- अगस्त में औद्योगिक उत्पादन 8% बढ़ा, मैन्युफैक्चरिंग में तेजी.
- त्योहारों की मांग से ऑटो, इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में सुधार आया.
- एफएमसीजी सेक्टर सुस्त, ग्रामीण बिक्री में 5% की गिरावट.
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और क्रूड ऑयल संकट के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है. सोमवार को जारी नेशनल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस (NSO) की डेटा के मुताबिक, अगस्त में भारत के इंडस्ट्रियल आउटपुट में 8% की तेजी आई है. यानी कि फैक्ट्रियों में उत्पादन तेजी से बढ़ा है.
मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट में इस शानदार बढ़त के चलते अगस्त महीने में भारत की औद्योगिक उत्पादन विकास दर (IIP Growth Rate) उछलकर 8% पर पहुंच गई है. यह बीते 29 महीनों में दूसरी दफा है, जब IIP Growth Rate में इस कदर तेजी देखी गई है. इससे पहले जून में 8.8% की बढ़त देखी गई थी.
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा लगभग 77.6% होती है. कंपनियों ने आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए अगस्त से ही उत्पादन बढ़ा दिया था. ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (टीवी, फ्रिज आदि) की फैक्ट्रियों में उत्पादन बढ़ने से इस सेक्टर को बड़ा बूस्ट मिला है.
बता दें कि चार बड़े सेक्टरों में से दो – मैन्युफैक्चरिंग और बिजली व गैस सप्लाई – के परफॉर्मेंस में पिछले महीने के मुकाबले अगस्त में सुधार देखा गया. पानी की सप्लाई, सीवरेज और वेस्ट मैनेजमेंट की रफ्तार धीमी रही, जबकि माइनिंग और क्वारीइंग में और ज्यादा गिरावट आई है.
FMCG सेक्टर में लगा ब्रेक
मैन्युफैक्चरिंग और पावर सेक्टर में तेजी के साथ-साथ अगस्त में FMCG सेक्टर की रफ्तार को झटका लगा है. नील्सनआईक्यू (NielsenIQ) की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय FMCG (फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स) सेक्टर इस वक्त सुस्ती का सामना कर रहा है. इस कैटेगरी की बिक्री 68% तक कम हो गई है.
जून तिमाही के दौरान देश भर में FMCG सामानों की कुल बिक्रीमें 2% की गिरावट आई है, जो कुछ चुनिंदा सामानों तक सीमित नहीं है, बल्कि साबुन, वाशिंग पाउडर, रिफाइंड तेल, बिस्कुट और नमकीन जैसी 68% कैटेगरीज की बिक्री में भारी गिरावट देखी गई है.
वहीं, ग्रामीण इलाकों में ग्रामीण भारत में FMCG की बिक्री में 5% तक गिरावट दर्ज की गई है. मॉनसून की कमजोर शुरुआत और खेती की बढ़ती लागत ने ग्रामीण आय को प्रभावित किया है, जिसका असर FMCG गुड्स की बिक्री पर देखने को मिल रहा है.
एफएमसीजी सेक्टर में बढ़ती लागत से निपटने के लिए कंपनियों ने कीमतों में 2.8% तक की बढ़ोतरी की है. इसके चलते सेल्स वैल्यू ग्रोथ महज 0.8% पर सिमट कर रह गई है. कीमतें बढ़ने की वजह से ग्राहकों ने कम खरीदारी की है, जिससे मार्केट में सामानों की कुल बिक्री में गिरावट आई है.
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