रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के शेयर आने वाले समय में कमाल करने वाले हैं. ऐसा हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि कई बड़े दिग्गजों को इस बात पर भरोसा है. सितंबर तिमाही में कंपनी को अपने ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) बिजनेस से हुई तगड़ी कमाई और रिलायंस जियो (Jio) के मौजूदा व निरंतर ग्रोथ को देखते हुए रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के शेयरों को कई एक्सपर्ट्स से ‘बुलिश’ रेटिंग मिली है.
कंपनी के शेयरों को गोल्डमैन सैक्स ने प्रति शेयर 1,840 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है, जो शुक्रवार को इसके क्लोजिंग प्राइस से 58% अधिक है. वहीं, नोमुरा ने प्रति शेयर 1,560 रुपये का टारगेट दिया है. इसी तरह से जेफरीज ने भी इस पर अपनी ‘Buy’ रेटिंग को दोहराते हुए 1,625 रुपये का टारगेट दिया है. Emkay Global ने भी हालिया वित्तीय नतीजों के बाद शेयरों के लिए 1,550 रुपये का टारगेट प्राइस सेट किया है.
तिमाही नतीजे ने निवेशकों को किया खुश
कारोबारी साल 2026-27 की दूसरी तिमाही में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ने और रिफाइनिंग मार्जिन मजबूत होने से रिलायंस के तेल कारोबार का मुनाफा पिछले साल के मुकाबले 68% उछलकर 25,203 करोड़ रुपये हो गया है. इस तिमाही में हुए ग्रोथ का 85% योगदान कंपनी के इस ऑयल सेक्टर को जाता है. मतलब यह है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज ने इस तिमाही में जितना भी मुनाफा कमाया है उसका 85% हिस्सा अकेले उसके तेल और केमिकल (O2C) वाले कारोबार से आया है.
दूसरी तरफ कंपनी ने हाल ही में मोबइल टैरिफ दरों में बढ़ोतरी की है, जिससे जियो प्लेटफॉर्म्स का नेट प्रॉफिट भी 13.7% बढ़कर 8,387 करोड़ रुपये हो गया है. बहरहाल, इस दौरान रिलायंस का रिटेल बिजनेस कुछ दबाव में रहा. दरअसल, महंगाई और क्विक-कॉमर्स में भारी निवेश के चलते (EBITDA) में लगभग 3% से 11% की गिरावट देखी गई है.
गोल्डमैन ने क्यों दिया 1840 का टारगेट?
गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, रिलायंस का Q2 EBITDA उनके अनुमानों से 9 प्रतिशत अधिक रहा, जिसका मुख्य कारण O2C (ऑयल-टू-केमिकल्स) सेगमेंट का मजबूत प्रदर्शन था। हालांकि, गोल्डमैन सैक्स का मानना है कि तीसरी तिमाही में रिफाइनिंग मार्जिन में कुछ कमी आ सकती है, क्योंकि बहुत बड़े क्रूड कैरियर (VLCC) के माल ढुलाई खर्च (फ्रेट कॉस्ट) बढ़ गए हैं। हालांकि, रियायती दरों पर मिलने वाले ‘हैवी क्रूड’ की प्रोसेसिंग से इस नुकसान की कुछ हद तक भरपाई हो सकती है.
ब्रोकरेज ने बताया कि रिलायंस रिटेल का EBITDA साल-दर-साल 11% गिरा है. वहीं, रेवेन्यू ग्रोथ पिछले तिमाही के 11% से घटकर 6.4% रह गई है, जिसका कारण त्योहारी मांग का समय और जियोमार्ट (JioMart) में किया गया निवेश है. रिटेल EBITDA मार्जिन में साल-दर-साल 140 बेसिस पॉइंट्स की कमी आई है. हालांकि, गोल्डमैन को कंपनी के नए एनर्जी बिजनेस पर पूरा भरोसा है. इसी क्रम में कच्छ-जामनगर रिन्यूएबल एनर्जी पावर ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट को 2027 की पहली तिमाही तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. वहीं, वित्त वर्ष 2028 (FY28) से रिन्यूएबल एनर्जी और चौबीसों घंटे चलने वाले पावर ऑपरेशंस से कमाई मिलने की उम्मीद है.
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