Mahatma Gandhi Jayanti 2026 : आंदोलन से आजादी तक, गांधी जी के जीवन से जुड़ी हैं ये 7 जगहें यहां देखें


गांधी जी की कहानी की शुरुआत गुजरात के पोरबंदर से होती है. उनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को यहीं हुआ था. उनके जन्मस्थान को अब कीर्ति मंदिर के परिसर में स्मारक के रूप में संरक्षित किया गया है. यह जगह गांधी जी के राजनीतिक जीवन से पहले के दौर को समझने से जुड़ी है.

गांधी जी की कहानी की शुरुआत गुजरात के पोरबंदर से होती है. उनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को यहीं हुआ था. उनके जन्मस्थान को अब कीर्ति मंदिर के परिसर में स्मारक के रूप में संरक्षित किया गया है. यह जगह गांधी जी के राजनीतिक जीवन से पहले के दौर को समझने से जुड़ी है.

मई 1915 में गांधी जी ने भारत में अपना पहला आश्रम अहमदाबाद के कोचरब में स्थापित किया. 25 मई को शुरू हुआ यह आश्रम जून 1917 तक रहा. इसके बाद आश्रम को साबरमती ले जाया गया. गांधी जी ने अहमदाबाद को इसलिए भी चुना क्योंकि वे गुजराती थे और यहां की भाषा में आसानी से संवाद कर सकते थे.

मई 1915 में गांधी जी ने भारत में अपना पहला आश्रम अहमदाबाद के कोचरब में स्थापित किया. 25 मई को शुरू हुआ यह आश्रम जून 1917 तक रहा. इसके बाद आश्रम को साबरमती ले जाया गया. गांधी जी ने अहमदाबाद को इसलिए भी चुना क्योंकि वे गुजराती थे और यहां की भाषा में आसानी से संवाद कर सकते थे.

1917 में गांधी जी कोचरब से साबरमती नदी के किनारे चले गए. यह जगह उनके सामाजिक और राजनीतिक काम का एक प्रमुख केंद्र बना. खादी, आत्मनिर्भरता, शिक्षा और सामाजिक सुधार से जुड़े उनके प्रयोग यहां हुए. 12 मार्च 1930 को गांधी जी 78 सत्याग्रहियों के साथ यहीं से दांडी मार्च के लिए निकले थे.

1917 में गांधी जी कोचरब से साबरमती नदी के किनारे चले गए. यह जगह उनके सामाजिक और राजनीतिक काम का एक प्रमुख केंद्र बना. खादी, आत्मनिर्भरता, शिक्षा और सामाजिक सुधार से जुड़े उनके प्रयोग यहां हुए. 12 मार्च 1930 को गांधी जी 78 सत्याग्रहियों के साथ यहीं से दांडी मार्च के लिए निकले थे.

1917 में गांधी जी नील की खेती करने वाले किसानों की समस्याओं को समझने बिहार के चंपारण पहुंचे. अधिकारियों के क्षेत्र छोड़ने के आदेश के बाद भी उन्होंने वहां रुक कर किसानों की शिकायतों की जांच की. इस दौरान शिक्षा और स्वच्छता से जुड़े काम भी किए गए.

1917 में गांधी जी नील की खेती करने वाले किसानों की समस्याओं को समझने बिहार के चंपारण पहुंचे. अधिकारियों के क्षेत्र छोड़ने के आदेश के बाद भी उन्होंने वहां रुक कर किसानों की शिकायतों की जांच की. इस दौरान शिक्षा और स्वच्छता से जुड़े काम भी किए गए.

1918 में फसल खराब होने के बाद खेड़ा के किसानों ने भूमि राजस्व में राहत की मांग की. गांधी जी ने उनके आंदोलन का समर्थन किया. खेड़ा सत्याग्रह उनके शुरुआती आंदोलनों में शामिल था, जिसमें उन्होंने स्थानीय किसानों और नेताओं के साथ काम किया. इस आंदोलन में वल्लभभाई पटेल भी उनके साथ थे.

1918 में फसल खराब होने के बाद खेड़ा के किसानों ने भूमि राजस्व में राहत की मांग की. गांधी जी ने उनके आंदोलन का समर्थन किया. खेड़ा सत्याग्रह उनके शुरुआती आंदोलनों में शामिल था, जिसमें उन्होंने स्थानीय किसानों और नेताओं के साथ काम किया. इस आंदोलन में वल्लभभाई पटेल भी उनके साथ थे.

दांडी का नाम गांधी जी के नमक सत्याग्रह से जुड़ा है. 12 मार्च 1930 को साबरमती से शुरू हुई यात्रा करीब एक महीने बाद 6 अप्रैल को दांडी पहुंची. यहां गांधी जी ने समुद्र के पानी से नमक बनाकर अंग्रेजी नमक कानून को तोड़ा. नमक जैसी आम जरूरत की चीज को गांधी जी ने अंग्रेजी कानून के विरोध का जरिया बनाया.

दांडी का नाम गांधी जी के नमक सत्याग्रह से जुड़ा है. 12 मार्च 1930 को साबरमती से शुरू हुई यात्रा करीब एक महीने बाद 6 अप्रैल को दांडी पहुंची. यहां गांधी जी ने समुद्र के पानी से नमक बनाकर अंग्रेजी नमक कानून को तोड़ा. नमक जैसी आम जरूरत की चीज को गांधी जी ने अंग्रेजी कानून के विरोध का जरिया बनाया.

मुंबई के गामदेवी में स्थित मणि भवन 1917 से 1934 के बीच गांधी जी का बॉम्बे मुख्यालय रहा. यहां से सत्याग्रह, स्वदेशी, खादी और सविनय अवज्ञा से जुड़े कई काम हुए. 1919 में रॉलेट सत्याग्रह की शुरुआत भी यहीं से हुई थी. 4 जनवरी 1932 की सुबह गांधी जी को इसी भवन की छत से गिरफ्तार किया गया था.

मुंबई के गामदेवी में स्थित मणि भवन 1917 से 1934 के बीच गांधी जी का बॉम्बे मुख्यालय रहा. यहां से सत्याग्रह, स्वदेशी, खादी और सविनय अवज्ञा से जुड़े कई काम हुए. 1919 में रॉलेट सत्याग्रह की शुरुआत भी यहीं से हुई थी. 4 जनवरी 1932 की सुबह गांधी जी को इसी भवन की छत से गिरफ्तार किया गया था.

1936 में गांधी जी वर्धा के पास सेवाग्राम गांव में रहने लगे. उस समय वहां ज्यादा सुविधाएं नहीं थीं. गांधी जी सादगी से ग्रामीण माहौल में रहना चाहते थे और उनकी कुटिया बनाने में स्थानीय सामान का इस्तेमाल किया गया. : 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के बाद गांधी जी, कस्तूरबा गांधी और महादेव देसाई को यहां नजरबंद रखा गया. गांधी जी मई 1944 तक यहां रहे. 9 सितंबर 1947 को गांधी जी पुराने बिड़ला हाउस में रहने आए, जिसे अब गांधी स्मृति के नाम से जाना जाता है. जहां उन्होंने जीवन के आखिरी 144 दिन बिताए. 30 जनवरी 1948 को प्रार्थना सभा के लिए जाते समय उनकी हत्या कर दी गई.

1936 में गांधी जी वर्धा के पास सेवाग्राम गांव में रहने लगे. उस समय वहां ज्यादा सुविधाएं नहीं थीं. गांधी जी सादगी से ग्रामीण माहौल में रहना चाहते थे और उनकी कुटिया बनाने में स्थानीय सामान का इस्तेमाल किया गया. : 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के बाद गांधी जी, कस्तूरबा गांधी और महादेव देसाई को यहां नजरबंद रखा गया. गांधी जी मई 1944 तक यहां रहे. 9 सितंबर 1947 को गांधी जी पुराने बिड़ला हाउस में रहने आए, जिसे अब गांधी स्मृति के नाम से जाना जाता है. जहां उन्होंने जीवन के आखिरी 144 दिन बिताए. 30 जनवरी 1948 को प्रार्थना सभा के लिए जाते समय उनकी हत्या कर दी गई.

Published at : 02 Oct 2026 08:40 AM (IST)

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