- अन्य रिट्रेडेड टायरों पर जीएसटी दर 18% ही रहेगी।
GST Council ने पुराने टायरों को दोबारा इस्तेमाल के लायक बनाने की प्रक्रिया यानी रिट्रेडिंग से तैयार ट्रैक्टर टायरों पर GST की दर घटाकर 5% करने की सिफारिश की है. यह दर 1 नवंबर 2026 से लागू करने का प्रस्ताव है. इसका मकसद रिट्रेडेड ट्रैक्टर टायरों पर GST को नए ट्रैक्टर टायरों पर लागू दर के बराबर करना है
बता दें कि रिट्रेडिंग में घिस चुके टायर का जो बाहरी हिस्सा होता है, उसे बदलकर दोबारा से इस्तेमाल करने के लिए लायक बनाया जाता है. ये ट्रायर नए टायरों की तुलना में सस्ते होते हैं. ऐसे में अब जब इन पर जीएसटी कम करने की बात सामने आई है तो इनकी खरीद पर लगने वाला टैक्स भी घट सकता है. ऐसे में सवाल ये है कि क्या ये जीएसटी की 5 प्रतिशत की दर सभी रिट्रेडेड टायर पर लागू की जा सकती है?
अन्य टायरों पर लागू होगा 5% GST?
कई लोगों का लग सकता है कि 5 प्रतिशत दर अब सभी प्रकार के पुराने या रिट्रेड किए गए टायरों पर लागू की जाएगी, लेकिन असल में ऐसा नहीं है. ट्रैक्टर के रिट्रेडेड टायरों पर ही 18 प्रतिशत से GST घटाकर 5 प्रतिशत किया गया है. बाकी के रिट्रेडेड रबर टायरों, टायर ट्रेड और फ्लैप्स पर ये नई दर लागू नहीं की जाएगी. यानी इन पर पहले की तरह की 18 प्रतिशत GST लागू रहेगा. अब जानते हैं कि आखिर जीएसटी कम होने से किसानों को क्या फायदा हो सकता है?
किसानों को क्या फायदा होगा?
ट्रैक्टर के टायर बदलने का खर्च कम हो सकता है. इससे उन किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है जो नए टायरों के बजाय रिट्रेडेड टायर इस्तेमाल करते हैं. वहीं टायरों पर टैक्स कम होने की वजह से ट्रैक्टर के मेंटेनेंस खर्च में भी बचट हो सकती है. यानी कुल मिलाकर GST कम होने की वजह से रिट्रेडेड टायर इस्तेमाल करने वाले किसानों की जेब पर फायदा हो सकता है.
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