आज के समय में साइबर ठग लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए अलग-अलग पैंतरे अपना रहे हैं. कभी बैंक खाता बंद होने का डर दिखाया जाता है, तो कभी डेबिट कार्ड चालू करने की नाम पर निजी जानकारी मांगी जाती है. ऐसी ही एक मामला में केरल की एक रिटायर्ड कॉलेज प्रिंसिपल के खाते से 3.73 लाख रुपये निकाल लिए गए.
इस मामले में अब केरल हाई कोर्ट ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को यह रकम वापस करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि बैंक महिला की लापरवाही साबित नहीं कर पाया, इसलिए उसे हुए नुकसान की भरपाई करनी होगी. ऐसे में आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, यह मामला साल 2019 का है. 13 जुलाई 2019 को महिला को एक मैसेज मिला, जिसमें बताया गया कि उनका डेबिट कार्ड ब्लॉक कर दिया गया है और इसे ऑनलाइन दोबारा चालू किया जा सकता है. इसके कुछ समय बाद महिला के पास उसी नंबर से फोन आया. कॉल करने वाले ने बैंक कर्मचारी होने का दावा किया और कार्ड दोबारा चालू करने के नाम पर उनसे OTP मांगी. महिला ने OTP शेयर कर दिया, जिसके कुछ समय बाद ही महिला के खाते से करीब 3.73 लाख रुपए निकाल लिए गए.
पैसे कटते ही महिला ने की शिकायत
खाते से पैसे कटने के तुरंत बाद महिला ने बैंक के कस्टमर केयर से संपर्क किया. इसके बाद बैंक ने उनका इंटरनेट बैंकिंग खाता ब्लॉक कर दिया. हालांकि, उन्होंने उसी दिन बैंक और पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई. कुछ महीने बाद पुलिस जांच में पता चला कि पश्चिम बंगाल के एक व्यक्ति ने उनकी जानकारी का इस्तेमाल करके पैसे निकाले थे.
इसके बावजूद महिला को अपनी रकम वापस नहीं मिली, जिसके बाद उन्होंने बैंकिंग लोकपाल के पास शिकायत की. लेकिन बैंकिंग लोकपाल से भी राहत नहीं मिलने पर महिला ने केरल हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.
हाई कोर्ट ने SBI को पैसे लौटाने का क्यों दिया आदेश?
केरल हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि महिला ने धोखाधड़ी की जानकारी मिलते ही शिकायत दर्ज करा दी थी. पुलिस की जांच में भी महिला के धोखाधड़ी में शामिल होने की बात सामने नहीं आई. वहीं, बैंक भी यह साबित नहीं कर पाया कि इस मामले में महिला की लापरवाही के कारण नुकसान हुआ है. इसके बाद कोर्ट ने RBI का हवाला देते हुए बैंक को निर्देश दिया कि वह महिला को चार सप्ताह के भीतर 3,73,000 रुपए की रकम लौटाए.
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