टल गया गैस संकट, होर्मुज से रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची LNG की सप्लाई

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फरवरी के महीने से ईरान और यूएस-इजरायल के बीच युद्ध शुरू हुआ था. इस युद्ध की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल- गैस की सप्लाई काफी प्रभावित हो रही थी. लेकिन अब हालात कुछ हद तक सुधर गए हैं हालांकि चिंता पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है, अब भी बनी हुई है. इसी बीच सितंबर के महीने में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) की सप्लाई ज्यादा बढ़ गई है. जो एक राहत भरी खबर है.

दरअसल सितंबर के महीने में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से LNG ले जाने वाले जहाजों की आवाजाही बढ़ गई है. और युद्ध शुरू होने के बाद ये सितंबर महीने का आंकड़ा अब तक का सबसे ज्यादा रहा है.वहीं इसे देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि अक्टूबर के महीने में ये आंकड़ा और भी ज्यादा बढ़ने वाला है.

सितंबरम में 19 LNG कार्गे निकले
S&P ग्लोबल एनर्जी के प्रिंसिपल एनालिस्ट एरिक येप ने बताया कि, सितंबर में कुल 19 LNG कार्गो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर निकले. इनमें 13 जहाज कतर और 6 संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से थे. उन्होंने ये भी बताया कि, सितंबर के आखिरी 15 दिन में LNG जहाजों की आवाजाही तेजी से बढ़ी. अगर अक्टूबर में भी ये रफ्तार बनी रहती है, तो युद्ध से पहले के स्तर की तुलना में LNG की आवाजाही करीब 25% तक पहुंच सकती है.

Kpler के आंकड़े क्या कहते हैं?
शिपिंग डाटा कंपनी Kpler के मुताबिक, सितंबर में 21 LNG कार्गो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से बाहर निकले. जून में ये संख्या 15 थी. पिछले कुछ हफ्तों में कतर की सरकारी कंपनी कतर एनर्जी से जुड़े कई LNG जहाज भी इस रास्ते से गुजरे हैं. इनमें कुछ जहाजों में गैस भरी हुई थी, जबकि कुछ खाली थे.

तो वहीं इस हफ्ते में कतर के रास लफन गैस टर्मिनल से जुड़े तीन और LNG जहाज होर्मुज से बाहर दिखाई दिए. इनमें अल  खरैतियत, अल घराफा और मिलाहा कतर शामिल हैं. अल खरैतियत और अल गर्राफा जहाज होर्मुज के अंदर दिखाई देने के कुछ दिनों बाद भारत के पश्चिमी तट के पास नजर आए. वहीं, मिलाहा कतर नाम का जहाज भी होर्मुज से निकलकर भारत के पश्चिमी तट तक पहुंचा और बाद में गुजरात के हजीरा बंदरगाह पर अपना LNG कार्गो उतारने लगा.

अक्टूबर में बढ़ सकती है शिपिंग
सितंबर महीने के आंकड़ों को देखते हुए साफ लगता है कि अक्टूबर में ही यदि हालात थोड़े स्थिर रहे, तो अक्टूबर में जहाजों की आवाजाही का आंकड़ा बढ़ सकता है. जिसके बाज भारत में भी त्यौहारी सीजन में गैस की कमी नहीं होगी.

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