Genetic Cholesterol Risk: जीन में है हाई कोलेस्ट्रॉल का खतरा? अच्छी डाइट से कम हो सकता है असर

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How Healthy Diet Modifies Genetic Risk Of Dyslipidemia: अगर परिवार में हाई कोलेस्ट्रॉल या दूसरी मेटाबॉलिक बीमारियों का इतिहास रहा है, तो इसका मतलब यह जरूरी नहीं कि आगे चलकर आपको भी कोलेस्ट्रॉल की समस्या होगी. भारतीय वयस्कों पर हुई एक नई स्टडी में सामने आया है कि कुछ खास जेनेटिक वैरिएंट्स वाले लोगों में खराब डाइट लेने पर कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का खतरा ज्यादा हो सकता है. वहीं, अगर डाइट अच्छी और संतुलित हो, तो इन जेनेटिक जोखिमों के असर को कम किया जा सकता है.

यह स्टडी चेन्नई के मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन (MDRF) और ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के शोधकर्ताओं ने की है. रिसर्च इसी महीने प्रकाशित हुई है. स्टडी ऐसे समय में सामने आई है, जब भारत में डायबिटीज, डिस्लिपिडेमिया यानी खून में फैट का स्तर बढ़ना और हार्ट संबंधी बीमारियों का बोझ लगातार बढ़ रहा है. लोगों की डाइट में रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, फैट, चीनी और नमक की मात्रा बढ़ रही है, जबकि फल, सब्जियों और दूसरे पौष्टिक खाद्य पदार्थों की हिस्सेदारी कम हो रही है.

करीब 9 में से 8 भारतीयों में डिस्लिपिडेमिया

कुछ महीने पहले इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन (MDRF) की इंडियाब सीरीज के तहत हुई एक बड़ी राष्ट्रीय स्टडी में सामने आया था कि करीब 87.3 फीसदी भारतीय वयस्कों में डिस्लिपिडेमिया है. यह स्थिति हार्ट डिजीज और हार्ट अटैक व स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकती है.

Genetic Cholesterol Risk: जीन में है हाई कोलेस्ट्रॉल का खतरा? अच्छी डाइट से कम हो सकता है असर

वहीं, देश में करीब 10.1 करोड़ लोग डायबिटीज से जूझ रहे हैं, जबकि करीब 13.6 करोड़ लोग प्रीडायबिटीज और 35.6 करोड़ लोग हाई ब्लड प्रेशर से प्रभावित हैं. इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन (MDRF) की पिछले साल आई एक स्टडी के मुताबिक, सामान्य भारतीय डाइट से मिलने वाली रोजाना कैलोरी का 62.3 फीसदी हिस्सा कार्बोहाइड्रेट से आता है. इसमें बड़ी मात्रा साधारण या कम क्वालिटी वाले कार्बोहाइड्रेट की होती है.

कैसे किया गया रिसर्च?

नई स्टडी में शोधकर्ताओं ने 25 से 80 साल की उम्र के 1,020 लोगों को शामिल किया. इनमें 452 पुरुष और 568 महिलाएं थीं. ये सभी चेन्नई अर्बन रूरल एपिडेमियोलॉजी स्टडी से जुड़े प्रतिभागी थे. शोधकर्ताओं ने टीसीएफ7एल2 और एफटीओ नाम के दो जीन में मौजूद तीन जेनेटिक वैरिएंट्स पर ध्यान दिया. इन दोनों जीन का संबंध पहले भी डायबिटीज और मेटाबॉलिक समस्याओं से सामने आ चुका है.

Genetic Cholesterol Risk: जीन में है हाई कोलेस्ट्रॉल का खतरा? अच्छी डाइट से कम हो सकता है असर

इसके साथ ही लोगों की डाइट की गुणवत्ता भी जांची गई. इसके लिए इंडियन डाइट क्वालिटी स्कोर का इस्तेमाल किया गया. इसमें आठ तरह के खाद्य समूहों को देखा गया, जिनमें दालें और फलियां, फल और सब्जियां, दूध से बने उत्पाद, सफेद चावल, खाने वाले तेल और फैट, एडेड शुगर, एडेड नमक और चिकन व अंडे शामिल थे.

खराब डाइट में ज्यादा दिखा जेनेटिक असर

रिसर्च में सबसे अहम बात यह सामने आई कि जिन लोगों की डाइट खराब थी, उनमें ज्यादा जेनेटिक जोखिम वाले लोगों का टोटल कोलेस्ट्रॉल और एलडीएल यानी बैड कोलेस्ट्रॉल, कम जेनेटिक जोखिम वाले लोगों की तुलना में ज्यादा था. लेकिन जिन लोगों की डाइट मध्यम या अच्छी गुणवत्ता वाली थी, उनमें यह अंतर खत्म हो गया. यानी जिन लोगों में हाई कोलेस्ट्रॉल का जेनेटिक जोखिम मौजूद था, उनमें भी बेहतर डाइट लेने पर इसका असर उतना दिखाई नहीं दिया.

शोधकर्ताओं के मुताबिक, डाइट और जीन के बीच यह संबंध टोटल कोलेस्ट्रॉल और एलडीएल के मामले में स्टेटिस्टिक्स रूप से महत्वपूर्ण था. ज्यादा जेनेटिक जोखिम का संबंध फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज और एचबीए1सी के ज्यादा स्तर से भी देखा गया.

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डाइट से कितना बदल सकता है असर?

मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन के चेयरपर्सन और स्टडी के को-राइटर डॉ. वी. मोहन ने कहा कि हमारे जीन हमारी मेटाबॉलिक सेहत का पूरा भविष्य तय नहीं करते. यानी किसी व्यक्ति में जेनेटिक जोखिम होने का मतलब यह नहीं है कि उसके कोलेस्ट्रॉल का स्तर हमेशा खराब ही रहेगा. यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के सीनियर वैज्ञानिक के. एस. विमलेश्वरन ने कहा कि लोग अपने जीन को नहीं बदल सकते, लेकिन अपनी खाने की आदतों में बदलाव जरूर कर सकते हैं. उन्होंने डाइट में फल, सब्जियां और दालों को शामिल करने और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, एडेड शुगर, नमक और अनहेल्दी फैट का सेवन सीमित रखने की सलाह दी.

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