पादन से करीब 20 फीसदी ज्यादा है.
क्यों बढ़ रही LPG की मांग?
सरकार ने मार्च में ग्रामीण परिवारों के लिए LPG सिलेंडर दोबारा भरवाने की अवधि बढ़ाकर 45 दिन कर दी थी. अब सप्लाई की स्थिति बेहतर होने के बाद इसे घटाकर 25 दिन कर दिया गया है. इसके साथ ही देश में त्यौहारी सीजन शुरू हो गया है, जो नवंबर में दीपावली तक चलेगा. इस दौरान घरों में खाना पकाने और दूसरे घरेलू कामों के लिए LPG की मांग बढ़ती है.
भारत है दुनिया का सबसे बड़ा आयातक
भारत ने स्थिति से निपटने के लिए घरेलू LPG उत्पादन बढ़ाया था. बाद में अमेरिका और अफ्रीका से LPG की आने लगी और ओमान के सोहर बंदरगाह से भी सप्लाई शुरू हुई, तो घरेलू उत्पादन कुछ कम कर दिया गया था. अब मांग बढ़ने के कारण उत्पादन फिर से बढ़ा दिया गया है.
भारत दुनिया में LPG का दूसरा सबसे बड़ा आयातक है. पहले भारत अपनी जरूरत की बड़ी मात्रा का LPG पर्शियन गल्फ कंट्रीज से मंगाता था. इस वजह से वहां संघर्ष शुरू होने पर भारत की सप्लाई पर भी असर पड़ा.
कम ही है मांग
हालांकि इस साल LPG की कुल मांग पिछले साल की अपेक्षा थोड़ी कम है. पिछले साल इसी समय के मुकाबले इस बार मांग करीब 10% कम है. इसकी एक बड़ी वजह ये है कि युद्ध के दौरान उद्योगों की LPG मांग में जो कमी आई थी, वो अभी पूरी तरह वापस नहीं आई है. उस समय सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए LPG की सप्लाई को प्राथमिकता दी थी. सर्दियों में भी आमतौर पर LPG की खपत बढ़ती है. ऐसे में आने वाले समय में सरकारी कंपनियों को घरेलू उत्पादन और बढ़ाना पड़ सकता है.
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