दिल्ली में दिवाली के लिए खास बाजार तैयार, हस्तशिल्प, गहने और देसी जायकों की मिलेगी भरमार

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दिवाली पर खरीदारी के साथ देशभर के हस्तशिल्प, पारंपरिक गहनों और अलग-अलग राज्यों के पकवानों का स्वाद लेना चाहते हैं, तो दिल्ली के नेचर बाजार में लगे ‘फेस्टिवल ऑफ लाइट्स 2026’ जा सकते हैं. अंधेरिया मोड़ स्थित नेचर बाजार में 22 अक्टूबर से 3 नवंबर तक इस मेले का आयोजन किया जा रहा है. यहां 180 से ज्यादा स्टॉल लगाए गए हैं, जहां कपड़ों, गहनों और घर की सजावट के सामान से लेकर पेंटिंग, उपहार और प्राकृतिक उत्पादों तक कई चीजें मिलेंगी. मेले में खरीदारी के साथ संगीत, नृत्य और बच्चों के लिए भी खास कार्यक्रम रखे गए हैं.

 

दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम (DTTDC) और दस्तकार की ओर से आयोजित इस मेले का मकसद देश की पारंपरिक कला और कारीगरों के काम को बढ़ावा देना है. इस बार मेले में शुक्रवार, शनिवार और रविवार को खास कार्यक्रमों के साथ बाजार रात 10 बजे तक खुला रहेगा. बाकी दिनों में बाजार सुबह 11 बजे से रात 8 बजे तक खुला रहेगा.

 

दिल्ली में रात के पर्यटन को बढ़ावा देने की पहल

 

दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम राजधानी में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अपने पर्यटन स्थलों और दूसरी परियोजनाओं के जरिए रात के समय भी लोगों को घूमने-फिरने के मौके देना चाहता है. इसी पहल के तहत दिल्ली हाट (आईएनए) की तर्ज पर नेचर बाजार में नाइट टूरिज्म बाजार को बढ़ावा दिया जा रहा है. इसके लिए DTTDC की नेचर बाजार वाली जगह पर दस्तकार की ओर से यह आयोजन किया जा रहा है.

 

इस बार दस्तकार ने पहली बार अपने त्योहार से जुड़े कार्यक्रमों को शुक्रवार, शनिवार और रविवार की शाम तक बढ़ाया है. इन दिनों बाजार रात 10 बजे तक खुला रहेगा. यहां लोग हस्तशिल्प की खरीदारी के साथ लाइव प्रस्तुतियां, क्षेत्रीय व्यंजन, बच्चों के कार्यक्रम और कला से जुड़ी कार्यशालाओं का आनंद ले सकेंगे.

 

इस पहल का उद्देश्य दिल्ली में रात के समय भी कला और संस्कृति को लोगों के घूमने-फिरने का हिस्सा बनाना है. साथ ही, कारीगरों को अपने उत्पाद सीधे ग्राहकों तक पहुंचाने का मौका देना भी इसका अहम हिस्सा है.

 

कपड़ों से लेकर गहनों तक, देशभर के हस्तशिल्प की झलक

 

मेले में देश के अलग-अलग हिस्सों के कारीगर अपने उत्पाद लेकर पहुंचे हैं. कपड़ों में चिकनकारी, कश्मीरी कढ़ाई, कांथा, चंबा कढ़ाई, गोटा पट्टी और पैचवर्क के काम वाले कपड़े शामिल हैं. इसके अलावा कलमकारी, अज्रख, सांगानेरी और बाग प्रिंट के कपड़े भी मिलेंगे. बांधनी, शिबोरी और इकत के साथ चंदेरी, महेश्वरी और पैठणी की बुनाई वाले उत्पाद भी यहां प्रदर्शित किए गए हैं.

 

गहनों में चांदी की बारीक कारीगरी वाले आभूषण, डोकरा, मोतियों और धागों से बने गहने, मीनाकारी के आभूषण और लाख व कांच की पारंपरिक चूड़ियां शामिल हैं. घर सजाने के लिए टेराकोटा, सिरेमिक, ब्लू पॉटरी, पेपर माशे, बिदरी धातु कला, पत्थर से बने सामान और लकड़ी की नक्काशी वाले उत्पाद भी मिलेंगे.

 

पेंटिंग और लोक कला में दिलचस्पी रखने वालों के लिए मधुबनी, गोंड, पट्टचित्र, पिछवाई, लिप्पन और कालीघाट पेंटिंग भी मेले का हिस्सा हैं. इसके अलावा प्राकृतिक और जैविक उत्पादों के साथ खाने-पीने की चीजों के स्टॉल भी लगाए गए हैं.

 

बिहार से राजस्थान तक के पकवानों का स्वाद

 

मेले में खरीदारी के साथ खाने-पीने का भी इंतजाम है. यहां 12 से ज्यादा फूड स्टॉल होंगे, जहां बिहार, मणिपुर, हरियाणा और राजस्थान के क्षेत्रीय व्यंजनों के साथ दिल्ली के मशहूर स्ट्रीट फूड का स्वाद लिया जा सकता है.

 

बच्चों के लिए कठपुतली शो, बायोस्कोप और जादू के कार्यक्रम रखे गए हैं. कठपुतली शो 23 अक्टूबर को शाम 5 बजे से रात 8 बजे तक होगा. वहीं, 24 और 25 अक्टूबर को शाम 5 बजे से रात 8 बजे तक बायोस्कोप और मैजिक शो आयोजित किए जाएंगे.

 

वीकेंड पर होंगे संगीत और नृत्य के कार्यक्रम

 

मेले में 24 अक्टूबर को रात 8 बजे से 10 बजे तक युसरा नकवी कबीर के गीत पेश करेंगी. यह कार्यक्रम आर्ट ट्री के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है. 25 अक्टूबर को शाम 4 बजे से रात 10 बजे तक डांडिया और गरबा होगा.

 

30 अक्टूबर को रात 8 बजे से 10 बजे तक कुतबी ब्रदर्स कव्वाली पेश करेंगे. यह कार्यक्रम भी आर्ट ट्री के सहयोग से होगा. 31 अक्टूबर को रात 8 बजे से 10 बजे तक ध्री कुचिपुड़ी कलेक्टिव की अयाना मुखर्जी कुचिपुड़ी नृत्य की प्रस्तुति देंगी. वहीं, 1 नवंबर को शाम 4 बजे से रात 10 बजे तक पंजाबी गिद्धा का आयोजन होगा.

 

वारली और लिप्पन कला को करीब से समझने का मौका

 

मेले में 24, 25 और 31 अक्टूबर तथा 1 नवंबर को हस्तशिल्प कार्यशालाएं भी आयोजित की जाएंगी. इनका समय दोपहर 12 बजे से 2 बजे और फिर 3 बजे से शाम 6 बजे तक रहेगा.

 

इन कार्यशालाओं में महाराष्ट्र के दिलीप रामा बहोटा वारली कला और गुजरात की हरिजन पूजा रायमल लिप्पन कला के बारे में बताएंगी. वारली कला में ज्यामितीय आकृतियों के जरिए रोजमर्रा की जिंदगी और प्रकृति को दर्शाया जाता है. वहीं, लिप्पन कला में मिट्टी और शीशे की मदद से सजावटी डिजाइन बनाए जाते हैं. इन कार्यशालाओं के जरिए लोग पारंपरिक भारतीय कला को करीब से समझ सकेंगे.

 

मेले में जाने से पहले जान लें जरूरी बातें

  • जगह: नेचर बाजार, अंधेरिया मोड़, अनुव्रत मार्ग, नई दिल्ली-110074
  • तारीख: 22 अक्टूबर से 3 नवंबर 2026
  • समय: सुबह 11 बजे से रात 8 बजे तक
  • शुक्रवार से रविवार: सुबह 11 बजे से रात 10 बजे तक
  • प्रवेश शुल्क: 50 रुपये
  • पार्किंग: उपलब्ध

दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम और दस्तकार की यह पहल राजधानी में रात के समय पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ पारंपरिक कला और संस्कृति को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास है. मेले में खरीदारी, खानपान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए कारीगरों को अपने काम को सीधे ग्राहकों के सामने रखने का अवसर भी मिल रहा है.

 



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