4 दिन में 14 लाख करोड़ स्वाहा, क्यों 2700 अंक से अधिक लुढ़का सेंसेक्स

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मंगलवार को शेयर बाजार धड़ाम से गिरा, इसके पीछे एक या दो नहीं बल्कि कई कारण बताए जा रहे हैं. महज 4 दिनों में ही शेयर मार्केट में 14 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो चुके हैं. भारतीय इक्विटी बेंचमार्क, निफ्टी50 और BSE सेंसेक्स में ये गिरावट मंगलवार को भी देखने को मिली. सोमवार को आई भारी गिरावट के बाद ये 0.8% से ज्यादा गिर गए.

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और कई अन्य चिंताओं के कारण निवेशकों का मूड पिछले दो दिनों से खराब ही रहा है. ऐसे में वे इस दौरान सतर्क भी बने रहे हैं.

4 दिनों का हाल
शेयर बाजार में ये गिरावट केवल आज ही नहीं बल्कि पिछले चार दिनों से देखी जा रही है. 23 सितंबर से लेकर 28 सितंबर तक लगातार निफ्टी 50 और सेंसेक्स में गिरावट बनी रही. आइये दिखाते हैं इन चार दिनों में शेयर बाजार कितने लेवल पर खुला और कितने लेवल पर बंद हुआ.

  • सबसे पहले 23 सितंबर को BSE सेंसेक्स 74828 के लेवल पर बंद हुआ था.
  • जिसके बाद 24 सितंबर को भी बाजार गिरावट के साथ ही खुला, वहीं बंद होते -होते 1247 अंक पर लुढ़ककर 73580 के लेवल पर पहुंच गया.
  • तो वहीं 25 सितंबर को सेंसेक्स 315 अंक ऊपर 73895 के लेवल पर बंद हुआ था.
  • इसके बाद जब वकेंड के बाद सोमवार यानी 28 सितंबर को बंद हुआ तो 1124 अंकों तक गिर चुका था.

क्यों लुढ़क रहा है सेंसेक्स?
शेयर बाजार के गिरने के पीछे कोई एक वजह नहीं बताई जा रही है बल्कि कई वजह हैं. जिनमें से  3वजहें इस प्रकार हैं:

इसके पीछे सबसे बड़ा कारण दुनियाभर में बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी होना है. क्योंकि केवल US बॉन्ड यील्ड ही तेजी से नहीं बढ़ रही है बल्कि ये दुनियाभर में बढ़ रही है. US के 10-साल के बॉन्ड की यील्ड 5% के पार चली गई है, जो 2007 के बाद सबसे ज्यादा है. जिसकी वजह से निवेशक अपना पैसा इक्विटी और दूसरे एसेट्स से निकालकर बेहतर रिटर्न के लिए बॉन्ड में लगा रहे हैं.

तो वहीं दूसरी वजह कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल भी है. US-ईरान युद्ध के बाद कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है. जिससे महंगाई का डर भी लगातार बढ़ता ही जा रहा है. इससे भारत सरकार पर दबाव पड़ने की उम्मीद है, क्योंकि देश में कच्चे तेल की कुल मांग का लगभग 85% हिस्सा आयात किया जाता है.

तो वहीं तीसरा कारण है तेजी से आता हुआ हाई-इंटरेस्ट रेट का दौर. US फेड के द्वारा ब्याज दरों में 25 bps की बढ़ोतरी के बाद, RBI पर भी भारत में ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव है. अब मार्केट US फेड द्वारा ब्याज दरों में और 25 bps की बढ़ोतरी का अनुमान लगा रहा है, जो इस बात का संकेत है कि ग्लोबल इकॉनमी हाई-इंटरेस्ट रेट वाले दौर की ओर बढ़ रही है. ऐसी स्थिति में मार्केट ‘सेल-ऑन-राइज’ वाला मार्केट बन जाता है.

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