गाजियाबाद की सोसायटी में गिरेंगे 2 टावर, फ्लैट मालिकों को कितना मिलेगा मुआवजा?

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घर खरीदने के लिए लोग अपनी जिंदगी की बड़ी कमाई लगा देते हैं. कई बार इसके लिए सालों तक होम लोन की EMI भी चुकानी पड़ती है. लेकिन अगर जिस सोसायटी में फ्लैट खरीदा है, वहां निर्माण ही गैरकानूनी निकले तो खरीदारों की मुश्किल बढ़ जाती है. गाजियाबाद की गुलमोहर ग्रीन्स सोसायटी का मामला भी कुछ ऐसा ही है.

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सोसायटी में अवैध निर्माण को लेकर बड़ा आदेश दिया है. कोर्ट ने दो टावर पूरी तरह गिराने और चार अन्य टावरों की एक्स्ट्रा मंजिलें तोड़ने का निर्देश दिया है. इसके साथ ही बिल्डर को 25 लाख मुआवजा देने को कहा है. GDA को भी कोर्ट में याचिका दायर करने वाले 11 लोगों को 50000- 50000 रुपए देने होंगे. 

कौन सा विवाद चल रहा था?
मामला गाजियाबाद के साहिबाबाद, मोहन नगर स्थित गुलमोहर ग्रीन्स रेजिडेंशियल सोसायटी का है. सोसायटी में निर्माण और नक्शे को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था. निवासियों का आरोप था कि बिल्डर ने स्वीकृत नक्शे से अलग निर्माण किया और कुछ कॉमन एरिया को भी बेच दिया.

सोसायटी की RWA और कुछ फ्लैट मालिकों ने इस मामले को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट का रुख किया था. उनका कहना था कि बिल्डर ने GDA से निर्माण में बदलाव की मंजूरी लेते समय फ्लैट मालिकों की सहमति नहीं ली. इसके अलावा, तय नक्शे से अलग एक्स्ट्रा मंजिल और टावर बनाए गए. 

कौन- कौन से टावर गिरेंगे?
कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद GDA की ओर से 18 दिसंबर 2024 को दिए गए तीसरे कंपाउंडिंग आदेश को गैरकानूनी ठहराते हुए रद्द कर दिया. हाई कोर्ट ने GDA को दो टावर पूरी तरह गिराने का आदेश दिया है. इसके अलावा चार टावरों की दो-दो मंजिलें भी हटाई जाएंगी. आदेश के अनुसार टावर 27 और 28 को पूरी तरह गिराया जाएगा. वहीं, टावर 16, 17, 18 और 19 की नौवीं और दसवीं मंजिल हटाई जाएगी.

रिपोर्ट के मुताबिक, टावर 27 और 28 में 80 फ्लैट हैं. वहीं, बाकि के चार टावरों में गिरने वाली मंजिलों पर 32 फ्लैट निर्माणाधीन हैं. कोर्ट ने GDA को दो महीने के भीतर ही कार्रवाई पूरी करने का निर्देश दिया है. पुलिस और जिला प्रशासन को भी कार्रवाई के दौरान GDA की मदद और सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा गया है. 

कितना मिलेगा मुआवजा?

हाई कोर्ट ने GDA को निर्देश दिया है कि कोर्ट में याचिका दायर करने वाले 11 लोगों को 50,000 रुपए प्रति व्यक्ति दिए जाए. यानी इस आदेश के तहत GDA की ओर से टोटल 5.5 लाख का मुआवजा दिया जाएगा. इसके अलावा कोर्ट ने बिल्डर पर 25 लाख रुपए की लागत लगाई है. ये रकम बिल्डर, सारे फ्लैट मालिकों को नहीं देकर गुलमोहर ग्रीन्स की RWA के खाते में जमा करेंगे. आदेश के मुताबिक, बिल्डर को एक महीने के भीतर ये भुगतान करना है.

अब सोसायटी के कॉमन एरिया की बिक्री भी हुई है तो कोर्ट के मुताबिक, बिल्डर ने सोसायटी के कॉमन एरिया के हिस्से 85 लोगों को बेचे थे. अब बिल्डर को इन खरीदारों से लिए गए बिक्री के पूरे पैसे वापस करने हैं. इसके साथ ही निर्माण पर हुआ खर्च भी लौटाना होगा और अगर पेमेंट देने में देरी होती है तो 10% ब्याज भी देना होगा.

किसपर हुई कार्रवाई?
हाई कोर्ट ने बिल्डर के खिलाफ धोखाधड़ी, गलत जानकारी देने और उत्तर प्रदेश अपार्टमेंट एक्ट, 2010 के उल्लंघन के आरोपों में FIR दर्ज करने का निर्देश भी दिया है. पुलिस को दो सप्ताह के भीतर FIR दर्ज करने को कहा गया है. 

कोर्ट ने GDA के पूर्व उपाध्यक्ष के खिलाफ भी विभागीय जांच शुरू करने का निर्देश दिया है. आरोप है कि उन्होंने नियमों के उल्लंघन के बावजूद तीसरे कंपाउंडिंग आदेश को मंजूरी दी थी. राज्य सरकार को एक महीने के भीतर जांच शुरू करने के लिए कहा गया है. इसके अलावा, ध्वस्तीकरण का खर्च भी बिल्डर से भू-राजस्व के बकाये की तरह वसूला जाएगा.

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