जामिया में 20 साल बाद छात्रसंघ चुनाव का ऐलान, छात्रों ने ठुकराया प्रस्ताव 

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जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्र संघ चुनाव की बहाली को लेकर चल रहा विवाद अब एक नया मोड़ ले चुका है. करीब 20 सालों से बंद पड़े छात्र संघ चुनाव को फिर से कराने की मांग को लेकर पिछले दो हफ्तों से चल रहे प्रदर्शन के बीच यूनिवर्सिटी प्रशासन ने चुनाव कराने पर सहमति जताई है. प्रशासन ने की ओर से जारी आदेश में घोषणाएं की है कि स्टूडेंट यूनियन संविधान के बाद 15 दिन में चुनाव प्रक्रिया संपन्न कर ली जाएगी.

यूनिवर्सिटी प्रशासन की इस घोषणा के बावजूद प्रदर्शनकारी छात्रों ने इस नोटिस और प्रस्ताव को खारिज कर दिया है. छात्रों का तर्क है कि प्रशासन ने केवल अस्पष्ट आश्वासन दिए हैं और इस बात की कोई टाइमलाइन तय नहीं की है कि स्टूडेंट यूनियन के संविधान को मंजूरी आखिर कब तक दी जाएगी. 

क्यों शुरू हुआ था विवाद?

जामिया में 2006 में छात्र संघ को भंग कर दिया गया था. तब से लेकर अब तक परिसर में छात्रों के चुने हुए प्रतिनिधि निकाय की बहाली के लिए कई बार आंदोलन हुए हैं. 12 अक्टूबर से छात्र अपनी मुख्य मांगों को लेकर भूख हड़ताल और अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं. ऐसे में आज सुबह करीब 4:30 बजे जामिया के रजिस्टर प्रो. महताब आलम रिजवी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और छात्रों को प्रशासनिक आदेश सौंपते हुए आंदोलन समाप्त करने का अनुरोध किया. आंदोलन समाप्त करने के साथ ही प्रशासन ने छात्रों को आश्वासन दिया कि छात्र संघ के नए संविधान की औपचारिक मंजूरी के 15 दिनों के अंदर चुनाव कराए जाएंगे. वहीं प्रदर्शन के दौरान छात्रों के खिलाफ जारी किए गए सस्पेंशन ऑर्डर्स और कारण बताओं नोटिस वापस लिए जाएंगे. इसके अलावा आंदोलन के दौरान सिक्योरिटी स्टाफ की कार्रवाई और बर्बरता के आरोप की जांच के लिए एक विशेष समिति बनाई जाएगी. 

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छात्र संघ ने ठुकराया प्रस्ताव 

प्रशासनिक नोटिस के बावजूद प्रदर्शनकारी छात्रों ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है. छात्रों की ओर से प्रस्ताव खारिज करने का मुख्य कारण यह है कि आदेश में यह तो कहा गया है कि संविधान बनने के 15 दिन बाद चुनाव होंगे, लेकिन संविधान को मंजूरी कब तक मिलेगी इसकी कोई तारीख तय नहीं है. वहीं छात्रों का कहना है कि उनकी एक मुख्य मांग चीफ प्रॉक्टर के इस्तीफे की भी थी, जिसे प्रशासनिक आदेश में पूरी तरह नजर अंदाज कर दिया है. 

प्रशासन की भी शर्तें और सार्वजनिक माफी की मांग 

दूसरी और प्रशासनिक समझौते में यह शर्त भी शामिल की गई है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान यूनिवर्सिटी की छवि धूमिल करने वाले अपमानजनक बयान या सोशल मीडिया पोस्ट के लिए छात्रों को प्रेस कांफ्रेंस के जरिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी होगी और ऐसे पोस्ट तुरंत हटाने होंगे. हालांकि छात्रों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी सभी मांगों पर स्पष्ट समय सीमा और लिखित निर्णय नहीं आता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा. वहीं दो दशक बाद यूनिवर्सिटी की ओर से स्टूडेंट्स यूनियन चुनावों की वापसी का ऐलान किया गया है. ऐसे में अब उम्मीद लगाई जा रही है कि जब यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छात्र संघ चुनाव को मंजूरी दे दी है, ऐसे में अब छात्रों की ओर से यह प्रदर्शन खत्म किया जा सकता है.

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