त्योहारी सीजन में खरीदारी करना इस बार लोगों की जेबों पर भारी पड़ रहा है. पूजा-पाठ से लेकर खाने-पीने तक के समानों समेत हर चीज के लिए लोगों को इस बार पहले से ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है. रसोई में इस्तेमाल होने वाले मसाले, दाल-चावल और चीनी से लेकर काजू-बादाम जैसे मेवे तक महंगे हो गए हैं. धनतेरस पर बर्तन खरीदने और घर के लिए टीवी, फ्रिज या वॉशिंग मशीन लेने की योजना बना रहे लोगों के बजट पर भी कीमतों में बढ़ोतरी का असर पड़ रहा है.
कई खाद्य उत्पादों के दाम कुछ ही दिनों में तेजी से बढ़े हैं, जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों ने त्योहारी ऑफर आने से पहले ही अपने उत्पादों की कीमतों में इजाफा कर दिया है. ऐसे में छूट और आकर्षक ऑफर के बावजूद ग्राहकों को खरीदारी के लिए ज्यादा पैसे खर्चने पड़ सकते हैं.
चीनी से जीरे तक महंगाई ने बिगड़ा रसोई का बजट
किराना बाजार में चीनी की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने ग्राहकों की परेशानी बढ़ा दी है. करीब 20 दिन पहले 70 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंची चीनी की कीमत घटकर 50 रुपये तक आ गई थी. लेकिन महज तीन दिनों के भीतर इसमें आठ रुपये प्रति किलोग्राम तक का इजाफा हो गया है और इसका भाव फिर से चढ़कर 58 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है. मसालों की कीमतों में भी राहत नहीं है. कमजोर मॉनसून के चलते पैदावार प्रभावित होने से जीरा, धनिया और हल्दी के दाम महज 15 दिनों में 15 फीसदी तक बढ़ गए हैं.
किराना मंडी के थोक कारोबारी विशेश्वर राजदान के मुताबिक, मेथी दाना करीब 10 फीसदी महंगा हो गया है. छोले और काले चने की कीमतों में 15 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जबकि पिछले दो महीनों में चावल के दाम 25 फीसदी तक की उछाल आई है. महंगाई का असर केवल महंगे मसालों तक सीमित नहीं है बल्कि रोजमर्रा की जरूरतों में शामिल कई चीजों के लिए अब अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं.
एक महीने में मेवों के दाम में बड़ा उछाल
त्योहारों में मिठाइयों और सूखे मेवों के पैकेट उपहार में देने की परंपरा है. लेकिन बादाम, काजू, पिस्ता, अखरोट गिरी और किशमिश गिरी के भाव में अच्छी-खासी बढ़ोतरी हुई है. इनकी कीमतें बढ़ने से इन उपहारों को तैयार करने की लागत भी बढ़ रही है. जिससे इस बार सूखे मेवे और मिठाइयों को उपहार में देना लोगों की जेबों पर अतिरिक्त बोझ डाल रहा है.
किराना मंडियों में एक महीने के इतनी बढ़ी कीमतें
सितंबर के मुकाबले अक्टूबर में बादाम 900 से बढ़कर 1,200 रुपये प्रति किलो, काजू 1,000 से 1,100 रुपये, पिस्ता 1,200 से बढ़कर 1,800–1,900 रुपये और अखरोट की गिरी 1,350 से बढ़कर 1,500 रुपये प्रति किलो हो गई। इसी तरह जीरा 250 से बढ़कर 300–350 रुपये, धनिया 230 से 280 रुपये, हल्दी 190 से 250 रुपये और चीनी 52 से 58 रुपये प्रति किलो पहुंच गई। चावल के दाम 40–100 रुपये से बढ़कर 60–120 रुपये प्रति किलो हो गए, जबकि अरहर दाल 130 से बढ़कर 150 रुपये प्रति किलो बिक रही है.
इन कीमतों में सबसे तेज उछाल पिस्ता में दिखाई देता है. सितंबर में 1,200 रुपये प्रति किलोग्राम बिकने वाला पिस्ता अब 1800 से 1900 रुपये तक पहुंच गया है. बादाम के लिए भी ग्राहकों को अब 300 रुपये प्रति किलोग्राम अतिरिक्त चुकाने पड़ रहे हैं. काजू की कीमत 1000 से बढ़कर 1100 रुपये और अखरोट की गिरी का भाव 1350 से बढ़कर 1500 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है. जीरा, धनिया और हल्दी की बढ़ती कीमतें भी किराना खरीदारी का कुल बिल बढ़ा रही हैं.
ड्राई फ्रूट्स महंगे होने से गिफ्ट पैक पर भी असर
खारी बावली के थोक कारोबारी जितेंद्र मेहता के अनुसार, ड्राई फ्रूट्स की घरेलू उपलब्धता काफी हद तक अफगानिस्तान, ईरान और अमेरिका से होने वाले आयात पर निर्भर करती है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति, फसल की स्थिति, डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल और आयात एवं ढुलाई की लागत का सीधा असर यहां की कीमतों पर पड़ता है. रुपये की कमजोरी और आयात में कमी से भी बाजार में दबाव बढ़ा है. ऐसे में त्योहारों के दौरान मेवों की मांग बढ़ने पर कीमतों में तेजी का असर उपहारों के बजट में साफ नजर आ रहा है.
कीमतें बढ़ने के पीछे क्या हैं वजहें?
खाद्य पदार्थों की महंगाई के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं. प्याज की बढ़ती कीमतें, खाद्य तेल की महंगाई और चावल के महंगे होने से खाने-पीने की दूसरी चीजों की लागत पर भी दबाव पड़ रहा है. कम उत्पादन और आने वाले दिनों में कीमतें और बढ़ने की आशंका के बीच किसानों तथा बड़े कारोबारियों की ओर से स्टॉक रोककर रखने को भी महंगाई की एक वजह बताया जा रहा है.
इससे बाजार में उपलब्धता प्रभावित हो सकती है. ड्राई फ्रूट्स के मामले में आयात पर निर्भरता, रुपये की कमजोरी और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति अहम कारण हैं. वहीं, इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे कच्चे माल की आपूर्ति में बाधा और ऊर्जा संकट को वजह बताया जा रहा है. ईरान-अमेरिका संघर्ष से जुड़ी आपूर्ति संबंधी अनिश्चितताओं का असर भी लागत पर पड़ने की बात कही गई है.
टीवी, फ्रिज और वॉशिंग मशीन खरीदना भी महंगा
त्योहारी सीजन में इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियां आमतौर पर ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए छूट और विशेष ऑफर देती हैं. इस बार हालांकि खरीदारी से पहले ही उत्पादों की कीमतें बढ़ गई हैं. लाजपत नगर में इलेक्ट्रॉनिक्स शोरूम चलाने वाले मित्तल इलेट्रॉनीक के ऑनर राजेंद्र के मुताबिक, कंपनियों ने त्योहारी सीजन से पहले फ्रिज, टीवी और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों के दाम 8 से 10 फीसदी तक बढ़ा दिए हैं.
बाजार में इन उत्पादों की कीमतें पिछले साल की तुलना में करीब 10 फीसदी तक अधिक हैं. जिस कारण ऑफर मिलने के बावजूद ग्राहकों को पहले के मुकाबले अधिक रकम चुकानी पड़ सकती है. खासकर वे परिवार जो त्योहार के मौके पर नया टीवी, फ्रिज या वॉशिंग मशीन खरीदने की योजना बना रहे हैं, उन्हें अपने बजट में बदलाव करना पड़ सकता है.
धनतेरस पर बर्तन खरीदने के लिए भी बढ़ाना होगा बजट
धनतेरस पर बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है. इस दिन स्टील, पीतल, तांबे और दूसरी धातुओं के बर्तनों की मांग बढ़ती है. लेकिन इस बार धातुओं की कीमतों में तेजी के कारण खरीदारी महंगी पड़ रही है. बर्तनों के थोक बाजार मार्केट एसोसिएशन के अधिकारी सुरेश भाई के मुताबिक, तांबे और एल्यूमीनियम की कीमतों में 25 से 30 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है.
स्टेनलेस स्टील के दाम भी 15 फीसदी तक बढ़ चुके हैं. धातुओं की कीमतों में इस उछाल का असर बर्तनों की लागत पर पड़ रहा है. ऐसे में धनतेरस पर खरीदारी करने वाले ग्राहकों को पिछले साल के मुकाबले अधिक खर्च के लिए तैयार रहना होगा.
खाने की थाली भी हुई महंगी
महंगाई का असर बाजार से घर की रसोई और फिर खाने की थाली तक पहुंच रहा है. क्रिसिल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर में शाकाहारी थाली की लागत पिछले साल के इसी महीने की तुलना में 10 फीसदी बढ़ी. वहीं, मांसाहारी थाली की लागत में 6 फीसदी का इजाफा हुआ.
खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी का असर ऐसे समय में दिख रहा है, जब त्योहारों के दौरान घरों में पकवान बनाने, मेहमानों की आवभगत करने और उपहार खरीदने पर अतिरिक्त खर्च होता है. किराना सामान, ड्राई फ्रूट्स, बर्तन और इलेक्ट्रॉनिक्स की बढ़ती कीमतें मिलकर त्योहारों की खरीदारी को पहले से महंगा बना रही हैं.
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