Childhood Cancer In India: देश के किस राज्य में सबसे ज्यादा बच्चों को कैंसर? जानें टॉप-5 स्टेट्स

1c46f6df5f81acf9c413bab495c86b9517937001542951474 original


Childhood Cancer In India: भारत में बच्चों में स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर एक बेहद संवेदनशील रिपोर्ट सामने आई है. ब्रिटेन की मशहूर रिसर्च मैगजीन जर्नल ऑफ कैंसर पॉलिसी में हाल ही में प्रकाशित एक ऐतिहासिक अध्ययन में भारत में चाइल्डहुड कैंसर को लेकर कई महत्वपूर्ण खुलासे किए गए हैं. AIIMS दिल्ली समेत देश के कई बड़े कैंसर विशेषज्ञों द्वारा किए गए शोध में सामने आया है कि भारत के कुछ राज्यों में बच्चों में कैंसर के मरीजों की संख्या अन्य राज्यों के मुकाबले काफी अधिक है. इस अध्ययन में 22 हजार से भी अधिक कैंसर पीड़ित बच्चों के डेटा का बारीकी से विश्लेषण किया गया है, जिसके आधार पर देश में सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों की सूची तैयार की गई है.

इन राज्यों में हैं बच्चों में कैंसर के सबसे ज्यादा मामले

जर्नल ऑफ कैंसर पॉलिसी में छपी इस स्टडी के अनुसार, भारत में सबसे ज्यादा कैंसर पीड़ित बच्चे उत्तर प्रदेश से हैं. कुल दर्ज मरीजों में अकेले उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 22.6 फीसदी है, जहां सबसे ज्यादा 5,057 बाल मरीज पाए गए. इस सूची में दूसरे स्थान पर देश की राजधानी नई दिल्ली है, जहां 19.2 प्रतिशत के साथ कैंसर का भारी बोझ देखा गया है.

इसके बाद दक्षिण भारत राज्य तमिलनाडु तीसरे नंबर पर आता है, जहां कुल मामलों का 18 फीसदी यानी 4,010 बच्चे कैंसर से प्रभावित मिले हैं. सूची में चौथे स्थान पर आंध्र प्रदेश है, जहां 6.1 प्रतिशत करीब 1,354 मामले दर्ज किए गए. इन प्रमुख राज्यों के अलावा पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और बिहार में भी बच्चों में कैंसर के मरीजों की एक बड़ी आबादी मौजूद है, जो भारत में इस बीमारी के बढ़ते प्रसार को दर्शाती है.

इलाज के लिए तय करनी पड़ती है लंबी दूरी

इस स्टडी में सिर्फ मरीजों के आंकड़े ही नहीं जुटाए गए, बल्कि इलाज के दौरान उनके परिवारों को होने वाली व्यावहारिक और आर्थिक दिक्कतों को भी रेखांकित किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, देश में बच्चों के कैंसर के विशेषज्ञ अस्पतालों और सैंटर्स का वितरम भौगोलिक रूप से बेहद असमान है. इसके कारण ग्रामीण और पिछड़े इलाकों से आने वाले परिवारों को बच्चों के इलाज के लिए औसतन दो घंटे से लेकर तीन घंटे का लंबा सफर तय करना पड़ता है.

करीब 60 फीसदी से अधिक परिवारों को हर बार थेरेपी या रूटन चेकअप के लिए दो घंटे से ज्यादा की दूरी तय कर बड़े शहरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं. डॉक्टरों का कहना है कि ब्लड कैंसर के मुकाबले सॉलिड ट्यूमर से पीड़ित बच्चों को सर्जरी और रेडियोथेरेपी के लिए और भी ज्यादा लंबा सफर तय करना पड़ता है, बल्कि कई बार आर्थिक तंगी के चलते परिवार बीच में ही इलाज छोड़ने पर मजबूर हो जाते हैं. 

यह भी पढ़ें- Heart Tests: 40 के बाद जरूर कराएं ये 3 हार्ट टेस्ट, हेल्थ एक्सपर्ट्स ने दी सलाह

एक्सपर्ट्स ने दिए जरूरी नीतिगत सुझाव

अध्ययन में शामिल AIIMS  दिल्ली, AIIMS कल्याणी और चेन्नई कैंसर इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों ने सरकार को इस दिशा में ठोस नीतियां बनाने की सलाह दी है. डॉक्टरों का मानना है कि केवल बड़े महानगरों में ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्तर पर भी बाल कैंसर चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार किया जाना बेहद जरूरी है. इसके लिए रीजनल ट्रीटमेंट नेटवर्क को मजबूत करने और शुरुआती स्टेज पर ही बीमारी की पहचान करने वाली रेफरल प्रणाली में सुधार करने की मांग की गई है. यदि शुरुआती स्तर पर ही बच्चों में कैंसर के लक्षणों को पहचान कर तुरंत िलाज शुरू कर दिया जाए, तो बच्चों की जान बचाने की दर में भी भारी सुधार किया जा सकता है.

यह भी पढ़ें- Stomach Burning at Night: रात होते ही पेट में बढ़ जाती है जलन, हो सकते हैं ये कारण

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *