
अंकित कुमार ने अपने गांव में ही एक छोटा कोचिंग सेंटर बनाया था. उस जगह वह करीब 1 दशक तक बच्चों को पढ़ाते रहे और इसके साथ ही अपने बीपीएससी की तैयारी भी करते रहे. सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने पढ़ाई के लिए सेल्फ स्टडी का रास्ता अपनाया.

अंकित के अनुसार उनके लिए हर दिन एक नई चुनौती लेकर आता था, लेकिन उन्होंने इन्हीं चुनौतियों से सीखते हुए अपनी तैयारी जारी रखी और आगे बढ़ते रहे. अपनी तैयारी के दौरान अंकित दिन में बच्चों को पढ़ाने के बाद अपनी पढ़ाई पर ध्यान देते थे.

अंकित के अनुसार उनके परिवार की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर थी. उनके पिता के पास इतने संसाधन नहीं थे कि वह उन्हें बड़े शहरों के महंगे कोचिंग संस्थानों में पढ़ा सके. ऐसे में उन्होंने अपने घर और गांव में रहकर ही परीक्षा की तैयारी करने का फैसला किया.

उन्होंने बीपीएससी के परीक्षा पैटर्न को समझा, पिछले वर्षों के प्रश्न पत्रों का विश्लेषण किया और उसी के आधार पर अपनी तैयारी की रणनीति बनाई. बिना किसी बड़े संसाधन की मदद के उन्होंने लगातार मेहनत और सेल्फ स्टडी के जरिए परीक्षा की तैयारी जारी रखी.

दिघवारा प्रखंड के सैदपुर झौंवा गांव निवासी अंकित कुमार ताड़केश्वर राय और संजू देवी के बेटे हैं. उनकी शुरुआती पढ़ाई गांव में हुई इसके बाद उन्होंने दिघवारा के जय गोविंद उच्च विद्यालय से मैट्रिक की पढ़ाई और छपरा के राम जयपाल कॉलेज से इंटरमीडिएट और ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की.

पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी थी. गांव में रहकर बच्चों को पढ़ने के साथ उन्होंने अपनी तैयारी भी जारी रखी. करीब 10 साल तक इसी तरह पढ़ाते और तैयारी करते हुए आखिरकार उन्होंने बीपीएससी परीक्षा में सफलता हासिल कर ली.

अपनी सफलता के बाद अंकित ने गांव और सीमित संसाधनों में तैयारी कर रहे छात्रों से कहा कि अगर मेहनत और सफलता के लिए अपनी रणनीति खुद तैयार की जा सकती है. उनका कहना है कि पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का सही तरीके से विश्लेषण और टारगेट के प्रति लगातार मेहनत की जाए, तो गांव से भी अधिकारी बनने का सपना पूरा किया जा सकता है.
Published at : 11 Aug 2026 10:10 AM (IST)