पानी के लिए लोन! किसानों ने सरकार से की अनोखी मांग, नहीं तो होगा बड़ा नुकसान

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  • आपूर्ति में देरी से 2,500 करोड़ रुपये दांव पर.

महंगाई सिर पर सवार है. जिस तरह से चीजों की कीमतें बढ़ रही हैं, उसने आम आदमी का जीना मुहाल कर दिया है. प्याज से लेकर चीनी खाने-पीने की चीजों की कीमतें बेहिसाब बढ़ती जा रही हैं. अब तो चावल भी महंगा हो रहा है. कर्नाटक में पहली बार चावल की कीमत 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की कगार पर है. यहां धान की खेती कर रहे किसान पानी की भारी किल्लत और सूखे की मार से परेशान हैं. 

राज्य के प्रमुख धान उत्पादक क्षेत्रों में पानी न मिलने से 80% तक फसल पूरी तरह बर्बाद होने की कगार पर है. इसे देखते हुए कल्याणा कर्नाटक के किसानों और राइस मिल मालिकों ने तुंगभद्रा इलाके में खरीफ की फसल को बचाने के लिए 2 TMC फीट ‘पानी का कर्ज’ (water loan) मांगा है, जो 20 नवंबर से दिसंबर के मध्य तक के लिए होगा. बता दें कि तुंगभद्रा जलाशय से आंध्र प्रदेश को दिए जाने वाले प्रस्तावित 4 TMC फीट पानी में से 2 TMC फीट पानी अभी कर्नाटक के किसानों को देने की मांग की गई है.

दांव पर लगे हैं करोड़ों रुपये

शनिवार को राज्य के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के साथ हुई बैठक से पहले किसानों ने TOI को बताया कि अगर सरकार 15 दिसंबर तक पानी की आपूर्ति सुनिश्चित नहीं करती है, तो धान की 80% खड़ी फसल बर्बाद हो सकती है.

धान की फसल के लिए 6 लाख से अधिक किसानों ने प्रति एकड़ 40,000 रुपये का निवेश किया है, ऐसे में 2,500 करोड़ रुपये दांव पर लगे हैं. कर्नाटक कृषि मूल्य आयोग के पूर्व अध्यक्ष हनुमानागौडा दलागुरकी ने कहा, “हम सरकार से मांग कर रहे हैं कि आंध्र प्रदेश को छोड़े जाने वाले प्रस्तावित 4 TMCFT पानी में से 2 TMCFT पानी हमें दिया जाए.”

कृष्णा और तुंगभद्रा नदियों से सिंचित, कल्याणा कर्नाटक में हर साल 70-75 लाख मीट्रिक टन चावल का उत्पादन होता है. इसमें से 60% हिस्सा तुंगभद्रा कमांड क्षेत्र से आता है, जिसमें रायचूर, कोप्पल, विजयनगर और बल्लारी शामिल हैं. हालांकि, कृष्णा नदी से सिंचित क्षेत्रों में कोई नुकसान पहुंचने की संभावना नहीं है क्योंकि अलमट्टी जलाशय में पानी की अधिकता है. तुंगभद्रा क्षेत्र में धान की खेती में 50% की कमी आई है.

कर्नाटक राज्य राइस मिल्स एसोसिएशन की अध्यक्ष सावित्री पुरुषोत्तम ने कहा, “अगर सरकार दिसंबर के पहले हफ्ते तक पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करती है, तो धान की बाजार में सप्लाई हो जाएगी और कीमतें स्थिर हो जाएंगी.”

पानी का कर्ज क्या है?

कर्नाटक में स्थित तुंगभद्रा जलाशय से आंध्र प्रदेश को उसके हिस्से का 4 TMC फीट पानी दिया जाना तय है.  कर्नाटक के किसानों का प्रस्ताव है कि इस 4 TMC में से 2 TMC फीट पानी अभी कर्नाटक के धान के खेतों के लिए उधार के तौर पर या लोन स्वरूप दे दिया जाए ताकि 20 नवंबर से 15 दिसंबर के बीच खरीफ की फसल को सूखने से बचाया जा सके. चूंकि यह एक कर्ज है इसलिए खरीफ सीजन खत्म होने के बाद, कर्नाटक अपने दूसरे बड़े जलाशय (जैसे अलमट्टी बांध या कृष्णा बेसिन के अन्य स्रोतों) से 2 TMC फीट पानी छोड़कर कर्नाटक को उसका कर्ज वापस चुका देगा.

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