आज के समय में ज्यादातर लोग पैसे भेजने और लेनदेन के लिए मोबाइल बैंकिंग, UPI और इंटरनेट बैंकिंग का इस्तेमाल करते हैं. इससे बैंकिंग का काम आसान तो हुआ है, लेकिन इसके साथ ही बैंक खातों से धोखाधड़ी के मामले भी सामने आ रहे हैं. कई बार साइबर ठग लोगों के बैंक खाते से उनकी जानकारी के बिना पैसे निकाल लेते हैं. हाल ही में ग्रेटर नोएडा में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की एक शाखा से ग्राहकों के बैंक खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से करोड़ों रुपये गायब होने का मामला सामने आया.
ऐसे में अगर कभी आपके बैंक खाते से बिना आपकी इजाजत के पैसे कट जाएं, तो घबराने के बजाय तुरंत कुछ जरूरी कदम उठाने चाहिए. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के तहत कुछ परिस्थितियों में ग्राहकों को पूरे पैसे वापस मिलने का प्रावधान है. आइए जानते हैं इस बारे में विस्तार से…
खाते से पैसे कटते ही क्या करें?
अगर आपके बैंक खाते से धोखाधड़ी के जरिए पैसे निकल जाते हैं, तो सबसे पहले बैंक को इसकी जानकारी दें. इसके लिए बैंक के आधिकारिक कस्टमर केयर नंबर, मोबाइल ऐप या वेबसाइट पर शिकायत दर्ज कराएं. साथ ही खाते को फ्रीज करने या डेबिट ब्लॉक करने का अनुरोध करें, ताकि आगे कोई ट्रांजैक्शन न हो सके.
इसके बाद आप इस धोखाधड़ी से जुड़े सभी सबूत को अपने पास सुरक्षित रखें. इनमें ट्रांजैक्शन का SMS, ईमेल अलर्ट, बैंक स्टेटमेंट, स्क्रीनशॉट और शिकायत का रेफरेंस नंबर शामिल हैं. इसके अलावा आप तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या “cybercrime.gov.in” (https://cybercrime.gov.in) पर शिकायत दर्ज करें.
कब बैंक को लौटाने पड़ सकते हैं पूरे पैसे?
RBI के नियमों के मुताबिक, अगर धोखाधड़ी बैंक की लापरवाही या सिस्टम की गड़बड़ी के कारण हुई है, तो ग्राहक की जिम्मेदारी जीरो होती है. वहीं, अगर किसी थर्ड पार्टी की गलती से फ्रॉड हुआ है और इसमें न बैंक की गलती है और न ग्राहक की, तो अलर्ट मिलने के 3 कामकाजी दिनों के भीतर बैंक को सूचना देने पर ग्राहक की जिम्मेदारी शून्य रह सकती है.
शिकायत में देरी या OTP शेयर करने पर क्या होगा?
अगर ग्राहक थर्ड पार्टी की धोखाधड़ी के मामले में 4 से 7 कामकाजी दिनों के भीतर बैंक को सूचना देता है, तो उसकी जिम्मेदारी सीमित रहती है. नुकसान की अधिकतम सीमा 5,000 से 25,000 रुपये तक हो सकती है. हालांकि, यह खाते के प्रकार पर निर्भर करती है. 7 कामकाजी दिनों के बाद शिकायत करने पर जिम्मेदारी बैंक की बोर्ड-अनुमोदित नीति के मुताबिक तय होती है.
हालांकि, अगर आपने खुद OTP, PIN या पासवर्ड शेयर किया है, तो बैंक को सूचना देने तक का नुकसान आपको उठाना पड़ सकता है. लेकिन शिकायत के बाद होने वाले किसी अतिरिक्त नुकसान की जिम्मेदारी बैंक की होगी.
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