Sugar Import News: त्योहारी सीजन से ठीक पहले चीनी के बढ़ते दामों पर काबू पाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. विदेश व्यापार महानिदेशालय यानी DGFT ने गुरुवार को नोटिफिकेशन जारी करके कच्ची चीनी के आयात पर लगी ड्यूटी की दीवार को कुछ समय के लिए हटा दिया है. पिछले कुछ हफ्तों से चीनी के दाम लगातार चढ़ रहे हैं. अगस्त की शुरुआत में रिटेल में चीनी 48 से 50 रुपये किलो तक पहुंच गई थी और थोक भाव 4,750 से 4,800 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे थे.
अब 31 अक्टूबर 2026 तक 10 लाख टन कच्ची चीनी बिना किसी इंपोर्ट ड्यूटी के देश में मंगाई जा सकेगी. यह छूट टैरिफ रेट कोटा यानी TRQ के तहत दी गई है जिसका मतलब है कि तय मात्रा तक ही यह सुविधा मिलेगी और उसके बाद पुरानी ड्यूटी फिर लागू हो जाएगी.
पहले आयात की पॉलिसी Free थी लेकिन कोई अलग शर्त दर्ज नहीं थी – अब भी पॉलिसी Free ही रहेगी लेकिन इसके साथ शर्त जोड़ दी गई है कि 31 अक्टूबर 2026 तक 10 लाख मीट्रिक टन का ड्यूटी फ्री टैरिफ रेट कोटा लागू रहेगा.
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एडवांस ऑथराइजेशन वालों को एक बार का मौका
जिन कंपनियों के पास तहत पहले से एडवांस ऑथराइजेशन जारी हो चुका है उन्हें एक बार का विकल्प दिया गया है कि वे अपने ऑथराइजेशन को एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम से हटाकर TRQ स्कीम में बदल लें. यह विकल्प उतनी ही मात्रा पर मिलेगा जितनी कच्ची चीनी नोटिफिकेशन की तारीख तक असल में आयात हो चुकी है. इसमें उस कच्ची चीनी से बनी और आगे बनने वाली रिफाइंड चीनी भी शामिल होगी.
यह छूट मुफ्त नहीं है. इस बदलाव के लिए कंपनियों को वह GST चुकाना होगा जिसमें उन्हें आयात के वक्त छूट मिली थी. साथ ही शर्त यह भी है कि आयातित कच्ची चीनी से बनी रिफाइंड चीनी 31 अक्टूबर 2026 तक घरेलू बाजार में ही बेचनी होगी. इसका मतलब सीधा है. पहले पोर्ट आधारित रिफाइनरियों को इस शर्त पर ड्यूटी फ्री कच्ची चीनी मंगाने की छूट थी कि वे उतनी ही रिफाइंड चीनी बाहर एक्सपोर्ट करेंगी. अब सरकार उस चीनी को एक्सपोर्ट के बजाय घरेलू बाजार में उतारना चाहती है ताकि सप्लाई तुरंत बढ़े.
TRQ को लागू करने और एडवांस ऑथराइजेशन से TRQ स्कीम में बदलने की पूरी प्रक्रिया DGFT अलग से पब्लिक नोटिस के जरिए बताएगा. यानी कौन आयात कर सकेगा, कोटा कैसे बंटेगा, आवेदन की तारीखें क्या होंगी और मिलों को कितना हिस्सा मिलेगा, ये सारे सवाल फिलहाल खुले हैं.
कोल्हापुर में थोक भाव अगस्त की शुरुआत से करीब 20 फीसदी चढ़कर रिकॉर्ड 5,350 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए थे! दिलचस्प बात यह है कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक है और सबसे बड़ा उपभोक्ता भी. अगर यह आयात होता है तो करीब दस साल बाद पहली बार भारत बाहर से चीनी मंगाएगा.
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दामों में तेजी की कई वजहें एक साथ जुड़ी हैं
महाराष्ट्र और कर्नाटक में बारिश कम रहने से अगले सीजन के उत्पादन पर सवाल खड़े हो गए हैं. दूसरी बड़ी वजह एथेनॉल है. सरकार के ब्लेंडिंग प्रोग्राम की वजह से गन्ने और चीनी का बड़ा हिस्सा एथेनॉल बनाने में जा रहा है जिससे बाजार में चीनी की उपलब्धता घट रही है. सरकार अक्टूबर से शुरू होने वाले सीजन में एथेनॉल के लिए इस्तेमाल होने वाले गन्ने पर रोक लगाने पर भी विचार कर रही है ताकि चीनी उत्पादन बढ़े. तीसरी वजह त्योहार हैं. गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली एक के बाद एक आ रहे हैं और इस दौरान मिठाई, प्रोसेस्ड फूड और घरेलू खपत तेजी से बढ़ती है.
एक्सपोर्ट पहले ही बंद हो चुका था
यह पहला कदम नहीं है. सरकार पहले ही चीनी को बाहर जाने से रोक चुकी है. 13 मई 2026 को जारी नोटिफिकेशन के जरिए कच्ची चीनी, सफेद चीनी और रिफाइंड चीनी के एक्सपोर्ट को Restricted कैटेगरी से हटाकर Prohibited कैटेगरी में डाल दिया गया था जो 30 सितंबर 2026 तक लागू है.
इसके अलावा 1 अगस्त 2026 से 30 नवंबर 2026 तक के लिए स्टॉक लिमिट का आदेश भी लागू किया जा चुका है. यानी सरकार ने पहले एक्सपोर्ट रोका, फिर स्टॉक लिमिट लगाई और अब आयात का दरवाजा खोला है. तीनों कदमों का मकसद एक ही है त्योहारों में चीनी के दाम काबू में रखना. भारत ऐसे वक्त पर आयात कर रहा है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार खुद तंग है. इससे आयात महंगा पड़ सकता है और घरेलू दामों में राहत उतनी तेज नहीं भी हो सकती.
उपभोक्ता के लिए यह राहत की उम्मीद है क्योंकि सप्लाई बढ़ने से दाम नरम पड़ सकते हैं. चीनी मिलों के लिए यह मिली जुली खबर है – जो मिलें रिफाइनरी चलाती हैं उन्हें सस्ता कच्चा माल मिलेगा, लेकिन जिन मिलों के पास स्टॉक है उन्हें दाम गिरने का डर रहेगा. गन्ना किसानों की चिंता यह रहेगी कि घरेलू दाम गिरने से मिलों की कमाई पर असर पड़ेगा और गन्ना बकाया चुकाने की रफ्तार धीमी हो सकती है.
एथेनॉल इंडस्ट्री के लिए यह चेतावनी जैसा संकेत है क्योंकि सरकार का झुकाव अभी चीनी की उपलब्धता की तरफ दिख रहा है एथेनॉल की तरफ नहीं. 2022-23 में एथेनॉल की कीमत तय होने के बाद से गन्ने के दाम करीब 16 फीसदी बढ़ चुके हैं जबकि एथेनॉल की कीमत नहीं बदली.