आज के डिजिटल दौर में परिवार के साथ बाहर खाना खाने जाना तो आम है, लेकिन कई बार एक ही टेबल पर बैठे लोग बातचीत करने के बजाय अपने मोबाइल फोन में व्यस्त रहते हैं. बच्चों को शांत रखने के लिए भी अक्सर उनके हाथ में फोन थमा दिया जाता है. इसी आदत को बदलने के लिए इटली के सार्डिनिया में कुछ रेस्टोरेंट एक नई पहल का हिस्सा बने हैं, जहां परिवारों को फोन से दूरी बनाकर एक-दूसरे के साथ समय बिताने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा.
इस पहल का नाम अटावोला सेंजा सकेरमी रखा गया है, जिसका अर्थ है स्क्रीन के बिना भोजन करना. बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाली सार्डिनिया की अधिकारी अन्ना काउ ने इसकी शुरुआत की है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस कार्यक्रम के शुरुआती चरण में 15 रेस्टोरेंट शामिल होंगे. यह एक महीने का पायलट प्रोजेक्ट है, जिसके जरिए परिवारों को भोजन के दौरान मोबाइल और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से दूर रखने की कोशिश की जाएगी.
इस व्यवस्था में रेस्टोरेंट पहुंचने वाले परिवारों को अपने फोन जमा करने होंगे. इसके बदले उन्हें एक खास ‘रीयूनियन किट’ दी जाएगी. इसका उद्देश्य बच्चों और माता-पिता के बीच बातचीत बढ़ाना और खाने के समय को अधिक दिलचस्प बनाना है.
किट में होंगे गेम और ड्राइंग की गतिविधियां
इस किट को इटली के बाल रोग विशेषज्ञों के संगठन ने तैयार किया है. इसमें बच्चों के लिए गेम, ड्राइंग से जुड़ी गतिविधियां और बातचीत शुरू करने में मदद करने वाली सामग्री शामिल होगी. इन गतिविधियों के जरिए बच्चे अपने दिनभर के अनुभव परिवार के साथ साझा कर सकेंगे.
किट में एक जानकारी पुस्तिका भी होगी, जिसमें जरूरत से ज्यादा डिजिटल स्क्रीन इस्तेमाल करने के संभावित नुकसान और घर पर सोशल मीडिया के उपयोग को बेहतर तरीके से संभालने के सुझाव दिए जाएंगे. गेम इस तरह तैयार किए गए हैं कि उन्हें भोजन के दौरान सीमित समय में खेला जा सके.
बच्चों की स्क्रीन आदतों में बदलाव की कोशिश
इस पहल का मुख्य उद्देश्य बच्चों में बढ़ते स्क्रीन इस्तेमाल को लेकर जागरूकता बढ़ाना और परिवारों के बीच आमने-सामने बातचीत को प्रोत्साहित करना है. अन्ना काउ के मुताबिक, बच्चों की डिजिटल आदतों को सुधारने की जिम्मेदारी केवल माता-पिता पर नहीं छोड़ी जानी चाहिए. इसके लिए आसपास का माहौल भी सहयोगी होना जरूरी है.
सार्डिनिया में रेस्टोरेंट एसोसिएशन से जुड़े इमानुएल फ्रोंजिया का मानना है कि भोजन के दौरान फोन में व्यस्त रहने से पारिवारिक बातचीत कम होती जा रही है. कई बार बच्चों को व्यस्त रखने के लिए भी मोबाइल दे दिया जाता है. यह पहल परिवारों को एक-दूसरे के साथ बेहतर समय बिताने का विकल्प देने की कोशिश है.
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