अगर आपके बैंक खाते से बिना आपकी अनुमति के पैसे निकल जाएं, तो आपको क्या करना चाहिए? आज के दौर में डिजिटल पेमेंट के बढ़ते इस्तेमाल के बीच साइबर फ्रॉड के मामले भी लगातार सामने आते हैं. ऐसा ही एक मामला पंजाब के बठिंडा से सामने आया, जहां एक व्यक्ति के बैंक खाते से कई बार में 72,495 रुपए निकाल लिए गए.
इस मामले में बैंक ने दावा किया था कि लेनदेन ग्राहक के मोबाइल पर्सनल आइडेंटिफिकेशन नंबर (MPIN) के जरिए प्रमाणित हुए थे. हालांकि, मामले की सुनवाई के बाद पंजाब राज्य उपभोक्ता आयोग ने बैंक को ग्राहक की रकम ब्याज सहित लौटाने और हर्जाना देने का निर्देश दिया है.
क्या है पूरा मामला?
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 4 जून 2019 को विजय कुमार के बैंक खाते से कुछ ही मिनटों में लगातार पैसे निकाले गए. उन्हें मोबाइल पर लेनदेन के अलर्ट मिले, जिनसे पता चला कि खाते में रकम निकाली जा रही है. दोपहर 1:06 बजे से 1:11 बजे के बीच कई बार लेनदेन हुए. शुरुआती निकासी में 4,999 रुपए और 10,000 रुपए जैसी रकम शामिल थी.
शिकायत के मुताबिक, बैंक अधिकारियों से संपर्क करने और खाता ब्लॉक कराने की कोशिश के दौरान भी लेनदेन जारी रहे. आयोग के रिकॉर्ड के मुताबिक, 4 और 5 जून 2019 को डिजिटल पेमेंट ऐप के जरिए कुल 11 अनधिकृत लेनदेन हुए, जिनमें 72,495 रुपए निकाल लिए गए. घटना के दिन ही विजय कुमार ने बैंक और पुलिस से शिकायत की. इसके अलावा उन्होंने बैंक के दूसरे कार्यालयों से भी इस मामले में संपर्क किया.
बैंक ने क्या दलील दी?
बैंक ने अपनी सफाई में कहा कि सभी लेनदेन मोबाइल पर्सनल आइडेंटिफिकेशन नंबर (MPIN) के जरिए प्रमाणित हुए थे. बैंक के मुताबिक, ग्राहक ने आखिरी बार 9 अप्रैल 2019 को MPIN बनाया था और उसके बाद इसे रीसेट नहीं किया गया था. इस आधार पर बैंक ने आशंका जताई कि ग्राहक की पिन लीक होने या शेयर की गई है.
हालांकि, राज्य उपभोक्ता आयोग ने बैंक के इस तर्क को पर्याप्त नहीं माना. आयोग के मुताबिक, सिर्फ MPIN के इस्तेमाल से यह साबित नहीं होता कि ग्राहक ने खुद लेनदेन की अनुमति दी थी या उसकी लापरवाही के कारण पैसे निकाले गए.
उपभोक्ता आयोग ने बैंक को क्या आदेश दिया?
पंजाब राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने जिला आयोग के फैसले को बरकरार रखा. आयोह ने माना कि बैंक ग्राहक की लापरवाही का कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सका. आयोग ने अपने फैसले में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 6 जुलाई 2017 के उस परिपत्र का हवाला देते हुए कहा कि RBI के नियमों के तहत, निर्धारित परिस्थितियों में समय पर शिकायत करने वाले ग्राहक की अनधिकृत लेनदेन के लिए जिम्मेदारी शून्य हो सकती है.
आयोग ने बैंक को विजय कुमार के खाते से निकाले गए 72,495 रुपये ब्याज सहित लौटाने का निर्देश दिया है. इसके अलावा बैंक को 5,000 रुपये मुआवजा और 5,000 रुपये मुकदमेबाजी खर्च भी देना होगा.
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