टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले में अभी मुंबई के किला कोर्ट में सुनवाई चल रही है. इस दौरान पुलिस ने कोर्ट में बताया है कि आरोपियों ने अपने मोबाइल फोन नष्ट कर दिए हैं. इसमें एक बड़ी साज़िश है, इसका पर्दाफाश होना ज़रूरी है, इसलिए पुलिस ज़्यादा से ज़्यादा कस्टडी की मांग करती है.
पुलिस ने कोर्ट में क्या कहा
-लॉरेंस बिश्नोई गैंग के मास्टरमाइंड अनिल पंडित का नाम सामने आ रहा है. क्राइम का दायरा बहुत बड़ा है
-मुंबई पुलिस ने 14 दिन की पुलिस कस्टडी की मांग की
-सभी के ऊपर आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ है.
-मुंबई पुलिस ने खुलासा किया कि टाइगर श्रॉफ पर हुए हमले में लॉरेंस बिश्नोई गैंग का हाथ है.
-मुंबई पुलिस ने कोर्ट में खुलासा किया कि इस क्राइम में लॉरेंस के साथी अनिल पंडित का नाम आ रहा है.
आरोपियों के वकील ने क्या कहा-
- ये सभी निर्दोष है… इनका कोई लिंक नहीं.. इन्हें कस्टडी देने के जरूरत नहीं है।
- किसी भी तरह की साजिश में इनका कोई हाथ नहीं है
- पुलिस ने कोर्ट को बताया कि इन तीन आरोपियों के अलावा 5 और आरोपी गिरफ्तार हुए हैं.
- इन सभी आरोपियों के खिलाफ नॉन बेलेबल सेक्शन लगे है… आर्म्स एक्ट लगा है, और वेपन नहीं मिला है, आरोपी कहा से हथियार लाए जांच करना है और क्या कोई और हथियार भी है, इसकी जांच करनी है.
सरकारी वकील ने क्या कहा
गिरफ्तार किए गए आरोपी रिकॉर्ड में अपराधी हैं: सरकारी वकील
आरोपियों को CCTV कैमरों की जांच और उनकी बाइक को ट्रैक करके गिरफ्तार किया गया है
उन पर हत्या की कोशिश का आरोप है, इसलिए उन्हें 14 दिन की कस्टडी दी जानी चाहिए.
आरोपियों के वकील की दलील:
आरोपियों के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल दोषी नहीं हैं. इस मामले में अन्य लोगों के नाम और उनकी भूमिका की जानकारी लेना भी जरूरी है. अपराध का दायरा बड़ा बताया जा रहा है, जबकि आरोपियों को केवल संदेह के आधार पर गिरफ्तार किया गया है. आरोपियों को पहले ही 48 घंटे की रिमांड पर रखा गया है और पूरी रात उनसे पूछताछ की गई है. ट्रांजिट रिमांड भी मिल चुकी है. पुलिस ने बड़ी मात्रा में बरामदगी की है. दिल्ली में दो महिलाओं और दो पुरुषों सहित गुजरात में एक तथा हरियाणा में एक पुरुष को गिरफ्तार किया गया है. यानी इन तीन आरोपियों के मामले से जुड़े कुल छह अन्य लोग भी गिरफ्तार किए गए हैं.
क्राइम ब्रांच ने कोर्ट को बताया की जांच के लिए दूसरे राज्यों में भी जाना पड़ेगा. इस मामले में एक ऑडियो क्लिप भी जारी की गई है. बचाव पक्ष के वकील का कहना है कि ट्रांजिट रिमांड की शर्तों का उल्लंघन किया गया है.
ऐसे में आरोपियों के वकील ने आगे पुलिस कस्टडी देने का विरोध करते हुए आरोपियों को न्यायिक हिरासत (मैजिस्ट्रेट कस्टडी) में भेजने की मांग की थी.
लेकिनतीनों आरोपियों को 31 अक्टूबर तक 10 दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा गया.