IDBI बैंक के निजीकरण पर राजनीति तेज हो गई है. अब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बैंक कर्मचारियों को चिट्ठी लिखी है. चिट्ठी में राहुल ने सरकार को घेरा है और सवाल उठाए हैं कि जब बैंक मुनाफे में था तो सरकार इसे बेच क्यों रही है. राहुल ने चिट्टी में बैंक कर्मचारियों को समर्थन दिया है.
दरअसल बैंक को बेचे जाने के फैसले को लेकर बैंक कर्मचारी सरकार से नाराज हैं और उन्होंने दो और तीन नवंबर को भूख हड़ताल का ऐलान किया है. इस हड़ताल में यूनाइटेड फोरम ऑफ IDBI ऑफिसर्स एंड एम्प्लॉइज (UFIOE), ऑल इंडिया IDBI ऑफिसर्स एसोसिएशन और ऑल इंडिया इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन शामिल है.
कर्मचारी संगठन की मांग है कि सरकार कम से कम 6% हिस्सेदारी और खरीद कर अपना बहुमत बनाए रखे. साथ ही कर्मचारियों की नौकरी, पेंशन और आरक्षण की सुरक्षा भी दी जाए.
राहुल गांधी ने चिट्ठी में क्या लिखा है?
राहुल गांधी ने लिखा है, ”यह बैंक जनता के पैसे से बना है तो ये जनता का ही है. इसे बेचा नहीं जाना चाहिए. मार्च 2025 में IDBI के कर्मचारी मुझसे संसद में मिले थे. तब मैंने लोकसभा में पूछा था कि जब बैंक मुनाफे में है तो उसे क्यों बेचा जा रहा है, पर सरकार ने कोई जवाब नहीं दिया.”
राहुल गांधी ने आगे लिखा, ”साल 2003 में सरकार ने संसद में वादा किया था कि IDBI Bank में 51% हिस्सेदारी बनाए रखेगी. अब निजीकरण से SC, ST और OBC का आरक्षण भी खत्म हो सकता है और कर्मचारियों की पेंशन, नौकरी की सुरक्षा भी खतरे में पड़ेगी.”
गौलतलब है कि र
52 हजार 878 करोड़ रुपए की है डील
आपको बता दें कि 14 अक्टूबर को कैबिनेट ने इस डील को मंजूरी दी थी. यह डील करीब 52 हजार 878 करोड़ रुपए की है. इसमें सरकार अपनी 30.48% और LIC अपनी 30.24% हिस्सेदारी बेचेगी. बिक्री के बाद सरकार के पास सिर्फ 15% और LIC के पास 19% हिस्सा बचेगा. अभी दोनों के पास मिलाकर 95% हिस्सेदारी है.
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