कल्पना कीजिए कि नीचे सड़क पर गाड़ियों की लंबी कतार लगी हो और उसी ट्रैफिक के ऊपर एक अलग रास्ते पर इलेक्ट्रिक पॉड तेजी से अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहा हो. यह सुनने में भले ही भविष्य की कहानी जैसा लगता है, लेकिन भारत में ऐसी परिवहन व्यवस्था को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 1 अक्टूबर को Skybus का कॉन्सेप्ट वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया. इसके बाद इस तकनीक को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई है.
Skybus को खासतौर पर ऐसे परिवहन ऑप्शन के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें जमीन पर नई सड़क बनाने के बजाय हवा में बने एलिवेटेड ट्रैक का इस्तेमाल किया जाता है.
क्या है Skybus?
Skybus को आम बस से अलग तरीके से डिजाइन किया गया है. इसमें वाहन जमीन पर सड़क के बजाय ऊंचाई पर तैयार किए गए ट्रैक पर चलते हैं. इस सिस्टम में इलेक्ट्रिक पॉड और कुछ डिजाइन में डबल-डेकर ट्रॉली बस जैसे वाहन शामिल हो सकते हैं. इसे चलाने के लिए अलग एलिवेटेड कॉरिडोर तैयार किया जाता है.
इसका उद्देश्य मौजूदा सड़कों पर वाहनों की भीड़ बढ़ाए बिना यात्रियों और सामान की आवाजाही के लिए एक अलग रास्ता उपलब्ध कराना है. ऐसे शहरों में यह तकनीक उपयोगी हो सकती है, जहां जमीन की कमी के कारण नई सड़क या अन्य बड़े परिवहन ढांचे के लिए जगह जुटाना मुश्किल होता है.
गडकरी ने फिर क्यों किया जिक्र?
Skybus का विचार गडकरी के लिए नया नहीं है. फरवरी 2022 में प्रयागराज में उन्होंने दिल्ली और प्रयागराज के बीच Skybus लाइन की संभावनाओं का अध्ययन करने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार किए जाने की बात कही थी. उसी साल सितंबर में बेंगलुरु में उन्होंने विदेशों में इस्तेमाल हो रही ऐसी तकनीकों का अध्ययन करने की बात भी कही थी.
इसके बाद अमृतसर में भी केबल से चलने वाली Skybus व्यवस्था का प्रस्ताव सामने आया था. खास तौर पर उन इलाकों में ऐसी तकनीक की संभावना बताई गई थी, जहां सड़कें संकरी हैं और जमीन पर परिवहन का विस्तार आसान नहीं है.
कौन-कौन से रूट चर्चा में हैं?
समय के साथ Skybus को कुछ खास शहरी कॉरिडोर से भी जोड़ा गया है. इनमें धौला कुआं से मानेसर के बीच एरियल पॉड सिस्टम का प्रस्ताव शामिल है. बेंगलुरु और पुणे में भी इस तरह की तकनीक को लेकर अध्ययन की बात सामने आ चुकी है..
अभी सपना या जल्द हकीकत?
Skybus को लेकर चर्चा जरूर बढ़ रही है, लेकिन फिलहाल इसे भारत में नियमित सार्वजनिक परिवहन के तौर पर शुरू करने की कोई निश्चित सम सीमा सामने नहीं आई है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक प्रस्ताव अभी फीजिबिलिटी स्टडी और तकनीकी मूल्यांकन के स्तर पर हैं. यानी फिलहाल यह भविष्य की संभावित परिवहन व्यवस्था है, जिसे जमीन पर उतारने के लिए आगे कई चरण पूरे करने होंगे.
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