अगर आपने बैंक खुलवाया होगा या फिर लोन लिया है तो आप इस बारे में जानते होंगे कि इसके लिए कुछ जरूरी दस्तावेजों की जरूरत पड़ती है, जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड. ऐसे में सोचिए, अगर आपने लोन लेने के लिए किसी को अपने दस्तावेज दिए, लेकिन इसी का इस्तेमाल साइबर ठगी में होने लगे तो जाहिर सी बात है कि ये परेशानी का कारण बन सकता है.
ऐसा ही एक मामला दिल्ली से सामने आया है, यहां पर दिहाड़ी मजूदरों को लोन दिलाने की बात कहकर उनके दस्तावेजों को लेने और बैंक अकाउंट खोलने का मामला सामने आया है. हैरानी की बात तो ये है कि इन अकाउंट से जुड़े साइबर अपराध के मामलों में लगभग 7.3 करोड़ रुपये के लेन-देन की जांच पुलिस कर रही है.
जांच के दौरान क्या मिला?
बता दें कि जब पुलिस ने जांच की तो जांच के दौरान ही पुलिस को बड़ी संख्या में कई दस्तावेज मिलें. इनमें शामिल है…
- पैन कार्ड – 60
- आधार कार्ड- 63
- 11 सिम कार्ड
- 7 डेबिट कार्ड
- 7 चेक बुक
- पासपोर्ट साइज फोटो- 55
लोन के बहाने शुरू हुआ खेल
बता दें कि पुलिस ने एक निजी बैंक त्रि नगर शाखा से जुड़े अकाउंट की जांच की थी. पुलिस की जांच में मयंक कूपर का नाम सामने आया है. आरोप ये है कि व्यक्ति दिहाड़ी मजदूरों को लोन दिलाने का झांसा देता था और इसके जरिए उनके पहचान संबंधी दस्तावेजों और तस्वीरों को इकट्ठा करता था.
कई और चीजें भी मिली?
बड़ी बात तो ये है कि पुलिस को जांच के दौरान केवल दस्तावेज ही नहीं मिले, बल्कि सात मोबाइल फोन, 60 हजार रुपये नकद, 150 ग्राम सोना और एक लैपटॉप भी मिला है.
पैसों का लेन-देन किन लोगों के बीच हुआ?
जांच के दौरान मिले इन सामानों की मदद से अब पुलिस ये पता करने की कोशिश कर रही है कि संदिग्ध बैंक अकाउंटों को किस तरह से इस्तेमाल किया गया है और वहीं पैसों का लेन-देन भी किन लोगों के बीच हुआ है. जांच के दौरान ही पुलिस को लगभग 37 ऐसे बैंक अकाउंट मिले, जिनका कनेक्शन देशभर में दर्ज 99 साइबर अपराध की शिकायतों से बताया जा रहा है. ऐसे में सवाल ये है कि आखिर ये मामला किससे जुड़ा है और इसकी शुरुआत कैसे हुई?
दस्तावेजों से क्या करता था व्यक्ति?
मजदूरों के दस्तावेजों से उनकी जानकारी के बिना ही बैंक अकाउंट खुलवाए जाते थे. हालांकि, अभी इस बात की जानकारी सामने नहीं आई है कि व्यक्ति के जरिए जुटाए गए दस्तावेज कितने अकाउंट में इस्तेमाल किए गए हैं.
कैसे किया गिरफ्तार?
दरअसल, पुलिस ने मयंक को बाबा हरिदास नगर स गिरफ्तार किया. पुलिस ने फोन नंबर और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से जुड़े सुरागों से व्यक्ति को गिरफ्तार किया. अहम बात ये है कि पुलिस को जांच के दौरान पता चला है कि कुछ खाताधारक बैंक की शाखा में आए ही नहीं थे. वहीं उनके एड्रेस की जानकारी भी सही नहीं मिली. इसके बाद पुलिस को 17 और संदिग्ध अकाउंट मिले.
पुलिस ने गिरफ्तार किया
पुलिस ने मामले में छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया है. इमने मयंक कूपर और शोभित अग्रवाल भी है. अभी पुलिस त्रि नगर शाखा के मैनेजर की तलाश कर रही है.
बैंक अकाउंट किसने खुलावाएं
अहम सवाल ही यही है कि आखिर बैंक अकाउंट खुलवाने में किसने मदद की? पुलिस के मुताबिक, सरस्वती विहार शाखा के मैनेजर शोभित अग्रवाल पर खाताधारकों की गैरमौजूदगी में अकाउंट खुलवाने और फ्रजी साइन करने का आरोप है. इतना ही नहीं, बल्कि उन पर मयंक कपूर को त्रि नगर शाखा के मैनेजर से मिलवाने का भी आरोप है.
पैसों का क्या हुआ?
बता दें कि मामले में पुलिस को ये शक है कि लेन-देन से मिलने वाले पैसे बैंक अधिकारियों को दिए गए. वहीं बाकी की रकम को Trust Wallet के जरिए USDT में बदल दिया गया. इस मामले की जांच अभी भी जारी है.
लोन के नाम पर दस्तावेज देने से पहले करें ये काम
- सबसे पहले तो ये चेक करें कि जिसको आप लोन के नाम पर दस्तावेज दे रहे हैं वो कंपनी या व्यक्ति फर्जी तो नहीं.
- साथ ही आपसे आधार कार्ड और पैन कार्ड या दूसरे दस्तावेज किस काम के लिए लिए जा रहे हैं ये जांच लें.
- आप दस्तावेज और लोन के आवेदन के लिए और तारीख भी लिख सकते हैं, ताकि उसका इस्तेमाल दूसरे काम के लिए न किया जाएं.
- किसी अनजान व्यक्ति के साथ अपनी निजी जानकारी शेयर न करें.
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