जनधन खातों में औसत बैलेंस रिकॉर्ड 5438 रुपए पहुंचा, जमा हुए 3.24 लाख करोड़

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देश में बैंकिंग सुविधाओं से दूर रहे लोगों को वित्तीय व्यवस्था से जोड़ने के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री जनधन योजना अब बचत के मामले में भी अहम बदलाव दिखा रही है. इस योजना के तहत खोले गए खातों में जमा रकम लगातार बढ़ रही है.

ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जनधन खातों में औसत बैलेंस बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. यह बदलाव बताता है कि इन खातों का इस्तेमाल अब केवल सरकारी योजनाओं का पैसा पाने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि लोग इनमें अपनी बचत भी रख रहे हैं.

5 साल में लगातार बढ़ी खाते में जमा रकम

जनधन खातों में औसत बैलेंस बढ़ने का रुझान पिछले कई सालों से दिखाई दे रहा है. मार्च 2021 में प्रति खाते औसत जमा राशि 3,449 रुपये थी. इसके बाद यह आंकड़ा मार्च 2022 में 3,694 रुपये , मार्च 2023 में 4,087 रुपये , मार्च 2024 में 4,476 रुपये और मार्च 2025 में 4,719 रुपये तक पहुंचा. अब यह बढ़कर 5,438 रुपये हो गया है.

औसत बैलेंस 5,438 रुपये पर पहुंचा

रिपोर्ट के अनुसार, 14 अक्टूबर 2026 तक प्रधानमंत्री जनधन योजना (PMJDY) के खातों में औसत जमा राशि बढ़कर 5,438 रुपये हो गई. इस दौरान खातों में कुल जमा रकम भी बढ़ी है. 19 अगस्त 2026 को जहां कुल जमा लगभग 3.17 लाख करोड़ था, वहीं अक्टूबर में यह बढ़कर करीब 3.24 लाख करोड़ हो गया. यानी इस अवधि में जमा राशि में लगभग 7 हजार करोड़ की बढ़ोतरी दर्ज की गई.

सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे खाते में

जनधन योजना का एक बड़ा उद्देश्य लोगों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना है. आधार और मोबाइल के साथ बैंक खाते के इस्तेमाल से सरकारी लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने में मदद मिली है. इस व्यवस्था को JAM यानी जनधन, आधार और मोबाइल के नाम से जाना जाता है. इससे सरकारी सहायता के भुगतान में पारदर्शिता बढ़ाने और बिचौलियों पर निर्भरता कम करने में मदद मिली है.

जीरो बैलेंस की सुविधा भी है उपलब्ध

जनधन खाते की खासियत यह है कि इसमें न्यूनतम बैलेंस बनाए रखना जरूरी नहीं है, जमा राशि पर ब्याज भी मिलता है. पात्र खाताधारकों को रुपे डेबिट कार्ड और विभिन्न सरकारी बीमा, पेंशन तथा वित्तीय योजनाओं से जुड़ने का अवसर भी मिल सकता है. हालांकि, हर सुविधा के लिए संबंधित नियम और पात्रता लागू होती है.

कुल मिलाकर, जनधन खातों में बढ़ता औसत बैलेंस वित्तीय समावेश की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत है. हालांकि, केवल जमा राशि बढ़ने से हर खाताधारक की आर्थिक स्थिति का आकलन नहीं किया जा सकता.

59 करोड़ से ज्यादा खाते, महिलाओं की बड़ी हिस्सेदारी

14 अक्टूबर 2026 के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, योजना के लाभार्थियों की संख्या लगभग 59.59 करोड़ हो गई है. इनमें करीब 33.23 करोड़ खाते महिलाओं के हैं. ग्रामीण और अर्ध शहरी क्षेत्रों में लगभग 46.27 करोड़ लाभार्थी हैं. इससे पता चलता है कि योजना की पहुंच छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों तक बनी हुई है.

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