भारत की Gen Z पीढ़ी आज के बाजार की सबसे बड़ी ताकत है. इतना ही नहीं यह वह पीढ़ी है जो आने वाले एक दशक में भारतीय अर्थव्यवस्था की रूपरेखा बदलने वाली है. दुनिया में हर पांच में से एक युवा भारत में रहता है. ये वो पीढ़ी है जो न तो ब्रांड्स के पीछे भागती है और न ही किसी का इंतजार करती है. ये अपनी शर्तों पर खरीदारी करती है, अपनी मर्जी से खर्च करती है और अपनी पसंद से मार्केट की दिशा तय करती है. आइए जानते हैं कि भारतीय मार्केट के लिए Gen Z कितनी बड़ी संपत्ति है…
कितनी बड़ी है भारत की Gen Z आबादी?
Snap Inc. और बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (BCG) के मुताबिक, भारत में 1997 से 2012 के बीच पैदा हुए लोग यानी Gen Z की आबादी 37.7 करोड़ है. यह संख्या भारत की कुल आबादी का 27 प्रतिशत है.
इसे ऐसे समझें: दुनिया भर में जितने भी युवा हैं, उनमें से हर पांच में से एक भारत में रहता है. पीपुल्स रिसर्च ऑन इंडियाज कंज्यूमर इकोनॉमी (PRICE) थिंक टैंक के मुताबिक, 2025 तक 15 से 29 साल की उम्र के लोगों की संख्या 42 करोड़ है, जो देश की कुल आबादी का लगभग 29 प्रतिशत है.
यानी, भारत की हर चार में से एक से ज्यादा व्यक्ति Gen Z है.
भारत की Gen Z आबादी कितना खर्च करती है?
Deloitte-FICCI की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में Gen Z का डायरेक्ट स्पेंडिंग (खुद कमाकर खर्च किया गया पैसा) 250 बिलियन डॉलर यानी करीब 23.85 लाख करोड़ रुपए था.
BCG और Snap Inc. की रिपोर्ट ‘द 2 डॉलर ट्रिलियन अपॉर्च्यूनिटी’ के मुताबिक, Gen Z भारत के कुल उपभोग का 43 प्रतिशत हिस्सा है. Gen Z का कुल खर्च 860 बिलियन डॉलर यानी 82.07 लाख करोड़ रुपए है. इसमें से लगभग 660 बिलियन डॉलर (62.98 लाख करोड़ रुपए) वह खर्च है जो Gen Z के प्रभाव (इन्फ्लुएंस) के कारण होता है, जैसे कि माता-पिता का खर्च, जब वे अपने Gen Z बच्चों की पसंद के हिसाब से खरीदारी करते हैं.
कितनी तेजी से बढ़ेगी Gen Z की ताकत?
एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि 2035 तक Gen Z की कुल खर्च कैपिसिटी 2 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 190 लाख करोड़ रुपए) तक पहुंच जाएगी. यह भारत के आज के कुल उपभोग से भी ज्यादा है. कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2030 तक Gen Z की जेब में 120 लाख करोड़ रुपए का दम होगा.
BCG-Snap रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 तक हर दूसरा Gen Z कमाई कर रहा होगा. यानी इस पीढ़ी का एक बड़ा हिस्सा अब आत्मनिर्भर हो चुका है और खुद का पैसा खर्च कर रहा है.

Cleartrip के 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, Gen Z की बुकिंग्स में 650 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई. 89% Gen Z ट्रैवलर्स ने 2025 में अपना ट्रैवल बजट बढ़ाने की योजना बनाई.
Gen Z और मिलेनियल्स लग्जरी प्रोडक्ट्स को EMI और नो-कॉस्ट क्रेडिट के जरिए खरीद रहे हैं. 70% Gen Z ने इंटरनेशनल लग्जरी ब्रांड्स को अपनी अगली खरीदारी की लिस्ट में रखा है.
कैसे खरीदारी करती है Gen Z?
Gen Z इन 5 तरीकों से खरीदारी करती है:
- शॉपशियलाइजिंग: Gen Z की खरीदारी की आदत पूरी तरह डिजिटल है. वे दुकान पर होते हुए भी फोन पर क्रिएटर्स के पेज चेक करते हैं. दुकान पर खड़े-खड़े वे विश लिस्ट, क्रिएटर पेज या रिव्यू देखते हैं. यह आदत मिलेनियल्स की तुलना में 1.5 गुना ज्यादा है.
- इन्फ्लुएंसर से प्रेरणा: 72 प्रतिशत Gen Z शॉपर्स खरीदारी की प्रेरणा के लिए ऑनलाइन क्रिएटर्स पर निर्भर करते हैं.
- शॉपिंग ऐप्स का सहारा: 10 में से 8 Gen Z अमेजन, फ्लिपकार्ट और मीशो जैसे शॉपिंग ऐप्स से खरीदारी करते हैं.
- मंथली ऑनलाइन शॉपर्स: 69 प्रतिशत Gen Z हर महीने कम से कम एक बार ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं.
- ट्रेंड की डिमांड: Gen Z ब्रांड लॉयल्टी से ज्यादा ट्रेंडिंग स्टाइल को तरजीह देते हैं. वे मिलेनियल्स की तुलना में 1.7 गुना ज्यादा ट्रेंड-फोकस्ड हैं.
भारत में कितना कमाती है Gen Z?
फॉर्च्यून इंडिया के मुताबिक, Gen Z की औसत सैलरी 27,000 रुपए प्रति माह है. हालांकि, शुरुआती करियर वालों की सैलरी 20,000-25,000 रुपए के बीच होती है. दिलचस्प बात यह है कि 41% नए क्रेडिट लेने वाले Gen Z हैं. अगर कोई Gen Z 30,000 रुपए महीना कमा रहा है, तो उस पर 40 लाख रुपए का लोन हो सकता है. 2025 की पहली छमाही में लिए गए 27% पर्सनल लोन का इस्तेमाल ट्रैवल के लिए हुआ.
Gen Z का मार्केट के लिए क्या मतलब है?
सबसे हैरान करने वाला आंकड़ा यह है कि 45% ब्रांड्स तो Gen Z की अहमियत मानते हैं, लेकिन सिर्फ 15% ने ही उन्हें टारगेट करने के लिए कोई कदम उठाया है. यानी 85% ब्रांड्स अभी भी इस सुनहरे मौके को गंवा रहे हैं.
फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 60% से ज्यादा ई-कॉमर्स ट्रांजैक्शन टियर II और III शहरों से हो रहे हैं. Gen Z सिर्फ महानगरों में नहीं, बल्कि छोटे शहरों और कस्बों में भी है. वहां भी उतनी ही डिजिटल और खर्च करते है.
Deloitte की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का ऑनलाइन रिटेल मार्केट 2024 के 75 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2030 तक 260 बिलियन डॉलर हो जाएगा. इस ग्रोथ का बड़ा हिस्सा Gen Z के कारण होगा.
आखिर Gen Z क्या चाहती है?
- ऑथेंटिसिटी: फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, Gen Z के लिए नॉन-नेगोशिएबल चीज है- ऑथेंटिसिटी. Gen Z के सामने परफॉर्मेटिव कैंपेन या सिर्फ बेचने पर फोकस्ड मार्केटिंग काम नहीं करती. ब्रांड्स को अब ‘यह लो, खरीद लो’ की जगह ‘हम तुम्हारे लिए क्या कर सकते हैं?’ पूछना होगा.
- कम्युनिटी: Nike का उदाहरण देखें कि वे सिर्फ जूते नहीं बेचते, बल्कि रनिंग कम्युनिटी में एंट्री देते हैं. Gen Z ऐसे ब्रांड्स से जुड़ना चाहती है जो उनकी पहचान और अपनेपन की भावना दे.
- वैल्यू और मीनिंग: पारंपरिक ब्रांड प्रेस्टीज से ज्यादा, Gen Z असल अनुभव और महत्व को तरजीह देता है.
Gen Z सिर्फ संपत्ति नहीं, भविष्य है
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि भारतीय मार्केट के लिए Gen Z कोई साधारण संपत्ति नहीं है. यह सबसे बड़ी आर्थिक ताकत है. Gen Z की खासियत यह है कि वे डिजिटल नेटिव हैं. Gen Z ने दुनिया को इंटरनेट के बिना कभी नहीं देखा. वे ऑथेंटिसिटी, कम्युनिटी और अनुभव चाहते हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि वे सिर्फ खर्च करने वाले नहीं हैं. वे ब्रांड एडवोकेट भी बन सकते हैं, बशर्ते ब्रांड्स उनसे असली और भागीदारी वाला कनेक्शन बनाएं.