यूनियन बैंक के लॉकर से गायब हुए गहने, अब कौन भरेगा नुकसान?

dec947a8bc92e1ac0ca7f757a4f1927217934608066021241 original


बैंक के लॉकर को अक्सर लोग अपने कीमती गहने और जरूरी सामान सुरक्षित रखने की जगह मानते हैं. उन्हें यकीन होता है कि बैंक की निगरानी में उनका सामान महफूज रहेगा. लेकिन जरा सोचिए, अगर आप सालों बाद बैंक जाएं और पता चले कि लॉकर से गहने ही गायब हैं, तो परेशानी कितनी बढ़ सकती है. ऐसा ही एक मामला यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से सामने आया है, जिसमें करीब आठ साल की कानूनी लड़ाई के बाद एक महिला को राहत मिली. 

दिल्ली स्टेट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन ने बैंक को महिला के गूम हुए 47 लाख रुपए के गहनों का पेमेंट करने का आदेश दिया है. इसके अलावा कमीशन ने बैंक को गहनों की कीमत के साथ ब्याज और मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है. इस तरह बैंक को कुल मिलाकर करीब 50.5 लाख रुपये चुकाने होंगे.

क्या है पूरा मामला?

मोनिका कुमारी मारवाह ने साल 1998 में अपने ससुर के साथ यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में जॉइंट लॉकर खुलवाया था. 29 अगस्त 2010 को उनके ससुर की मौत हो गई. इसके बाद भी बैंक लॉकर का किराया काटता रहा. बैंक के रिकॉर्ड में 25 सितंबर 2018 को भी किराया कटने की जानकारी मिली.

मोनिका के मुताबिक, जब उन्होंने 1 सितंबर 2018 को बैंक की ब्रांच से संपर्क किया, तो उन्हें बताया गया कि लॉकर 22 जनवरी 2015 को ही सरेंडर किया जा चुका है. महिला ने इस दावे को गलत बताते हुए कहा कि उन्होंने कभी लॉकर बंद नहीं कराया था. उनके मुताबिक, लॉकर में करीब 47 लाख रुपये के गहने रखे थे, जिनका कोई पता नहीं था.

बैंक ने 2005 में लॉकर सरेंडर होने का किया दावा

यूनियन बैंक ने महिला के आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि लॉकर 21 मई 2005 को ही सरेंडर कर दिया गया था. बैंक ने बाद में किराया कटने को एक गलती बताया और रकम लौटाने की बात कही. हालांकि, बैंक न तो लॉकर सरेंडर करने की रसीद दिखा सका और न ही गहने वापस करने से जुड़ा कोई पुख्ता सबूत पेश कर पाया. इसके बाद कमीशन ने बैंक की दलीलों को स्वीकार नहीं किया और माना कि महिला ने लॉकर सरेंडर नहीं किया था. 

बैंक को 47 लाख रुपये के साथ ब्याज और मुआवजा देना होगा

कमीशन ने यूनियन बैंक को गहनों की कीमत के रूप में 47 लाख रुपये देने का आदेश दिया है. इस रकम पर 1 सितंबर 2018 से 27 अक्टूबर 2026 तक सालाना 6% की दर से साधारण ब्याज भी देना होगा. इसके अलावा बैंक को मानसिक परेशानी के लिए 3 लाख रुपये और मुकदमे के खर्च के लिए 50 हजार रुपये भी चुकाने होंगे. इस तरह महिला को कुल रकम के तौर पर 50.5 लाख रुपए मिलेंगे.

शराब हुई महंगी, 1 नवंबर से हर बोतल पर देने होंगे 10 रुपए ज्यादा



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *