कहते हैं कि कभी- कभी छोटा लालच भी आपको बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है. ऐसा ही कुछ हुआ उत्तर प्रदेश के हाथरस के एक रेस्टोरेंट के साथ भी, जहां पर एक रेस्टोरेंट में कस्टमर से 2 रुपये ज्यादा वसूलना इतना भारी पड़ गया कि उन्हें जुर्माने के रूप में 1 लाख रुपये देना पड़ गए.
इसके अलावा शिकायत करने वाले ग्राहक को एक हजार रुपये मुआवजे के रूप में और 5 हजार रुपये कानूनी खर्च के रूप में देने का निर्देश दिया गया है.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल ये मामला उत्तर प्रदेश का है, जहां पर अलीगढ़ के एक निवासी ने शिकायत की थी कि वो 11 मार्च 2026 को हाथरस के एक रेस्टोरेंट में खाना खाने गया था. इस दौरान उसने पानी मांगा तो उसे पैक की हुई पानी की बोतल दी गई. बोतल पर MRP 18 रुपये लिखा था, लेकिन रेस्टोरेंट ने ग्राहक से 20 रुपये वसूले. यानी ग्राहक से बोतल की तय कीमत से 2 रुपये ज्यादा लिए गए.
ग्राहक ने की शिकायत
इसे ग्राहक ने गलत बताते हुए उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराई. उसने मानसिक परेशानी और आर्थिक नुकसान के लिए 10 लाख रुपये मुआवजा और 15,000 रुपये कानूनी खर्च की मांग की. साथ ही रेस्टोरेंट के खिलाफ खराब सर्विस और अनुचित व्यापार करने की कार्रवाई की मांग की.
रेस्टोरेंट का पक्ष
मामले में नोटिस मिलने के बावजूद रेस्टोरेंट की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया. इसके बाद आयोग ने 21 मई 2026 को रेस्टोरेंट की गैरमौजूदगी में सुनवाई आगे बढ़ाई. आयोग ने ग्राहक की ओर से पेश बिल और पानी की बोतल की फोटो चेक की. बिल में बोतल की कीमत 20 रुपये लिखी थी, जबकि बोतल पर MRP 18 रुपये लिखा हुआ था.
रेस्टोरेंट पर लगा जुर्माना
इन सबूतों के आधार पर आयोग ने माना कि रेस्टोरेंट ने तय कीमत से ज्यादा पैसे लेकर अनुचित व्यापार किया है. जिसके बाद आयोग ने रेस्टोरेंट को दंडात्मक रूप से निर्देश दिए कि उसे 1 लाख रुपये उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा करने होंगे. इसके साथ ही एक हजार रुपये ग्राहक को मानसिक परेशानी के मुआवजे के रूप में देना होंगे. तो वहीं 5 हजार रुपये ग्राहक के कानूनी खर्च के लिए देने होंगे. इस तरह ग्राहक को कुल 6,000 रुपये मिलेंगे, जबकि रेस्टोरेंट को इसके अलावा 1 लाख रुपये उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा करने होंगे.
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