8वां केंद्रीय वेतन आयोग (CPC) अभी देश के विभिन्न राज्यों का दौरा कर केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों, पेंशनभोगी समूहों, यूनियनों और अन्य हितधारकों से सुझाव ले रहा है. सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई इसकी अध्यक्ष हैं. इस पैनल में सदस्य-सचिव के रूप में पूर्व IAS अधिकारी पंकज जैन शामिल हैं और आयोग के एक सदस्य प्रोफेसर पुलक घोष हैं, जो फाइनेंस के प्रोफेसर होने के साथ-साथ प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य भी हैं.
वेतन आयोग के रिपोर्ट के आधार पर जो भी फैसले लिए जाएंगे उसका असर 1 करोड़ से अधिक लोगों पर होने वाला है, जिनमें केंद्र सरकार के लगभग 50 लाख कर्मचारी और करीब 65 लाख पेंशनभोगी शामिल हैं. इनमें रक्षा और रेल मंत्रालयों के कर्मचारी और सेवानिवृत्त लोग भी शामिल हैं। वेतन आयोग के इस परामर्श दौर के बीच महंगाई भत्ते (DA) के मर्जर और Terms of Reference – ToR को लेकर चर्चाएं तेज हैं.
महंगाई भत्ता क्या है?
महंगाई भत्ता (DA) मूल वेतन का एक हिस्सा है, जो महंगाई से जुड़ा होता है. यह केंद्र सरकार के कर्मचारियों, सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों, रक्षा कर्मियों, बैंक कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के मासिक वेतन पर असर डालता है ताकि बढ़ती महंगाई के प्रभाव को कम किया जा सके.
7वें केंद्रीय वेतन आयोग के नियमों के अनुसार, ‘ऑल-इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स’ (AICPI) के आधार पर साल में दो बार महंगाई भत्ते (DA) में संशोधन किया जाता है. आमतौर पर इसकी घोषणा मार्च और अक्टूबर में की जाती है और इसे जनवरी तथा जुलाई से लागू किया जाता है.
DA मर्जर की क्यों उठ रही मांग?
कई कर्मचारी यूनियनों और प्रतिनिधि समूहों ने केंद्र सरकार से DA (महंगाई भत्ते) के विलय (merger) पर आधिकारिक घोषणा करने की मांग की है. ऐसा इसलिए क्योंकि 7वें CPC (केंद्रीय वेतन आयोग) के नियमों के अनुसार, जब महंगाई भत्ता 50% या उससे अधिक हो जाता है, तो उसे मूल वेतन (Basic Salary) में मिला दिया जाना चाहिए. अभी डीए मूल वेतन का 60% है. केंद्रीय कर्मचारियों को हाउस रेंट अलाउंस (HRA), ट्रैवल अलाउंस (TA) और बच्चों का एजुकेशन अलाउंस जैसे कई भत्ते मिलते हैं, जो सीधे बेसिक सैलरी के आधार पर तय होते हैं. अब अगर 50% या 60% DA बेसिक सैलरी में मर्ज हो जाता है, तो बेसिक सैलरी काफी बढ़ जाएगी. बेसिक सैलरी बढ़ी, तो मिलने वाले भत्तों में भी उछाल आएगा. इससे टेक होम सैलरी काफी बढ़ जाएगी. इसका असर प्रोविडेंट फंड (PF) में योगदान, पेंशन, भत्ते, ग्रेच्युटी पर भी देखने को मिलेगा.
सरकार का क्या है रुख?
सरकार ने बेसिक सैलरी में डीए को मर्ज करने की मांग को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि 50% या 60% DA को मूल वेतन में मर्ज करने का कोई भी प्रस्ताव फिलहाल सरकार के विचाराधीन नहीं है. सरकार का मानना है कि 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों में ऐसा कोई अनिवार्य नियम नहीं है कि DA 50% पार होते ही उसे बेसिक सैलरी में मिला दिया जाए. 5वें वेतन आयोग तक DA 50% होने पर उसे बेसिक सैलरी में मर्ज करने की व्यवस्था थी, लेकिन 6ठें और 7वें वेतन आयोग में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है. अब जो होगा आठवें वेतन आयोग में होगा. 8वें वेतन आयोग के तहत जो भी नया पे-मैट्रिक्स बनेगा, उस समय के DA को बेसिक सैलरी में मिलाक एक नया मूल वेतनमान तय किया जाएगा और अलग से मिलने वाले DA को शून्य (0%) कर दिया जाएगा. फिर इसके बद जैसे-जैसे महंगाई बढ़ेगी उपभोक्ता सूचकांक (CPI-IW) के आधार पर नई बड़ी बेसिक सैलरी पर दोबारा नए सिरे से DA की गणना शुरू होगी.
ये भी पढ़ें:
UAE में भारतीय ने जीती 240 करोड़ की लॉटरी, अब कैसी हो गई जिंदगी? खुद बताया