भारत में त्यौहारों के सीजन की शुरुआत के साथ ही चीनी के दामों में बढ़ोतरी देखने को मिली. सरकार ने तमाम कोशिशें कीं जिससे चीनी के दामों को कंट्रोल किया जाए. इसके लिए गन्ने की पेराई भी जल्दी शुरू कर दी गई. अक्टूबर के आखिर तक देश की 152 चीनी मिलों ने गन्ने की पेराई शुरू कर दी थी. इन मिलों ने अक्टूबर महीने में करीब 8.5 लाख टन चीनी का उत्पादन किया.
हालांकि, इस बार गन्ने से चीनी बनने की औसत दर में गिरावट दर्ज की गई है. इससे आने वाले महीनों में चीनी के कुल उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ सकती है.
पिछले साल से कम बनी चीनी
राष्ट्रीय सहकारी चीनी मिल महासंघ (NFCSF) के आंकड़ों के मुताबिक, इस सीजन में गन्ने से चीनी बनने की औसत दर 8.01% रही है. पिछले साल इसी समय ये दर 8.44% थी. सरकार ने त्योहारों के दौरान बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए चीनी मिलों से जल्दी पेराई शुरू करने को कहा था.
वैसे तो महाराष्ट्र में गन्ने की पेराई 15 नवंबर के आसपास शुरू होती है, लेकिन इस बार वहां अक्टूबर में ही बड़ी संख्या में मिलों ने काम शुरू कर दिया. इसका मकसद नई फसल से बनी चीनी को जल्द बाजार में पहुंचाना है, ताकि त्योहारों के दौरान चीनी की कमी न हो.
पिछले साल कितना हुआ था चीनी का उत्पादन?
भारत में 2025-26 के पूरे चीनी सीजन में करीब 2.8 करोड़ टन चीनी का उत्पादन हुआ था. इस बार अक्टूबर में पेराई जल्दी शुरू होने से बाजार में नई चीनी की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी. हालांकि, शुरुआती रिकवरी रेट में गिरावट के कारण पूरे सीजन के उत्पादन पर नजर रखना जरूरी होगा.
गन्ने से चीनी बनना है जरूर
बता दें कि गन्ने से चीनी बनने की दर को रिकवरी रेट कहा जाता है. पिछले सीजन में औसत रिकवरी रेट 8.44% थी. इस सीजन में ये घटकर 8.01% रह गई है. यानी इस बार 100 किलो गन्ने से औसतन करीब 8 किलो चीनी निकल रही है. रिकवरी रेट में गिरावट का मतलब है कि उतनी ही मात्रा में गन्ने से पहले के मुकाबले कम चीनी बन रही है. अगर ये गिरावट आगे भी जारी रहती है, तो देश के कुल चीनी उत्पादन पर असर पड़ सकता है.
ये भी पढ़ें: RSS की मजदूर यूनियन की बैठक, सरकार से 7500 पेंशन और 30 हजार EPF की मांग