ATM से पैसे निकालते समय मशीन पर दिखने वाली रकम और खाते से कटने वाली राशि में अंतर आ जाए, तो ग्राहक के लिए परेशानी बढ़ सकती है. ऐसी स्थिति में कई लोग बैंक से शिकायत करने के बाद भी अपने पैसे वापस मिलने का इंतजार करते रहते हैं.
राजस्थान के उदयपुर से सामने आया एक मामला इसी समस्या को उजागर करता है. यहां ग्राहक के खाते से 10 हजार कट गए, लेकिन ATM ने उसे केवल 1 हजार ही दिए, जिसके बाद मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंच गया.
बैंक ने ATM ऑपरेटर पर डाली जिम्मेदारी
सुनवाई के दौरान बैंक और ATM का संचालन करने वाली एजेंसी की जिम्मेदारी को लेकर विवाद हुआ. बैंक की ओर से मामले में ATM का संचालन या रखरखाव करने वाली एजेंसी की भूमिका का हवाला दिया गया. हालांकि, उपभोक्ता आयोग ने माना कि ग्राहक के खाते से पैसा कटने और पूरी नकदी नहीं मिलने की स्थिति में बैंक अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता. आयोग ने बैंकिंग सेवाओं में कमी को गंभीरता से लिया.
10 हजार कटे, लेकिन हाथ में आए सिर्फ 1 हजार
मामले में ग्राहक ने ATM के जरिए 10 हजार निकालने की कोशिश की थी. लेनदेन के दौरान उसके बैंक खाते से पूरी रकम डेबिट हो गई, लेकिन मशीन से केवल 1 हजार ही बाहर निकले. इस तरह ग्राहक को 9 हजार कम मिले, जबकि खाते से पूरी राशि कट चुकी थी.
इस गड़बड़ी के बाद ग्राहक ने बैंक से संपर्क किया और अपने बचे हुए पैसे वापस दिलाने की मांग की. जब समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो उसने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया.
ATM से कम पैसे निकलें तो क्या करें?
अगर ATM से पैसे निकालते समय खाते से पूरी रकम कट जाए, लेकिन नकदी कम मिले या बिल्कुल न निकले, तो ग्राहक को कुछ जरूरी कदम उठाने चाहिए.
- तुरंत शिकायत करें- अपने बैंक के कस्टमर केयर या संबंधित शाखा को समस्या बताएं.
- सबूत संभालकर रखें- ATM की रसीद, SMS अलर्ट और बैंक स्टेटमेंट सुरक्षित रखें.
- लिखित शिकायत दर्ज करें- शिकायत का नंबर और उसकी तारीख नोट कर लें.
- समाधान नहीं मिलने पर आगे बढ़ें- बैंक की शिकायत निवारण व्यवस्था और जरूरत पड़ने पर उपभोक्ता आयोग का सहारा लें.
RBI के नियमों के अनुसार, ATM से जुड़ी ऐसी विफलता में खाते से गलत तरीके से काटी गई रकम निर्धारित सम सीमा में वापस की जानी चाहिए. यदि पात्र मामले में रकम पांच कैलेंडर दिनों के भीतर वापस नहीं आती, तो देरी के लिए 100 रुपये प्रतिदिन मुआवजे का प्रावधान है.
ATM से कम नकदी मिलने पर शिकायत करने में देरी न करें और लेनदेन से जुड़े सभी सबूत सुरक्षित रखें. इससे बैंक के सामने अपना पक्ष रखने और जरूरत पड़ने पर कानूनी राहत पाने में मदद मिल सकती है.
ग्राहक को मिलेंगे 16 हजार
उदयपुर जिला उपभोक्ता आयोग ने ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कुल 16 हजार देने का आदेश दिया. इसमें 9 हजार की बकाया राशि लौटाने के साथ 7 हजार मुआवजे और कानूनी खर्च के लिए देने का निर्देश शामिल है. इस फैसले से स्पष्ट होता है कि बैंकिंग लेनदेन में गड़बड़ी होने पर ग्राहक उपभोक्ता आयोग से राहत मांग सकते हैं.
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